Jamui Victim Photo Row : बिहार के जमुई में नाबालिग लड़की से जुड़ी घटना के बाद अब पीड़िता की तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा किए जाने को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 24 सितंबर को पीड़िता और उसके परिवार से मुलाकात की थी। इसके बाद मुलाकात की एक तस्वीर उनके सोशल मीडिया हैंडल से साझा की गई, जिसे बाद में हटा दिया गया। विपक्ष ने इस पोस्ट के जरिए नाबालिग की पहचान उजागर होने का आरोप लगाया है।
मीसा भारती पहुंचीं सचिवालय थाना
राष्ट्रीय जनता दल की सांसद मीसा भारती इस मामले में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने की मांग को लेकर सचिवालय थाना पहुंचीं। उन्होंने पुलिस को आवेदन देकर आरोप लगाया कि सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से पीड़िता और उसके परिवार की पहचान सार्वजनिक हुई। मीसा भारती ने इस कार्रवाई को नाबालिग पीड़ित की पहचान की सुरक्षा से जुड़े कानूनी प्रावधानों के संदर्भ में उठाया है।
POCSO कानून का हवाला देकर कार्रवाई की मांग
मीसा भारती का कहना है कि नाबालिग पीड़िता की पहचान उजागर करने के मामले में POCSO Act और Juvenile Justice Act के प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की है। इससे पहले आरजेडी नेता और बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने भी सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर मुख्यमंत्री पर सवाल उठाए थे और POCSO कानून के तहत कार्रवाई की मांग की थी।
पुलिस पर आवेदन नहीं लेने का आरोप
थाने पहुंचने के बाद मीसा भारती ने दावा किया कि पुलिस ने उनका आवेदन तत्काल स्वीकार नहीं किया। उन्होंने कहा कि जब तक आवेदन लिया नहीं जाता और मामले में कार्रवाई नहीं होती, तब तक वह थाने में मौजूद रहेंगी। एबीपी की रिपोर्ट के अनुसार, मीसा भारती ने यह भी सवाल उठाया कि यदि एक सांसद को भी प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है, तो आम नागरिक के लिए स्थिति क्या होगी।
बच्चियों की सुरक्षा पर मीसा ने उठाए सवाल
मीसा भारती ने बच्चियों और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर भी सरकार से सवाल किए। उन्होंने कहा कि किसी भी पीड़ित को न्याय मिलना चाहिए और अपराध के मामले में आरोपी की जाति या धर्म नहीं देखा जाना चाहिए। उनके बयान के अनुसार, महिलाओं और बच्चियों के खिलाफ अपराधों पर गंभीरता से कार्रवाई जरूरी है। यह बयान ऐसे समय आया है, जब जमुई की घटना और उसके वीडियो के सोशल मीडिया प्रसार को लेकर पहले से ही व्यापक चर्चा चल रही है।
जमुई की घटना के बाद पुलिस कार्रवाई
जमुई में 19 सितंबर को कोचिंग से लौट रहे एक किशोर और किशोरी को कथित तौर पर कुछ लोगों ने रोका था। इसके बाद उनके साथ मारपीट और लड़की के साथ छेड़छाड़ किए जाने का आरोप सामने आया। घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित होने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की। रिपोर्टों के मुताबिक, मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है और जांच के लिए विशेष टीम भी गठित की गई है।
सोशल मीडिया पर वीडियो और तस्वीरों को लेकर सख्ती
जमुई मामले में पुलिस ने सोशल मीडिया पर पीड़िता की पहचान उजागर करने वाली सामग्री के प्रसार को लेकर भी कार्रवाई की है। रिपोर्टों के अनुसार, कई सोशल मीडिया अकाउंट्स को नोटिस भेजे गए हैं। अधिकारियों ने ऐसी सामग्री साझा करने से बचने की अपील की है, क्योंकि नाबालिग पीड़ित की पहचान की सुरक्षा कानून के तहत महत्वपूर्ण मानी जाती है।
तस्वीर हटाए जाने के बाद भी जारी है राजनीतिक बहस
मुख्यमंत्री के सोशल मीडिया हैंडल से साझा की गई तस्वीर बाद में हटा दी गई, लेकिन उसके स्क्रीनशॉट के आधार पर विवाद जारी है। आरजेडी नेताओं ने इसे पीड़िता की निजता और पहचान से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया है। वहीं, इस पूरे मामले में कानूनी तौर पर अंतिम स्थिति संबंधित जांच और पुलिस की कार्रवाई से स्पष्ट होगी। फिलहाल तस्वीर साझा किए जाने को लेकर मीसा भारती की शिकायत और विपक्ष की मांग ने बिहार की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है।
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