Israel Iran War: ईरान और इजराइल के बीच जारी भीषण सैन्य संघर्ष की तपिश अब दुनिया के सबसे संवेदनशील धार्मिक स्थलों तक पहुँच गई है। इजराइली प्रशासन ने सुरक्षा कारणों और संभावित हवाई हमलों का हवाला देते हुए पुराने येरुशलम स्थित ऐतिहासिक अल-अक्सा मस्जिद को पूरी तरह बंद कर दिया है। जुमे की नमाज के अवसर पर लगाई गई इस अचानक पाबंदी ने न केवल स्थानीय लोगों, बल्कि दुनिया भर के मुस्लिम समुदाय को गहरे दुख में डाल दिया है, विशेषकर तब जब रमजान का पवित्र महीना चल रहा है। युद्ध की विभीषिका के बीच इबादतगाहों पर ताले लगना इस बात का संकेत है कि क्षेत्र में हालात नियंत्रण से बाहर होते जा रहे हैं।

मिसाइल हमलों का खतरा: सुरक्षा के नाम पर कड़ा पहरा
इजराइल के ‘सिविल एडमिनिस्ट्रेशन’ ने स्पष्ट किया है कि यह कठोर निर्णय ईरान की ओर से होने वाले लगातार मिसाइल हमलों और खुफिया इनपुट के आधार पर लिया गया है। प्रशासन का तर्क है कि युद्ध के इस माहौल में किसी भी स्थान पर भारी भीड़ का जमा होना एक बड़े आत्मघाती खतरे को निमंत्रण देना है। नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोपरि बताते हुए पुराने शहर के सभी प्रमुख प्रवेश द्वारों पर सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है। यह केवल एक धार्मिक पाबंदी नहीं, बल्कि एक आपातकालीन सुरक्षा प्रोटोकॉल का हिस्सा बताया जा रहा है ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।
पुराने शहर में सन्नाटा: चर्च और वेस्टर्न वॉल भी श्रद्धालुओं के लिए बंद
इजराइली अधिकारियों ने यह साफ कर दिया है कि पाबंदियों का दायरा केवल अल-अक्सा मस्जिद तक सीमित नहीं है। एहतियात के तौर पर पुराने येरुशलम की ‘पश्चिमी दीवार’ (वेस्टर्न वॉल) और शहर के कई प्रमुख ऐतिहासिक चर्चों में भी आम जनता और पर्यटकों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है। प्रशासन के अगले आदेश तक किसी भी श्रद्धालु को इन पवित्र स्थलों के भीतर जाने की अनुमति नहीं मिलेगी। इस निर्णय ने येरुशलम की उन गलियों में सन्नाटा पसरा दिया है, जो कभी प्रार्थनाओं और तीर्थयात्रियों की चहल-पहल से गूंजती थीं।
धार्मिक स्वतंत्रता का सवाल: इमाम इकरिमा सबरी का तीखा विरोध
मस्जिद के वरिष्ठ इमाम इकरिमा सबरी ने इस सरकारी फैसले की कड़ी निंदा की है। उन्होंने प्रशासन के दावों को खारिज करते हुए इसे धार्मिक स्वतंत्रता का सीधा हनन करार दिया। इमाम सबरी का कहना है कि सुरक्षा के नाम पर अक्सर इबादत में बाधा डालना एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा लगता है। रमजान के महीने में जहाँ लाखों लोग रूहानी सुकून के लिए यहाँ आते थे, वहाँ अब केवल सन्नाटा और बंदूकधारी पहरेदार नज़र आ रहे हैं, जो श्रद्धालुओं की भावनाओं को आहत करने वाला है।
मानवीय त्रासदी: बढ़ती मौतों और तबाह होते शांतिपूर्ण माहौल का सच
इस महायुद्ध ने अब तक मानवता को अपूरणीय क्षति पहुँचाई है। आँकड़ों के अनुसार, इजराइल में अब तक करीब 9 लोगों की जान गई है, जबकि ईरान में इजराइल और अमेरिकी हमलों के कारण मरने वालों की संख्या 1200 के पार पहुँच गई है। मिसाइलों की गूंज और लगातार गिरते बमों ने क्षेत्र के शांतिपूर्ण सामाजिक ढांचे को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है। यह संघर्ष अब केवल दो देशों की सीमाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि एक बड़ी मानवीय त्रासदी में बदल चुका है, जहाँ आम नागरिक अपनी जान और अपनी आस्था, दोनों खो रहे हैं।
विशाल क्षमता और कड़े नियंत्रण का इतिहास
अल-अक्सा मस्जिद परिसर की महत्ता का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहाँ एक साथ 5 लाख लोग नमाज अदा कर सकते हैं। हालाँकि, 1967 के युद्ध के बाद से इस क्षेत्र का नियंत्रण इजराइल के पास होने के कारण यहाँ अक्सर तनाव बना रहता है। पिछले कुछ समय से सुरक्षा के नाम पर यहाँ आने वालों की संख्या को घटाकर केवल 10 हजार तक सीमित कर दिया गया था, लेकिन अब युद्ध के चलते इसे शून्य कर दिया गया है।


















