Cultural Heritage Victory: ब्रिटेन की प्रतिष्ठित ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के ऐश्मोलियन म्यूजियम ने एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए 16वीं शताब्दी की एक बेशकीमती कांस्य मूर्ति भारत को वापस कर दी है। यह मूर्ति तमिलनाडु के डिंडीगुल जिले के थाडिकोम्बु स्थित श्री सौंदरराजा पेरुमल मंदिर की धरोहर है। लगभग 500 साल पुरानी यह प्रतिमा वैष्णव संत ‘थिरुमंगई आळवार’ का प्रतिनिधित्व करती है। इस मूर्ति को 1967 में म्यूजियम ने सोथबीज (Sotheby’s) नीलामी घर से खरीदा था, लेकिन अब यह स्पष्ट हो गया है कि इसका मूल स्थान भारत का प्राचीन मंदिर ही है।
रिसर्च और जांच से खुला चोरी का राज: 5 साल की लंबी प्रक्रिया
इस बेशकीमती धरोहर की वापसी की कहानी साल 2019 में शुरू हुई, जब एक स्वतंत्र शोधकर्ता (रिसर्चर) ने साक्ष्यों के साथ यह दावा किया कि म्यूजियम में रखी यह मूर्ति थाडिकोम्बु मंदिर से संबंधित है। इस खुलासे के बाद ऐश्मोलियन म्यूजियम ने स्वयं भारतीय उच्चायोग से संपर्क साधा। भारत सरकार, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) और तमिलनाडु सरकार ने संयुक्त रूप से मंदिर की पुरानी तस्वीरों और अभिलेखों का बारीकी से अध्ययन किया। जांच में पाया गया कि मूर्ति को मंदिर से अवैध रूप से निकाला गया था, जिसके बाद इसकी वापसी का मार्ग प्रशस्त हुआ।
लंदन के इंडिया हाउस में औपचारिक समारोह: चार अन्य कलाकृतियां भी वापस
मंगलवार, 4 मार्च 2026 को लंदन स्थित इंडिया हाउस में एक भव्य और औपचारिक समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर म्यूजियम के निदेशक डॉ. ज़ा स्टर्गिस ने आधिकारिक रूप से भारतीय प्रतिनिधियों को मूर्ति सौंपी। डॉ. स्टर्गिस ने स्वीकार किया कि हालांकि म्यूजियम ने इसे दशकों पहले अच्छी नीयत से खरीदा था, लेकिन चोरी की पुष्टि होने के बाद इसे लौटाना ही नैतिक रूप से सही है। विशेष बात यह रही कि इसी समारोह में चार अन्य भारतीय प्राचीन वस्तुएं भी भारत को लौटाई गईं, जो ब्रिटिश शासन के दौरान या उसके बाद विदेशों में पहुंच गई थीं।
म्यूजियम के इतिहास में पहली बार: अटूट दावों के बीच एक बड़ा बदलाव
ऐश्मोलियन म्यूजियम अपनी वैश्विक कलाकृतियों के संग्रह के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है। दिलचस्प तथ्य यह है कि अतीत में दुनिया के कई देशों ने अपनी कलाकृतियों पर दावा किया था, लेकिन आज तक इस म्यूजियम ने किसी भी वस्तु को वापस नहीं किया था। यह पहली बार है जब इस संस्थान ने किसी प्राचीन वस्तु को उसके मूल देश को सौंपा है। हाउस ऑफ लॉर्ड्स की सदस्य बैरोनेस थंगम डेबोननेयर ने इस मौके पर कहा कि यह केवल पीतल या धातु का टुकड़ा नहीं है, बल्कि एक जीवित मंदिर की ‘पवित्र आत्मा’ और लोगों की आस्था का केंद्र है।
अगला कदम: एएसआई की जांच और मंदिर में पुनर्स्थापना
ब्रिटेन से भारत आने के बाद इस मूर्ति को सीधे तमिलनाडु नहीं ले जाया जाएगा। सबसे पहले ASI (भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण) के विशेषज्ञ इसकी भौतिक और रासायनिक जांच करेंगे ताकि यात्रा के दौरान हुई किसी भी क्षति या सुरक्षा मानकों की पुष्टि की जा सके। सभी कानूनी और तकनीकी औपचारिकताओं के पूरा होने के बाद, इसे एक भव्य अनुष्ठान के साथ थाडिकोम्बु के श्री सौंदरराजा पेरुमल मंदिर में पुनः स्थापित किया जाएगा। यह वापसी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चोरी हुई भारतीय विरासतों को वापस लाने के सरकार के प्रयासों की एक बड़ी सफलता मानी जा रही है।
















