Indus Waters Treaty : भारत की ओर से सिंधु जल संधि यानी Indus Waters Treaty (IWT) को स्थगित किए जाने के बाद पाकिस्तान में जल संकट को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। पाकिस्तान का कहना है कि भारत के इस फैसले का सीधा असर आम लोगों पर पड़ रहा है। इसी मुद्दे को लेकर पाकिस्तान लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी बात रख रहा है। हालांकि, पाकिस्तान को अपेक्षित अंतरराष्ट्रीय समर्थन नहीं मिलने के बाद अब उसके नेताओं के बयानों में भारत से बातचीत की अपील भी दिखाई दे रही है।
पाकिस्तानी मंत्री ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से की अपील
पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताहुल्लाह तरार ने बुधवार, 30 सितंबर 2026 को कहा कि भारत के फैसले के प्रभाव को अंतरराष्ट्रीय समुदाय को गंभीरता से लेना चाहिए। पाकिस्तानी अखबार डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, तरार ने कहा कि अगर इस मुद्दे पर ध्यान नहीं दिया गया तो पाकिस्तान के लोगों के सामने गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है। उन्होंने दावा किया कि पानी पाकिस्तान के करोड़ों लोगों के जीवन से जुड़ा बुनियादी अधिकार है।
पानी को हथियार बनाने का लगाया आरोप
अताहुल्लाह तरार ने भारत पर पानी को हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान भारत को पानी को हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दे सकता। उनके मुताबिक, सिंधु नदी प्रणाली पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था, कृषि और आम नागरिकों के जीवन के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने यह भी कहा कि किसी अंतरराष्ट्रीय जल समझौते को एकतरफा तरीके से स्थगित करने का प्रभाव दूसरे देशों पर भी पड़ सकता है।
पाकिस्तान बोला- अंतरराष्ट्रीय समुदाय से जारी रहेगी बातचीत
पाकिस्तानी मंत्री ने कहा कि उनका देश इस मामले को अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने उठाता रहेगा। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अपने हितों की रक्षा के लिए अलग-अलग मंचों पर बातचीत जारी रखेगा। तरार के अनुसार, सिंधु जल संधि केवल भारत और पाकिस्तान के बीच पानी के बंटवारे का दस्तावेज नहीं है, बल्कि इसके व्यापक क्षेत्रीय प्रभाव भी हो सकते हैं। पाकिस्तान इसी आधार पर अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहा है।
सिंधु नदी से पाकिस्तान की भावनात्मक जुड़ाव की बात
तरार ने पाकिस्तान के सिंधु नदी से ऐतिहासिक और भावनात्मक संबंध का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के लोग खुद को सिंधु घाटी से जोड़कर देखते हैं। उनके मुताबिक, जब सिंधु जल संधि पर हस्ताक्षर किए गए थे, उस समय शायद यह कल्पना नहीं की गई थी कि भविष्य में ऐसी स्थिति पैदा हो सकती है। उन्होंने संधि के कानूनी प्रावधानों का भी हवाला दिया।
एकतरफा रद्द नहीं हो सकती संधि: तरार
अताहुल्लाह तरार ने दावा किया कि सिंधु जल संधि को एकतरफा तरीके से रद्द नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि विवाद की स्थिति में भी दोनों पक्षों को संधि में निर्धारित नियमों और शर्तों का पालन करना चाहिए। पाकिस्तान का तर्क है कि मौजूदा विवाद का समाधान अंतरराष्ट्रीय कानून और संधि के प्रावधानों के तहत होना चाहिए। भारत ने हालांकि पहलगाम आतंकी हमले के बाद अपना फैसला लिया था।
पहलगाम हमले के बाद भारत ने लिया था फैसला
भारत ने पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि को स्थगित करने की घोषणा की थी। भारत ने अपने फैसले को सीमा पार आतंकवाद और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों के संदर्भ में उचित ठहराया था। इसी दौरान भारत की ओर से यह संदेश भी दिया गया था कि आतंकवाद और सामान्य संबंधों के बीच संतुलन संभव नहीं है। पाकिस्तान इस फैसले का लगातार विरोध कर रहा है।
तरार ने UNGA भाषण का भी किया जिक्र
पाकिस्तानी मंत्री ने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के संयुक्त राष्ट्र महासभा यानी UNGA में दिए गए भाषण का भी उल्लेख किया। तरार ने कहा कि पानी पाकिस्तान के लोगों के लिए जीवनरेखा है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि पाकिस्तान के जल अधिकार प्रभावित होते हैं तो इसका गंभीर मानवीय असर हो सकता है। उन्होंने ऐसी स्थिति को बेहद गंभीर बताते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप की अपील की।
पाकिस्तान ने बताया पानी का मुद्दा बेहद गंभीर
तरार ने भारत के खिलाफ अपने आरोपों को दोहराते हुए कहा कि पाकिस्तान आतंकवाद से खुद प्रभावित रहा है। उनका कहना था कि भारत सीमा पार आतंकवाद का हवाला देकर सिंधु जल संधि को स्थगित करने के फैसले को सही ठहरा रहा है, जबकि पाकिस्तान भी आतंकवाद का पीड़ित होने का दावा करता है। फिलहाल, सिंधु जल संधि को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव बना हुआ है और पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस मुद्दे को लगातार उठा रहा है।
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