Food Poisoning : खराब, दूषित या लंबे समय से रखा हुआ बासी खाना खाने से फूड पॉइजनिंग की समस्या हो सकती है। इसके कारण पेट में मरोड़, ऐंठन, दर्द, उल्टी, दस्त और कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। जब दूषित भोजन के जरिए हानिकारक बैक्टीरिया, वायरस या विषाक्त पदार्थ पाचन तंत्र में पहुंचते हैं, तो शरीर उन्हें बाहर निकालने की कोशिश करता है। इसी प्रक्रिया के दौरान पेट में दर्द और ऐंठन बढ़ सकती है। फोर्टिस, फरीदाबाद के सलाहकार गैस्ट्रोएंटरोलॉजी डॉ. निर्देश चौहान के अनुसार, ऐसे समय में शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी को रोकना बेहद जरूरी है।
हाइड्रेशन और इलेक्ट्रोलाइट्स का रखें ध्यान
फूड पॉइजनिंग के दौरान उल्टी और दस्त होने से शरीर में पानी के साथ सोडियम और अन्य इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी हो सकती है। डिहाइड्रेशन बढ़ने पर कमजोरी और पेट की ऐंठन भी अधिक परेशान कर सकती है। इसलिए इस दौरान पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ लेना जरूरी है। केवल सादा पानी पीने के बजाय WHO-अनुशंसित ORS घोल लेना अधिक उपयोगी हो सकता है। नारियल पानी भी तरल पदार्थों की पूर्ति में मदद कर सकता है।
एक साथ ज्यादा पानी पीने से बचें
अगर उल्टी की समस्या हो रही है तो एक बार में बहुत अधिक मात्रा में पानी या कोई अन्य तरल पदार्थ पीने से बचना चाहिए। इसके बजाय हर 10 से 15 मिनट में थोड़ी-थोड़ी मात्रा में घूंट लेकर तरल पदार्थ लें। इससे शरीर को पानी मिलने में मदद मिल सकती है और एक साथ अधिक मात्रा लेने से होने वाली उल्टी की संभावना कम हो सकती है।
फूड पॉइजनिंग में हल्का भोजन करें
पेट खराब होने के दौरान पाचन तंत्र को आराम देने के लिए हल्का और आसानी से पचने वाला भोजन लेना बेहतर रहता है। इस समय पतली मूंग दाल की खिचड़ी, उबले चावल, केला, दलिया और टोस्ट जैसे विकल्प लिए जा सकते हैं। भोजन की मात्रा कम रखें और शरीर की स्थिति के अनुसार धीरे-धीरे सामान्य डाइट की ओर लौटें। जब तक पेट की समस्या ठीक न हो, भारी भोजन से बचना उचित है।
किन चीजों से दूरी बनाएं?
फूड पॉइजनिंग के दौरान दूध और कुछ डेयरी उत्पादों से परेशानी बढ़ सकती है। इसके अलावा कैफीन वाले पेय, तला-भुना भोजन, बहुत अधिक मसालेदार चीजें और अत्यधिक मीठे जूस से भी बचने की सलाह दी जाती है। ये चीजें कुछ लोगों में पेट की परेशानी, गैस या ऐंठन को बढ़ा सकती हैं। इसलिए इस दौरान भोजन जितना हल्का और सरल रहेगा, पाचन तंत्र पर उतना ही कम दबाव पड़ेगा।
पेट की ऐंठन में हल्की सिकाई
पेट में होने वाली ऐंठन से अस्थायी राहत पाने के लिए हल्की गर्म सिकाई भी की जा सकती है। इसके लिए हॉट वाटर बैग या हीटिंग पैड को पेट पर करीब 15 से 20 मिनट तक रखा जा सकता है। गर्माहट से पेट की मांसपेशियों को आराम मिलने में मदद मिल सकती है और मरोड़ की तीव्रता कुछ कम महसूस हो सकती है। सिकाई करते समय बहुत अधिक गर्म तापमान से बचें, ताकि त्वचा को नुकसान न पहुंचे।
दवाएं लेने में न बरतें लापरवाही
फूड पॉइजनिंग के दौरान दस्त रोकने वाली दवाओं का इस्तेमाल बिना चिकित्सकीय सलाह के नहीं करना चाहिए। लोपेरामाइड जैसी दवाएं आंतों की गति को धीमा करती हैं। कुछ संक्रमणों में इससे शरीर से हानिकारक पदार्थों के बाहर निकलने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इसलिए खुद से दवा लेने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है। अगर पेट में तेज मरोड़ या लगातार दर्द बना हुआ है, तो चिकित्सक उचित उपचार और दवा की सलाह दे सकते हैं।
इन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें
फूड पॉइजनिंग के ज्यादातर मामलों में उचित आराम और पर्याप्त तरल पदार्थ लेने से धीरे-धीरे सुधार हो सकता है, लेकिन कुछ लक्षण गंभीर स्थिति का संकेत दे सकते हैं। यदि पेट में बहुत तेज या लगातार दर्द हो, 102 डिग्री फारेनहाइट से अधिक तेज बुखार बना रहे, मल में खून या म्यूकस दिखाई दे अथवा पेशाब बहुत कम हो जाए या बंद होने लगे, तो घरेलू उपचार पर निर्भर न रहें।
गंभीर स्थिति में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें
ऐसे लक्षण दिखाई देने पर जल्द से जल्द डॉक्टर या गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट से संपर्क करना चाहिए। खासकर लगातार उल्टी और दस्त के साथ डिहाइड्रेशन होने पर चिकित्सकीय जांच जरूरी हो सकती है। फूड पॉइजनिंग में सबसे महत्वपूर्ण बात शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी को रोकना है। गंभीर लक्षणों की स्थिति में समय पर चिकित्सा सहायता लेना जटिलताओं के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है।
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