Induction Cooktop: भारत में एलपीजी गैस की सप्लाई को लेकर बढ़ती चिंताओं ने आम नागरिक के रसोई के बजट और योजना को बदल दिया है। घरेलू गैस की उपलब्धता को लेकर मचे पैनिक के बीच अब लोग पारंपरिक गैस चूल्हों के बजाय इलेक्ट्रिक विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं। इस बदलाव का सबसे बड़ा असर इंडक्शन कुकटॉप की बिक्री पर पड़ा है। देश के प्रमुख महानगरों में इंडक्शन चूल्हों की मांग में रातों-रात जबरदस्त उछाल आया है। आलम यह है कि कई बड़े रिटेल स्टोर और ऑनलाइन मार्केटप्लेस पर अब इनका स्टॉक खत्म होने की कगार पर है। उपभोक्ता भविष्य की अनिश्चितता को देखते हुए एहतियातन इंडक्शन चूल्हे खरीद रहे हैं ताकि गैस न होने की स्थिति में घर का चूल्हा ठंडा न पड़े।

क्विक-कॉमर्स और रिटेल बाजारों से स्टॉक हुआ गायब
इंडक्शन चूल्हों की मांग इतनी अधिक है कि इंस्टेंट डिलीवरी देने वाले क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म जैसे Blinkit और Swiggy Instamart पर कई पिन कोड्स में ये उत्पाद ‘आउट ऑफ स्टॉक’ दिखने लगे हैं। दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और कोलकाता जैसे शहरों में स्थिति ज्यादा गंभीर है, जहाँ लोग दुकानों पर कतारों में खड़े होकर इंडक्शन खरीद रहे हैं। स्थानीय रिटेल दुकानदारों के अनुसार, जहाँ सामान्य दिनों में बमुश्किल 2-4 चूल्हे बिकते थे, वहीं अब एक दिन में 50 से 70 यूनिट तक की बिक्री हो रही है। केवल इंडक्शन ही नहीं, बल्कि इंडक्शन पर काम करने वाले विशेष बर्तन जैसे स्टील की कड़ाही, पैन और कुकर की मांग में भी भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
महानगरों में पैनिक बाइंग और सप्लाई चेन पर दबाव
बड़े शहरों में रहने वाले मध्यम वर्ग के परिवारों में यह डर ज्यादा देखा जा रहा है कि अगर अंतरराष्ट्रीय कारणों से गैस की सप्लाई रुकी, तो बाहर से खाना मंगवाना महंगा पड़ेगा। इसलिए, लोग बैकअप के तौर पर इलेक्ट्रिक कुकिंग उपकरणों को प्राथमिकता दे रहे हैं। ई-कॉमर्स दिग्गजों ने भी स्वीकार किया है कि पिछले कुछ दिनों में किचन अप्लायंसेज की श्रेणी में इंडक्शन कुकटॉप सबसे ज्यादा सर्च और खरीदा जाने वाला उत्पाद बन गया है। इस अचानक आई मांग ने कंपनियों की सप्लाई चेन पर भारी दबाव डाल दिया है, जिससे इन्वेंट्री मैनेजमेंट में दिक्कतें आ रही हैं।
मिडिल ईस्ट तनाव और वैश्विक ऊर्जा संकट का असर
रसोई गैस को लेकर मचे इस हंगामे के पीछे मुख्य कारण पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव है। भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का लगभग 60% से अधिक हिस्सा आयात करता है, जिसका एक बड़ा भाग खाड़ी देशों से आता है। समुद्री रास्तों में असुरक्षा और वैश्विक तेल-गैस सप्लाई पर पड़ रहे असर ने भारतीय उपभोक्ताओं के मन में डर पैदा कर दिया है। हालांकि, भारत सरकार और पेट्रोलियम मंत्रालय लगातार यह आश्वासन दे रहे हैं कि देश के पास पर्याप्त भंडार है और पैनिक बाइंग की जरूरत नहीं है, फिर भी लोग किसी भी जोखिम से बचने के लिए बिजली से चलने वाले विकल्पों को सुरक्षित मान रहे हैं।
भविष्य की रसोई: इलेक्ट्रिक उपकरणों की ओर बढ़ता रुझान
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल एक तात्कालिक प्रतिक्रिया नहीं है, बल्कि भविष्य की रसोई के स्वरूप में बदलाव का संकेत भी हो सकता है। यदि गैस सप्लाई को लेकर वैश्विक अनिश्चितता बनी रहती है, तो आने वाले समय में इंडक्शन के साथ-साथ एयर फ्रायर, इलेक्ट्रिक केतली और माइक्रोवेव जैसे उपकरणों की मांग में भी स्थायी बढ़त देखी जा सकती है। फिलहाल, बर्तन और इलेक्ट्रॉनिक कंपनियों ने अपना उत्पादन बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है ताकि बाजार में बढ़ी हुई मांग और आपूर्ति के बीच के अंतर को कम किया जा सके।

















