Spain News: स्पेन के कैटेलोनिया क्षेत्र से पर्यावरण संरक्षण को लेकर अच्छी खबर सामने आई है। यहां ऑल्ट पिरिनेउ नेचुरल पार्क की दो पहाड़ी झीलों में फैल चुकी यूरेशियन मिनो मछली को खत्म करने के अभियान के शुरुआती नतीजे सफल रहे हैं। शोधकर्ताओं के मुताबिक, इस पहल के बाद झीलों में पानी की स्पष्टता और जैव विविधता में सुधार के संकेत मिले हैं। यह परियोजना स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को दोबारा संतुलित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
क्या होती हैं बाहरी आक्रामक प्रजातियां?
बाहरी आक्रामक प्रजातियां वे जीव, पौधे या फंगस होते हैं, जो अपने प्राकृतिक क्षेत्र से बाहर किसी नए वातावरण में पहुंचकर तेजी से फैलने लगते हैं। इनकी मौजूदगी स्थानीय प्रजातियों के भोजन, आवास और प्रजनन पर असर डाल सकती है। स्पेन में एशियन हॉर्नेट और रेड स्वैम्प क्रेफिश जैसी प्रजातियां भी पर्यावरण के लिए चुनौती रही हैं। यूरेशियन मिनो मछली का मामला भी इसी समस्या का उदाहरण बन गया था।
दो झीलों में कैसे पहुंचीं यूरेशियन मिनो मछलियां?
ऑल्ट पिरिनेउ नेचुरल पार्क की ट्रेस एस्टानिस डेल मिग और ट्रेस एस्टानिस डी बैक्स झीलों में यूरेशियन मिनो मछलियों की मौजूदगी प्राकृतिक नहीं थी। शोधकर्ताओं के अनुसार, पाइरेनीज क्षेत्र की कई झीलों में यह प्रजाति मछली पकड़ने के शौकीनों द्वारा जिंदा चारे के रूप में छोड़े जाने के कारण पहुंची। तेजी से प्रजनन करने और अलग-अलग परिस्थितियों में जीवित रहने की क्षमता ने इनके प्रसार को और बढ़ा दिया।
उभयचरों और छोटे जलीय जीवों पर मंडराया खतरा
इन मछलियों की बढ़ती आबादी से झीलों के प्राकृतिक खाद्य जाल में असंतुलन पैदा हुआ। यूरेशियन मिनो उभयचरों के अंडों और छोटे जलीय जीवों को खा सकती है, जिससे स्थानीय जैव विविधता प्रभावित होती है। विशेषज्ञों के अनुसार, इन झीलों में इस प्रजाति की मौजूदगी ने मूल जीवों के संरक्षण को चुनौतीपूर्ण बना दिया था। इसलिए आक्रामक मछलियों को हटाने के लिए विशेष अभियान चलाने की जरूरत महसूस हुई।
सितंबर 2025 में शुरू हुआ विशेष अभियान
ब्लैन्स सेंटर फॉर एडवांस्ड स्टडीज (CEAB-CSIC) ने यूरोपीय LIFE RESQUE ALPYR परियोजना के तहत सितंबर 2025 में एक पायलट अभियान शुरू किया। इसमें रोटेनोन नामक मछलीनाशक पदार्थ का इस्तेमाल किया गया। इसका उद्देश्य दोनों झीलों से यूरेशियन मिनो को खत्म करना और साथ ही उपचार की प्रभावशीलता तथा पर्यावरणीय सुरक्षा का आकलन करना था। इससे पहले कैटेलोनिया की मानहेरा झील में भी इसी तरह का परीक्षण किया गया था।
दस महीने बाद दिखे सकारात्मक परिणाम
परियोजना से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, करीब दस महीने बाद सामने आए परिणाम उत्साहजनक रहे। शोधकर्ताओं ने पानी की स्पष्टता में सुधार और उभयचरों तथा अकशेरुकी जीवों की वापसी के संकेत दर्ज किए। कुछ ऐसे जीव भी दोबारा दिखाई दिए, जिन्हें 2014 में निगरानी शुरू होने के बाद से नहीं देखा गया था। ऑल्ट पिरिनेउ नेचुरल पार्क के निदेशक मार्क गैरिगा ने इन शुरुआती नतीजों को ऊंचे पहाड़ों की झीलों के संरक्षण के लिए अच्छी खबर बताया।
झीलों से मछलियां हटाना क्यों था चुनौतीपूर्ण?
ट्रेस एस्टानिस की झीलों का आकार और आपस में जुड़ी जल प्रणाली अभियान को कठिन बनाती थी। इससे पहले ट्रेस एस्टानिस डेल मिग में जाल, फंदों और इलेक्ट्रोफिशिंग के माध्यम से मछलियों की संख्या घटाने की कोशिश की गई थी। इन तरीकों से आबादी को नियंत्रित करने में मदद मिली, लेकिन प्रजाति का पूरी तरह सफाया नहीं हो सका। रोटेनोन आधारित परीक्षण इसी चुनौती से निपटने के लिए किया गया।
रोटेनोन के इस्तेमाल से पर्यावरण को कितना नुकसान हुआ?
परियोजना के सुरक्षा आकलन में भी सकारात्मक संकेत मिले। IDAEA-CSIC के शोधकर्ता बैरेंड एल. वैन ड्रोगे के अनुसार, रोटेनोन का अपघटन अपेक्षित दर से हुआ और इसकी अर्धायु लगभग 10 से 20 दिन रही। शोधकर्ताओं को उपचारित झीलों से नीचे बहने वाली नदी में इस पदार्थ के अवशेष नहीं मिले। हालांकि, इन निष्कर्षों का अर्थ यह नहीं है कि रोटेनोन हर परिस्थिति में पूरी तरह जोखिम-मुक्त है; इसके प्रभावों का आकलन स्थानीय पर्यावरण के अनुसार करना जरूरी है।
जैव विविधता की पूरी बहाली में लगेगा समय
दोनों पायलट परियोजनाओं में यूरेशियन मिनो मछली को खत्म करने में सफलता मिलने के बावजूद, विशेषज्ञों का मानना है कि पारिस्थितिकी तंत्र की संपूर्ण बहाली एक लंबी प्रक्रिया है। आने वाले वर्षों में झीलों के पानी, जलीय जीवों और स्थानीय प्रजातियों की लगातार निगरानी की जाएगी। इस परियोजना से मिली जानकारी भविष्य में पाइरेनीज की दूसरी झीलों को आक्रामक प्रजातियों से बचाने में उपयोगी साबित हो सकती है।
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