Abhay Singh BJP Joining : उत्तर प्रदेश की राजनीति में समाजवादी पार्टी (सपा) को एक और झटका लगने की संभावना है। गोसाईगंज, अयोध्या से विधायक अभय सिंह 14 अक्टूबर को अमेठी के गौरीगंज में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सदस्यता ग्रहण करेंगे। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, इस कार्यक्रम में भाजपा की वरिष्ठ नेता स्मृति ईरानी और प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की मौजूदगी रहने की बात कही गई है। अभय सिंह के भाजपा में शामिल होने की खबर ऐसे समय सामने आई है, जब उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो रही हैं।
सपा से निष्कासन के बाद बढ़ी भाजपा से नजदीकी
अभय सिंह और गौरीगंज से विधायक राकेश प्रताप सिंह को कुछ महीने पहले समाजवादी पार्टी ने निष्कासित कर दिया था। दोनों नेताओं के पार्टी से अलग होने के पीछे 2025 के राज्यसभा चुनाव के दौरान उनके मतदान को अहम वजह माना गया। बताया गया कि दोनों विधायकों ने भाजपा समर्थित उम्मीदवारों के पक्ष में वोट दिया था। इस घटनाक्रम के बाद सपा और इन नेताओं के बीच राजनीतिक दूरी बढ़ती गई। अब अभय सिंह के भाजपा में शामिल होने की तैयारी को उत्तर प्रदेश की सियासत में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के तौर पर देखा जा रहा है।
विनोद चतुर्वेदी के भाजपा में जाने की भी चर्चा
अभय सिंह के संभावित दलबदल के बीच कालपी से सपा विधायक विनोद चतुर्वेदी के भी भाजपा में शामिल होने की अटकलें लगाई जा रही हैं। हालांकि, उनके भाजपा में जाने को लेकर आधिकारिक पुष्टि जरूरी है। अभय सिंह ने भाजपा में शामिल होने की इच्छा पहले से होने की बात कही है। उन्होंने कहा कि वह जनता के लिए काम करते रहेंगे। उनके इस बयान से संकेत मिलता है कि वह अपनी राजनीतिक भूमिका को आगे भी सक्रिय बनाए रखना चाहते हैं।
2027 के विधानसभा चुनाव पर नजर
अभय सिंह और राकेश प्रताप सिंह के भाजपा में शामिल होने की स्थिति में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले उनकी राजनीतिक रणनीति पर चर्चा तेज हो सकती है। दोनों नेताओं के अपने-अपने विधानसभा क्षेत्रों से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ने का दावा पेश करने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, आगामी चुनाव में उम्मीदवारों के चयन को लेकर भाजपा की ओर से कोई अंतिम निर्णय घोषित होने तक इसे संभावित राजनीतिक समीकरण के रूप में ही देखा जाना चाहिए। दलबदल से स्थानीय स्तर पर सपा और भाजपा के समीकरण प्रभावित हो सकते हैं।
मनोज पांडेय समेत कई विधायक सपा से हुए अलग
अभय सिंह और राकेश प्रताप सिंह के अलावा ऊंचाहार से विधायक मनोज पांडेय को भी भाजपा का साथ देने के कारण समाजवादी पार्टी से निष्कासित किया गया था। बाद में इन तीनों विधायकों को उत्तर प्रदेश विधानसभा में असंबद्ध सदस्य की श्रेणी में रखा गया। इस घटनाक्रम ने सपा के भीतर अनुशासन और पार्टी के राजनीतिक भविष्य को लेकर बहस को जन्म दिया। वहीं भाजपा के लिए विपक्षी दलों से अलग हुए नेताओं का समर्थन राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो सकता है।
राज्यसभा चुनाव के बाद बदले राजनीतिक समीकरण
2025 के राज्यसभा चुनाव में अभय सिंह और राकेश प्रताप सिंह के अलावा विनोद चतुर्वेदी, महाराजी देवी, पूजा पाल और आशुतोष मौर्य समेत कई सपा विधायकों के भाजपा उम्मीदवार के पक्ष में मतदान करने की बात सामने आई थी। इसके बाद इन नेताओं और सपा नेतृत्व के बीच मतभेद बढ़ने की खबरें आईं। अब अभय सिंह के भाजपा में शामिल होने की तैयारी से उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर दल-बदल और 2027 के चुनावी समीकरण चर्चा के केंद्र में हैं।
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