Form 6 Update : चुनाव आयोग ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR (Special Intensive Revision) अभियान से जुड़े कुछ पुराने प्रावधानों की समीक्षा करते हुए प्रक्रिया को आसान बनाने की दिशा में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधु व विवेक जोशी के बीच हुई बैठक में मतदाता सूची से जुड़े नियमों और प्रक्रियाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। आयोग के इन फैसलों का उद्देश्य मतदाताओं के लिए प्रक्रिया को सरल बनाना और अनावश्यक प्रशासनिक परेशानी कम करना बताया गया है।
व्यक्तिगत सुनवाई की जरूरत को लेकर बदला नियम
बैठक में मतदाता सूची में नाम, विवरण या अन्य जानकारियों से संबंधित आपत्तियों और सुधार के मामलों में व्यक्तिगत सुनवाई की जरूरत को लेकर भी फैसला लिया गया। अब ऐसी परिस्थितियों में लोगों को हर मामले में अधिकारियों के सामने व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने की आवश्यकता नहीं होगी। इससे उन मतदाताओं को राहत मिल सकती है, जिन्हें दस्तावेजों या मतदाता सूची में दर्ज जानकारी से जुड़ी गड़बड़ियों को ठीक कराने के लिए कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते थे।
फॉर्म 6 में माता-पिता की जानकारी वाली शर्त हटाई
आयोग ने नए मतदाताओं के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म 6 से जुड़ी एक अहम शर्त में भी बदलाव किया है। जिन राज्यों में SIR की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, वहां नए मतदाताओं को फॉर्म 6 भरते समय पिछली मतदाता सूची के आधार पर अपने माता-पिता की जानकारी देना अनिवार्य नहीं होगा। इस बदलाव से पहली बार मतदाता सूची में नाम जुड़वाने वाले लोगों के लिए आवेदन प्रक्रिया पहले की तुलना में आसान होने की उम्मीद है।
आंध्र प्रदेश में अंतिम मतदाता सूची की तारीख बदली
चुनाव आयोग ने कुछ राज्यों में अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित करने की समयसीमा में भी बदलाव किया है। आंध्र प्रदेश में अंतिम मतदाता सूची जारी करने की तारीख को आगे बढ़ाकर 16 अक्टूबर कर दिया गया है। इससे राज्य में SIR से जुड़े शेष कार्यों को पूरा करने के लिए अधिकारियों को अतिरिक्त समय मिलेगा। आयोग के मुताबिक, प्रक्रिया पूरी होने के बाद अंतिम सूची प्रकाशित की जाएगी।
मेघालय में भी बढ़ी अंतिम सूची की समयसीमा
मेघालय में भी अंतिम मतदाता सूची जारी करने की तारीख में बदलाव किया गया है। अब राज्य में अंतिम मतदाता सूची 26 अक्टूबर को जारी की जाएगी। तारीख बढ़ाए जाने से मतदाता सूची में आवश्यक सुधार, दावे और आपत्तियों से संबंधित प्रक्रिया को पूरा करने के लिए अतिरिक्त समय उपलब्ध होगा।
SIR प्रक्रिया को लेकर उठते रहे हैं सवाल
SIR अभियान को लेकर पिछले कुछ समय से राजनीतिक और सार्वजनिक स्तर पर लगातार चर्चा होती रही है। मतदाता सूची में संशोधन की प्रक्रिया, नए फॉर्म, दस्तावेजों की आवश्यकताओं और आयोग के सॉफ्टवेयर से जुड़े मुद्दों को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। ऐसे माहौल में चुनाव आयोग द्वारा नियमों को सरल बनाने और प्रक्रिया को अधिक स्पष्ट करने के लिए किए गए बदलाव महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के बाद बढ़ा राजनीतिक विवाद
SIR और चुनाव आयोग को लेकर राजनीतिक विवाद भी लगातार चर्चा में रहा है। द इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित एक रिपोर्ट के बाद विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका और आयोग के कामकाज को लेकर सवाल उठाए। विपक्ष की ओर से उनके इस्तीफे की मांग भी सामने आई है। हालांकि, इन राजनीतिक आरोपों और मांगों को संबंधित पक्षों के बयानों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
ज्ञानेश कुमार को भारत रत्न देने की मांग भी चर्चा में
इसी बीच दूसरी ओर सोशल मीडिया और कुछ सार्वजनिक चर्चाओं में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को भारत रत्न देने की मांग किए जाने की बातें भी सामने आई हैं। इस तरह SIR को लेकर एक तरफ राजनीतिक विरोध और दूसरी तरफ समर्थन से जुड़ी आवाजें दिखाई दे रही हैं। चुनाव आयोग द्वारा नियमों में किए गए ताजा बदलाव ऐसे समय में सामने आए हैं, जब मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया को लेकर देशभर में व्यापक बहस जारी है।
मतदाताओं के लिए क्या बदलेगा
नए फैसलों का सीधा असर मतदाता सूची में सुधार और नए मतदाताओं के पंजीकरण की प्रक्रिया पर पड़ सकता है। व्यक्तिगत सुनवाई की आवश्यकता कम होने और कुछ मामलों में फॉर्म 6 की शर्तें आसान किए जाने से आवेदन प्रक्रिया अधिक सुविधाजनक हो सकती है। हालांकि, अलग-अलग राज्यों में SIR की स्थिति और लागू प्रक्रियाएं अलग हो सकती हैं, इसलिए मतदाताओं को संबंधित राज्य के चुनाव कार्यालय की आधिकारिक जानकारी के आधार पर आगे की प्रक्रिया पूरी करनी चाहिए।
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