Disha Salian Case: वकील नीलेश ओझा ने CBI को सौंपे नए सबूत, आरोपियों पर कार्रवाई की मांग

दिशा सालियान केस में जांच को लेकर नया मोड़ सामने आया है। वकील नीलेश ओझा ने CBI को नए सबूत सौंपते हुए मामले में नामजद आरोपियों से पूछताछ और आगे की कानूनी कार्रवाई की मांग की है। उनके दावे के बाद केस से जुड़े पुराने रिकॉर्ड और आरोप फिर चर्चा में आ गए हैं।

Disha Salian Case :  मुंबई में दिशा सालियान मामले को लेकर एक बार फिर जांच की मांग तेज हो गई है। मामले में वकील नीलेश ओझा ने दावा किया है कि उनके द्वारा एफआईआर और अदालत में दाखिल किए गए आरोपों के समर्थन में सरकारी रिकॉर्ड और नए दस्तावेज सामने आए हैं। ओझा ने इन दस्तावेजों को सीबीआई के सामने पेश किए जाने की बात कही है और एजेंसी से मामले में नामजद लोगों के खिलाफ जांच आगे बढ़ाने तथा सबूत मिलने पर कानून के अनुसार कार्रवाई करने की मांग की है।

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सरकारी रिकॉर्ड सामने आने का दावा

नीलेश ओझा के मुताबिक, मामले से संबंधित कई ऐसे सरकारी रिकॉर्ड सामने आए हैं, जिन्हें वह अपनी ओर से लगाए गए आरोपों के समर्थन में महत्वपूर्ण मानते हैं। उन्होंने कहा कि इन दस्तावेजों को सीबीआई को उपलब्ध कराया गया है। उनका दावा है कि रिकॉर्ड की जांच करने से मामले से जुड़े घटनाक्रम और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका को समझने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि जांच एजेंसी की जांच के बाद ही हो सकेगी।

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गृह विभाग की रिपोर्ट का किया हवाला

वकील ने गृह विभाग से संबंधित एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि 30 मार्च 2021 को जॉइंट सीपी क्राइम की ओर से तत्कालीन अतिरिक्त मुख्य सचिव, गृह विभाग को रिपोर्ट सौंपी गई थी। उनके अनुसार, रिपोर्ट में सचिन वाजे की नियुक्ति, उनकी जिम्मेदारियों और उन्हें दोबारा पुलिस सेवा में शामिल किए जाने की प्रक्रिया से जुड़े पहलुओं की जांच की गई थी। ओझा ने इन रिकॉर्ड को दिशा सालियान मामले की जांच के संदर्भ में महत्वपूर्ण बताया है।

दिशा सालियान की मौत की तारीख का जिक्र

ओझा ने दावा किया कि संबंधित रिपोर्ट में दिशा सालियान की मौत की तारीख का भी उल्लेख किया गया है। उनका कहना है कि रिपोर्ट में इस बात से जुड़े सवाल उठाए गए थे कि दिशा सालियान की मौत से कुछ दिन पहले सचिन वाजे को क्राइम इंटेलिजेंस यूनिट में नियुक्त करने की प्रक्रिया किस तरह हुई थी। उन्होंने वाजे को जिम्मेदारी दिए जाने की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए हैं।

सचिन वाजे की सेवा में वापसी पर सवाल

वकील ने दावा किया कि सचिन वाजे को पहले एक मामले के बाद पुलिस विभाग से बाहर किया गया था और करीब 16 साल बाद उनकी सेवा में वापसी हुई। ओझा ने उनकी दोबारा नियुक्ति और जिम्मेदारी सौंपे जाने की प्रक्रिया से जुड़े नियमों तथा परिस्थितियों की जांच की मांग की है। उनका कहना है कि इस पूरे घटनाक्रम से जुड़े आधिकारिक रिकॉर्ड की विस्तृत जांच आवश्यक है।

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परमबीर सिंह के बयानों का भी हवाला

नीलेश ओझा ने तत्कालीन पुलिस अधिकारी परमबीर सिंह के कथित बयानों का भी हवाला दिया। उनका दावा है कि परमबीर सिंह ने सीबीआई और मीडिया के सामने सचिन वाजे की बहाली को लेकर राजनीतिक दबाव से संबंधित बातें कही थीं। ओझा के मुताबिक, इन बयानों और उपलब्ध दस्तावेजों को एक साथ रखकर जांच की जानी चाहिए, ताकि मामले से जुड़े तथ्यों की वास्तविक स्थिति सामने आ सके।

सीबीआई को नए दस्तावेज सौंपने का दावा

ओझा ने बताया कि उन्होंने सीबीआई को मामले से संबंधित नए दस्तावेज और अन्य जानकारियां उपलब्ध कराई हैं। इसके साथ ही उन्होंने एजेंसी से कुछ महत्वपूर्ण लोगों के बयान दर्ज करने की मांग की है। इनमें पूर्व अधिकारी समीर वानखेड़े का नाम भी शामिल है। उनका कहना है कि मामले से जुड़े अन्य व्यक्तियों के बयानों और उपलब्ध दस्तावेजों की भी जांच की जानी चाहिए।

कई लोगों की भूमिका जांचने की मांग

वकील ने दिशा पाटनी और शिवानी मुंदरेजा के संबंध में भी सीबीआई से जांच की मांग की है। उन्होंने उनके द्वारा दिए गए बयानों की जांच किए जाने की जरूरत बताई। इसके अलावा ओझा ने अपने पहले के एफआईआर और अदालत में दाखिल हलफनामे का हवाला देते हुए आदित्य ठाकरे समेत अन्य लोगों के खिलाफ लगाए गए आरोपों की भी जांच की मांग की है। ये सभी आरोप फिलहाल जांच के दायरे में हैं और उनकी पुष्टि संबंधित एजेंसियों की जांच से होनी है।

एनआईए शिकायत की जांच की भी मांग

नीलेश ओझा ने अपनी ओर से एनआईए को दी गई शिकायत का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि शिकायत में लगाए गए गंभीर आरोपों की भी जांच की जानी चाहिए। उनका कहना है कि पहले विभिन्न एजेंसियों को जानकारी दी जा चुकी है और अब नए दस्तावेजों के साथ मामला सीबीआई के सामने रखा गया है। ओझा ने जांच के दौरान उपलब्ध तथ्यों और सबूतों के आधार पर आगे कार्रवाई की मांग की है।

जांच में तेजी और सुरक्षा की मांग

वकील ने सीबीआई से उपलब्ध साक्ष्यों, दस्तावेजों और गवाहों के आधार पर जांच में तेजी लाने का अनुरोध किया है। उन्होंने महत्वपूर्ण गवाहों, शिकायतकर्ता और वकील को पुलिस सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग भी रखी। ओझा ने कहा कि उन्हें सीबीआई की जांच प्रक्रिया पर भरोसा है, लेकिन मामले में हो रही देरी को लेकर चिंता है। अब आगे की कार्रवाई जांच एजेंसी द्वारा दस्तावेजों और आरोपों की जांच के बाद स्पष्ट होगी।

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Chandan Das

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