Windfall Tax Cut : डीजल और ATF पर घटा टैक्स, पेट्रोल में कोई बदलाव नहीं

सरकार ने 1 अक्टूबर से डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल यानी ATF के एक्सपोर्ट पर विंडफॉल टैक्स घटा दिया है। डीजल पर कुल लेवी अब ₹16 प्रति लीटर हो गई है, जो पहले ₹20 थी। वहीं पेट्रोल के टैक्स में कोई बदलाव नहीं किया गया। इस फैसले का असर जानिए।

Windfall Tax Cut : सरकार ने 1 अक्टूबर से डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल यानी ATF के निर्यात पर लगने वाले विंडफाल टैक्स में कटौती कर दी है। वित्त मंत्रालय की ओर से जारी नोटिफिकेशन के अनुसार, डीजल एक्सपोर्ट पर स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (SAED), रोड एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर सेस समेत कुल लेवी अब ₹16 प्रति लीटर होगी। इससे पहले यह दर ₹20 प्रति लीटर थी। यानी डीजल पर निर्यात लेवी में ₹4 प्रति लीटर की कमी की गई है।

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ATF एक्सपोर्ट ड्यूटी में भी बड़ी कटौती

एविएशन टर्बाइन फ्यूल यानी विमान ईंधन के निर्यात पर भी सरकार ने शुल्क कम किया है। 1 अक्टूबर से ATF एक्सपोर्ट पर लगने वाली लेवी ₹15 से घटकर ₹10.5 प्रति लीटर हो गई है। इस तरह ATF पर निर्यात शुल्क में ₹4.5 प्रति लीटर की कटौती की गई है। विमानन ईंधन के निर्यात से जुड़े कारोबारियों के लिए यह बदलाव लागत और मार्जिन के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकता है।

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पेट्रोल एक्सपोर्ट पर शुल्क में कोई बदलाव नहीं

सरकार ने पेट्रोल के निर्यात पर लगने वाली ड्यूटी में कोई बदलाव नहीं किया है। पेट्रोल एक्सपोर्ट पर शुल्क पहले की तरह ₹0.5 प्रति लीटर ही रहेगा। यानी 1 अक्टूबर से लागू नई व्यवस्था में डीजल और ATF पर शुल्क घटाया गया है, जबकि पेट्रोल पर मौजूदा दर को बरकरार रखा गया है।

नई दरें अगले पखवाड़े तक रहेंगी लागू

वित्त मंत्रालय ने नई दरों की जानकारी बुधवार को जारी नोटिफिकेशन के जरिए दी है। संशोधित शुल्क 1 अक्टूबर से अगले पखवाड़े की समीक्षा तक प्रभावी रहेगा। सरकार पेट्रोलियम उत्पादों पर लागू विंडफाल टैक्स की दरों की समीक्षा प्रत्येक 15 दिन में करती है। इसलिए आने वाले पखवाड़े में अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति के आधार पर इन दरों में दोबारा बदलाव संभव है।

पश्चिम एशिया संकट के दौरान लगाया गया था टैक्स

सरकार ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में कीमतों में उथल-पुथल के बीच 27 मार्च से डीजल और ATF के निर्यात पर यह लेवी लागू की थी। इसका प्रमुख उद्देश्य घरेलू बाजार में पेट्रोलियम उत्पादों की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना और अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तेजी के दौरान अत्यधिक निर्यात को नियंत्रित करना था।

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बाद में पेट्रोल भी विंडफाल टैक्स के दायरे में आया

डीजल और ATF के बाद सरकार ने 16 मई से पेट्रोल के निर्यात को भी विंडफाल टैक्स के दायरे में शामिल किया था। इसके बाद से पेट्रोलियम उत्पादों पर लगने वाली लेवी की समय-समय पर समीक्षा की जाती रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और तैयार पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में बदलाव को ध्यान में रखते हुए सरकार दरों में संशोधन करती है।

हर 15 दिन में अंतरराष्ट्रीय कीमतों पर नजर

विंडफाल टैक्स की दर कोई स्थायी शुल्क नहीं है। सरकार अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों और पेट्रोलियम उत्पादों के वैश्विक बाजार में होने वाले उतार-चढ़ाव को ध्यान में रखकर इसकी समीक्षा करती है। अगर वैश्विक कीमतों में बड़ा बदलाव आता है तो अगली समीक्षा में निर्यात शुल्क बढ़ाया या घटाया जा सकता है। इसलिए 1 अक्टूबर से लागू दरों को भी स्थायी दर नहीं माना जा सकता।

एक्सपोर्टर्स पर क्या होगा असर

डीजल और ATF पर निर्यात लेवी कम होने से इन उत्पादों को विदेश भेजने वाली कंपनियों पर लगने वाला टैक्स बोझ घटेगा। इससे उनकी निर्यात लागत और संभावित मार्जिन पर असर पड़ सकता है। हालांकि, यह कटौती मुख्य रूप से निर्यात पर लागू शुल्क से संबंधित है और इसे घरेलू बाजार में पेट्रोल या डीजल की खुदरा कीमतों में सीधे बदलाव के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।

घरेलू उपभोक्ताओं के लिए क्या बदला

ताजा फैसले में घरेलू स्तर पर पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर लागू करों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसलिए निर्यात शुल्क में कटौती का घरेलू वाहन चालकों को सीधे तौर पर पेट्रोल या डीजल सस्ता होने के रूप में लाभ नहीं मिलता है। इसका तत्काल प्रभाव पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात कारोबार से जुड़े शुल्क पर पड़ता है।

क्रूड कीमतों पर भी बनी हुई है नजर

सरकार का यह फैसला ऐसे समय आया है जब पश्चिम एशिया में तनाव और वैश्विक ऊर्जा बाजार की परिस्थितियों पर लगातार नजर रखी जा रही है। विंडफाल टैक्स में कटौती से यह संकेत मिलता है कि सरकार मौजूदा अंतरराष्ट्रीय बाजार परिस्थितियों के अनुरूप निर्यात शुल्क को समायोजित कर रही है। हालांकि, केवल इस कटौती के आधार पर कच्चे तेल की कीमतों में स्थायी गिरावट का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा, क्योंकि वैश्विक ऊर्जा बाजार कई कारकों से प्रभावित होता है।

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Chandan Das

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