Donald Trump on Iran War: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ चल रहे सैन्य अभियान में अपनी सेना के प्रदर्शन पर जबरदस्त संतुष्टि जाहिर की है। व्हाइट हाउस में टेक जगत की दिग्गज हस्तियों के साथ एक बैठक के दौरान ट्रंप ने सैन्य कार्रवाई की सफलता पर खुलकर बात की। उन्होंने बेहद आत्मविश्वास के साथ कहा कि अमेरिका और उसके सहयोगी देश इस संघर्ष में काफी बढ़त बना चुके हैं। जब उनसे सेना के प्रदर्शन को रेट करने के लिए कहा गया, तो उन्होंने कहा, “अगर आप मुझसे 10 में से रेटिंग पूछें, तो मैं इसे 15 दूंगा।” ट्रंप का यह बयान दर्शाता है कि वे मिडिल ईस्ट में जारी इस सैन्य ऑपरेशन के नतीजों से कितने उत्साहित हैं।
ईरानी नेतृत्व पर कड़ा प्रहार: “जो लीडर बनने की कोशिश करता है, वो मारा जाता है”
ट्रंप ने ईरान की वर्तमान नेतृत्व स्थिति पर तीखा हमला करते हुए कहा कि ईरानी सत्ता की कमान अब तेजी से बिखर रही है। राष्ट्रपति ने दावा किया कि उनकी सेना ने ईरान के कमांड स्ट्रक्चर को इस कदर चोट पहुँचाई है कि अब वहां नेतृत्व का संकट पैदा हो गया है। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा, “जो भी व्यक्ति वहां नेतृत्व संभालने की कोशिश करता है, उसे खत्म कर दिया जाता है।” युद्ध के पांचवें दिन ट्रंप का यह संदेश स्पष्ट था कि अमेरिका ने ईरान की निर्णय लेने वाली सर्वोच्च संस्थाओं और सैन्य कमांडरों को सीधे तौर पर निशाना बनाया है, जिससे उनका मनोबल पूरी तरह टूट चुका है।
मिसाइल ठिकानों और समुद्री शक्ति का विनाश: पेंटागन की बड़ी कार्रवाई
युद्ध के मोर्चे से एक बड़ी खबर यह आई कि अमेरिकी सबमरीन ने श्रीलंका के पास अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में ईरान के एक शक्तिशाली युद्धपोत को निशाना बनाकर डुबो दिया। पेंटागन के अधिकारियों ने पुष्टि की है कि इस पूरे सैन्य अभियान का प्राथमिक लक्ष्य ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता और उसके सैन्य बुनियादी ढांचे को नेस्तनाबूद करना है। ट्रंप ने इस सफलता पर मुहर लगाते हुए कहा कि ईरान की मिसाइलों का जखीरा अब तेजी से खत्म हो रहा है। उन्होंने यह भी दोहराया कि ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना वैश्विक सुरक्षा के लिए अनिवार्य था, क्योंकि “पागल लोगों” के हाथ में ऐसे विनाशकारी हथियारों का होना पूरी दुनिया के लिए खतरा है।
चुनावी वादे और वर्तमान स्थिति: क्या यह ‘नो न्यू वॉर’ नीति का उल्लंघन है?
ट्रंप का यह आक्रामक रुख उनके चुनावी वादों पर भी सवाल खड़े कर रहा है। चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने बार-बार कहा था कि वे अमेरिका को किसी नए युद्ध में नहीं झोंकेंगे। हालांकि, वर्तमान स्थिति में वे इजरायल के साथ मिलकर एक बड़े सैन्य अभियान का नेतृत्व कर रहे हैं। व्हाइट हाउस ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि उनका अंतिम लक्ष्य ईरान में ‘रिजीम चेंज’ (सत्ता परिवर्तन) करना है या सिर्फ सैन्य ठिकानों को तबाह करना। ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि उनका अभियान रुकने वाला नहीं है और अमेरिकी सेना अपनी बढ़त को बरकरार रखते हुए आगे बढ़ती रहेगी।
भविष्य की रणनीति: युद्ध के बाद ईरान में अमेरिका की भूमिका
प्रेस सेक्रेटरी कैरोलाइन लेविट ने मीडिया को जानकारी दी कि राष्ट्रपति ट्रंप अब केवल युद्ध जीतने तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि वे इस बात पर भी गंभीरता से विचार कर रहे हैं कि संघर्ष समाप्त होने के बाद ईरान में अमेरिका की भूमिका क्या होगी। व्हाइट हाउस अब युद्ध के बाद की व्यवस्था (Post-War Era) की योजना बनाने में जुट गया है। ट्रंप का संदेश एकदम साफ है: अमेरिका इस जंग में न केवल सैन्य रूप से मजबूत है, बल्कि वह क्षेत्र की राजनीति को बदलने के लिए भी तैयार है। पूरी दुनिया की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि मिडिल ईस्ट का यह संघर्ष क्या मोड़ लेता है।
















