Shardiya Navratri 2026 : शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व 11 अक्टूबर 2026, रविवार से शुरू हो रहा है। पूरे देश में यह त्योहार श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। भक्त माता रानी की प्रतिमा स्थापित करते हैं, सुंदर श्रृंगार करते हैं और विधि-विधान से पूजा करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि में पूजा-पाठ के साथ संयम, अनुशासन और सात्विक जीवनशैली का विशेष महत्व होता है। इसी कारण इन दिनों कुछ कार्यों से परहेज करने की परंपरा प्रचलित है।
नवरात्रि में बाल और नाखून काटने से क्यों बचते हैं?
नवरात्रि के दौरान बाल कटवाने, नाखून काटने और दाढ़ी बनवाने से बचने की धार्मिक मान्यता है। खासतौर पर व्रत रखने वाले और घर में कलश स्थापना करने वाले श्रद्धालु इन परंपराओं का पालन करते हैं। मान्यता है कि इन नौ दिनों में शरीर और मन की पवित्रता बनाए रखने पर विशेष ध्यान देना चाहिए। इसी वजह से कई परिवार नवरात्रि शुरू होने से पहले ही बाल और नाखून कटवा लेते हैं। हालांकि, इन कार्यों से नकारात्मक ऊर्जा बढ़ने या पूजा का फल प्रभावित होने का कोई स्थापित वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। यह परंपरा मुख्य रूप से धार्मिक आस्था से जुड़ी है।
मांस-मदिरा और तामसिक भोजन से बनाएं दूरी
नवरात्रि में सात्विक भोजन करने की परंपरा का विशेष महत्व माना जाता है। इस दौरान कई श्रद्धालु मांस, मछली, अंडे और मदिरा का सेवन नहीं करते। इसके अलावा, प्याज और लहसुन से भी परहेज किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं में इन खाद्य पदार्थों को तामसिक श्रेणी में रखा जाता है। माना जाता है कि सात्विक भोजन से मन शांत रखने और पूजा-पाठ में एकाग्रता बनाए रखने में मदद मिलती है। हालांकि, भोजन से जुड़े नियम अलग-अलग परिवारों, क्षेत्रों और धार्मिक परंपराओं के अनुसार भिन्न हो सकते हैं।
व्रत रखने वाले इन नियमों का रखें ध्यान
नवरात्रि में उपवास रखने वाले श्रद्धालुओं को अपनी धार्मिक परंपराओं के अनुसार खानपान और दिनचर्या का पालन करना चाहिए। व्रत के दौरान फलाहार, पर्याप्त पानी और पौष्टिक भोजन का ध्यान रखना जरूरी है। अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार ही उपवास करें। यदि किसी को स्वास्थ्य संबंधी समस्या है, तो लंबे समय तक भूखे रहने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना उचित है। इसी तरह, घर में अखंड ज्योति स्थापित करने वाले लोगों को दीपक की नियमित निगरानी करनी चाहिए और उसे पर्दों, कागज तथा अन्य ज्वलनशील वस्तुओं से दूर सुरक्षित स्थान पर रखना चाहिए।
नवरात्रि में क्रोध और कटु वाणी से बचें
नवरात्रि का पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्मसंयम और अच्छे आचरण का संदेश भी देता है। इन दिनों किसी का अपमान करने, कटु शब्द बोलने और अनावश्यक विवाद करने से बचने की सलाह दी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मन में सकारात्मक विचार बनाए रखना और दूसरों के प्रति सम्मान दिखाना शुभ माना जाता है। परिवार के सदस्यों के साथ प्रेमपूर्वक व्यवहार करना और घर में शांतिपूर्ण वातावरण बनाए रखना भी नवरात्रि की भावना से जुड़ा है।
घर की सुख-समृद्धि के लिए अपनाएं सात्विक दिनचर्या
नवरात्रि के नौ दिनों में श्रद्धालु मां दुर्गा की पूजा, मंत्र जाप, दुर्गा चालीसा का पाठ और आरती कर सकते हैं। पूजा स्थल की साफ-सफाई रखें और अपनी परंपरा के अनुसार धार्मिक नियमों का पालन करें। जरूरतमंदों की सहायता करना, दूसरों के प्रति दयाभाव रखना और परिवार में सहयोग बनाए रखना भी अच्छे आचरण का हिस्सा है। धार्मिक मान्यताओं में इन कार्यों को सकारात्मक जीवनशैली से जोड़ा जाता है। ध्यान रखें कि बाल और नाखून काटने या विशेष खाद्य पदार्थों से परहेज जैसी बातें आस्था और परंपरा पर आधारित हैं। इनका पालन अपनी श्रद्धा और पारिवारिक रीति के अनुसार किया जा सकता है।
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