69000 Teacher Recruitment : उत्तर प्रदेश की 69 हजार सहायक शिक्षक भर्ती से जुड़े आरक्षण विवाद की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से चयनित अभ्यर्थियों का विस्तृत रिकॉर्ड मांगा है। अदालत ने सरकार को चयन सूची के साथ अभ्यर्थियों से संबंधित जरूरी जानकारी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। यह मामला खास तौर पर करीब 19 हजार पदों के आरक्षण विवाद से जुड़ा है। मामले की सुनवाई जस्टिस एसबी भट्टी और जस्टिस एनके सिंह की पीठ ने की।
चयन सूची दोबारा बनी तो EWS अभ्यर्थियों पर भी होगा विचार
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया कि यदि लखनऊ हाईकोर्ट के फैसले के बाद 69 हजार शिक्षक भर्ती की चयन सूची दोबारा तैयार करने की स्थिति बनती है, तो ईडब्ल्यूएस श्रेणी के अभ्यर्थियों को भी शामिल करने के मुद्दे पर विचार किया जा सकता है। हालांकि, अदालत ने यह भी संकेत दिया कि पहले से चयनित शिक्षकों को केवल नई सूची तैयार होने के कारण तत्काल बाहर नहीं किया जाना चाहिए।
चयनित अभ्यर्थियों का पूरा ब्योरा मांगा गया
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से चयनित अभ्यर्थियों की पूरी सूची तैयार करके पेश करने को कहा है। इस डेटा में अभ्यर्थियों के नाम, क्रमांक, श्रेणी, लिखित परीक्षा में प्राप्त अंक, मेरिट, क्वालिफाइंग अंक और अन्य आवश्यक जानकारी शामिल करने का निर्देश दिया गया है। अदालत इस विस्तृत डेटा के आधार पर भर्ती प्रक्रिया और आरक्षण व्यवस्था से जुड़े विवाद को समझना चाहती है।
मेरिट और आरक्षण के नियमों पर अदालत की नजर
सुनवाई के दौरान 18 नवंबर 2020 के आरक्षण संबंधी फैसले का भी उल्लेख किया गया। पीठ ने इस फैसले के संदर्भ में कहा कि भर्ती प्रक्रिया में मेरिट और आरक्षण से जुड़े निर्धारित नियमों का पालन किया जाना आवश्यक है। इसी आधार पर चयन सूची और अभ्यर्थियों के अंकों से जुड़ी जानकारी का महत्व बढ़ गया है।
ATRI अंक और क्वालिफाइंग मार्क्स पर भी सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान ATRI के अंक और क्वालिफाइंग अंक से जुड़े मुद्दे पर भी सवाल उठाए। अदालत ने पूछा कि गलत प्रश्न के कारण मिलने वाला एक अंक केवल कुछ अभ्यर्थियों को ही क्यों दिया गया। पीठ ने इस पहलू पर भी स्पष्टता मांगी और कहा कि यदि चयन सूची दोबारा तैयार होती है, तो ऐसे अभ्यर्थियों को भी उचित तरीके से इसमें शामिल करने पर विचार किया जाना चाहिए।
गलत प्रश्न के एक अंक को लेकर विवाद
भर्ती प्रक्रिया में गलत प्रश्न से संबंधित अंक का मुद्दा भी लंबे समय से चर्चा में रहा है। अदालत यह समझना चाहती है कि इस अतिरिक्त अंक का लाभ किन अभ्यर्थियों को मिला और इसके पीछे अपनाए गए नियम क्या थे। चयन सूची के पुनर्गठन की स्थिति में इस पहलू का असर अभ्यर्थियों की मेरिट और श्रेणीवार स्थिति पर पड़ सकता है।
सरकार ने अनारक्षित और आरक्षित अभ्यर्थियों का आंकड़ा बताया
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार करीब 40 हजार अभ्यर्थी अनारक्षित श्रेणी में हैं, जबकि लगभग 36 हजार अभ्यर्थी आरक्षित वर्ग से संबंधित हैं। हालांकि, सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि उपलब्ध आंकड़ों और संबंधित विवरणों को लेकर स्थिति अभी स्पष्ट की जा रही है।
अब सुप्रीम कोर्ट में पेश होगा पूरा डेटा
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को अगली सुनवाई के लिए जरूरी जानकारी और चयन सूची उपलब्ध कराने को कहा है। अदालत के सामने पेश होने वाला डेटा इस मामले की आगे की सुनवाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। अभ्यर्थियों की नजर अब सरकार की ओर से प्रस्तुत किए जाने वाले पूरे रिकॉर्ड और अदालत के अगले निर्देशों पर है।
अभ्यर्थियों के लिए आगे की सुनवाई महत्वपूर्ण
69 हजार सहायक शिक्षक भर्ती का मामला लंबे समय से आरक्षण, मेरिट और चयन सूची से जुड़े विवादों के कारण चर्चा में है। सुप्रीम कोर्ट के ताजा निर्देश के बाद अब सरकार को अभ्यर्थियों का विस्तृत डेटा तैयार कर अदालत के समक्ष रखना होगा। इसके बाद अदालत उपलब्ध रिकॉर्ड और संबंधित नियमों के आधार पर मामले में आगे की कार्यवाही तय करेगी। फिलहाल अंतिम स्थिति अगली सुनवाई और अदालत के आदेशों पर निर्भर करेगी।
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