Taranjit Singh Sandhu: देश की राजधानी दिल्ली के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में गुरुवार को उस वक्त बड़ी हलचल मच गई, जब राष्ट्रपति भवन ने नए उपराज्यपाल (LG) के नाम की घोषणा की। अनुभवी पूर्व राजनयिक तरनजीत सिंह संधू को दिल्ली का नया उपराज्यपाल नियुक्त किया गया है। वह विनय कुमार सक्सेना का स्थान लेंगे, जिनका कार्यकाल दिल्ली सरकार के साथ कई प्रशासनिक टकरावों और महत्वपूर्ण नीतिगत फैसलों का गवाह रहा। संधू की यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब दिल्ली के शासन मॉडल और केंद्र बनाम राज्य के अधिकारों को लेकर बहस जारी है। उम्मीद जताई जा रही है कि उनका विशाल प्रशासनिक अनुभव दिल्ली की जटिल व्यवस्था को सुचारू बनाने में सहायक सिद्ध होगा।
वॉशिंगटन से दिल्ली तक: एक शानदार कूटनीतिक सफर
तरनजीत सिंह संधू भारतीय विदेश सेवा (IFS) के 1988 बैच के एक बेहद सम्मानित अधिकारी रहे हैं। उनके करियर का सबसे चमकता हिस्सा अमेरिका में उनका कार्यकाल रहा है। उन्होंने वॉशिंगटन डीसी में भारत के राजदूत के रूप में दो बार अपनी सेवाएं दीं। इस दौरान उन्होंने भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक साझेदारी, रक्षा सौदों और व्यापारिक संबंधों को नई ऊंचाइयों पर पहुँचाने में अग्रणी भूमिका निभाई। उनकी कूटनीतिक सूझबूझ का लोहा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर माना जाता है। अब उसी वैश्विक अनुभव और प्रशासनिक बारीकियों का लाभ दिल्ली के राजभवन को मिलने वाला है।
पड़ोसी देशों के साथ संबंधों में संधू का कौशल
अमेरिका के अलावा, तरनजीत सिंह संधू ने श्रीलंका में भारत के उच्चायुक्त के रूप में भी अपनी गहरी छाप छोड़ी है। जनवरी 2017 से 2020 तक उन्होंने कोलंबो में भारत का प्रतिनिधित्व किया। दिलचस्प बात यह है कि वह पहले भी वहां राजनीतिक विंग के प्रमुख रह चुके थे। श्रीलंका के आर्थिक संकट और रणनीतिक बदलावों के दौर में उन्होंने भारत के हितों की रक्षा करते हुए दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को मजबूती दी। उनके पास पेरिस, कीव और न्यूयॉर्क (संयुक्त राष्ट्र) जैसे महत्वपूर्ण मिशनों में काम करने का भी अनुभव है, जो उन्हें एक बहुआयामी प्रशासक बनाता है।
अमृतसर से चुनावी रण और सक्रिय राजनीति में प्रवेश
राजनयिक सेवा से सेवानिवृत्त होने के बाद संधू ने सार्वजनिक जीवन में एक नई पारी की शुरुआत की। साल 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने अपनी जन्मभूमि पंजाब की अमृतसर सीट से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के टिकट पर चुनाव लड़ा। हालांकि, इस चुनावी मुकाबले में उन्हें सफलता नहीं मिली, लेकिन उनके प्रचार अभियान और जमीनी मुद्दों की समझ ने उन्हें सक्रिय राजनीति के केंद्र में ला खड़ा किया। उनकी साफ-सुथरी छवि और प्रशासनिक पकड़ को देखते हुए केंद्र सरकार ने उन्हें अब दिल्ली जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है।
दिल्ली के उपराज्यपाल के रूप में चुनौतियां और संभावनाएं
दिल्ली के एलजी का पद कांटों भरा ताज माना जाता है, जहाँ अक्सर केंद्र और निर्वाचित सरकार के बीच खींचतान बनी रहती है। तरनजीत सिंह संधू के सामने सबसे बड़ी चुनौती दिल्ली सरकार के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करना और राजधानी के रुके हुए विकास कार्यों को गति देना होगी। एक पूर्व राजदूत होने के नाते, संधू से उम्मीद की जा रही है कि वह विवादों के बजाय संवाद का रास्ता अपनाएंगे। दिल्ली की कानून-व्यवस्था, प्रदूषण नियंत्रण और बुनियादी ढांचे के विकास में उनकी भूमिका अत्यंत निर्णायक होने वाली है।
















