गुजरात के तीन निकायों में भाजपा की 90 सीटों पर जीत के बाद अमित शाह ने राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने SIR और कांग्रेस की चुनावी हार पर सवाल उठाए। लेकिन गांधीनगर में भाजपा की सीटें पिछली बार से कम हुईं। इस नतीजे के राजनीतिक मायने क्या हैं?
गुजरात के तीन निकायों में भाजपा की 90 सीटों पर जीत के बाद अमित शाह ने राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने SIR और कांग्रेस की चुनावी हार पर सवाल उठाए। लेकिन गांधीनगर में भाजपा की सीटें पिछली बार से कम हुईं। इस नतीजे के राजनीतिक मायने क्या हैं?

Gujarat Civic Election Results : गुजरात के तीन शहरी स्थानीय निकायों के चुनाव परिणामों के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रदर्शन को लेकर प्रतिक्रिया दी। शाह के अनुसार, भाजपा ने कुल 104 सीटों में से 90 सीटों पर जीत हासिल की। उन्होंने इस नतीजे को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व के प्रति गुजरात के मतदाताओं के समर्थन के रूप में पेश किया। तीनों निकायों में भाजपा ने अपना नियंत्रण बरकरार रखा। चुनाव परिणामों के मुताबिक, गांधीनगर नगर निगम में भाजपा को 38, कांग्रेस को पांच और एक सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार को जीत मिली।

अमित शाह ने अपने संसदीय क्षेत्र गांधीनगर नगर निगम के प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए कहा कि भाजपा ने 44 में से 38 सीटें जीती हैं। उन्होंने दावा किया कि पिछले चुनाव की तुलना में पार्टी का वोट शेयर भी बढ़ा है। हालांकि, सीटों के आंकड़ों के अनुसार, 2021 में भाजपा ने यहां 41 सीटें जीती थीं, जबकि इस बार उसकी सीटें घटकर 38 रह गईं। कांग्रेस ने अपनी सीटें दो से बढ़ाकर पांच कर लीं। आम आदमी पार्टी (AAP), जिसे पिछले चुनाव में एक सीट मिली थी, इस बार कोई सीट नहीं जीत सकी।

शाह ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए पार्टी के चुनावी प्रदर्शन पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को अपने लगातार चुनावी नतीजों पर आत्ममंथन करना चाहिए। शाह ने गुजरात में कांग्रेस की पिछली जीत का वर्ष 1985 बताते हुए दावा किया कि पार्टी लंबे समय से राज्य में चुनावी सफलता हासिल नहीं कर पाई है। उनके मुताबिक, विपक्ष को चुनावी हार के कारणों पर विचार करना चाहिए, न कि केवल दूसरे मुद्दों को जिम्मेदार ठहराना चाहिए।
गृह मंत्री ने गुजरात के निकाय चुनावों में आम आदमी पार्टी के प्रदर्शन का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि पार्टी ने 32 सीटों पर उम्मीदवार उतारे, लेकिन किसी भी सीट पर जीत नहीं पाई। शाह ने इसे गुजरात में भाजपा के पक्ष में मिले समर्थन से जोड़कर पेश किया। हालांकि, चुनावी नतीजों और जमानत जब्त होने जैसे दावों में अंतर है; किसी उम्मीदवार की जमानत जब्त होने की पुष्टि के लिए संबंधित निर्वाचन क्षेत्र के आधिकारिक आंकड़े देखना जरूरी है।
अपने संबोधन में शाह ने राजस्थान और त्रिपुरा के स्थानीय चुनावों तथा पश्चिम बंगाल, असम और पुडुचेरी के उपचुनावों का हवाला दिया। उन्होंने दावा किया कि इन चुनावों में भाजपा और उसके सहयोगियों को उल्लेखनीय सफलता मिली, जबकि कांग्रेस का प्रदर्शन कमजोर रहा। त्रिपुरा की ग्राम समितियों के चुनावों का जिक्र करते हुए उन्होंने भाजपा समर्थित गठबंधन की सीटों और वोट हिस्सेदारी के आंकड़े भी रखे। इन आंकड़ों और राजनीतिक निष्कर्षों को शाह के दावों के रूप में देखा जाना चाहिए।

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर चल रहे विवाद के बीच शाह ने राहुल गांधी से सवाल किया कि क्या कांग्रेस की चुनावी हार के लिए SIR को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया हाल में शुरू हुई है, जबकि कांग्रेस को पहले भी कई चुनावों में हार का सामना करना पड़ा है। विपक्ष SIR की प्रक्रिया और मतदाता सूची में बदलाव को लेकर सवाल उठा रहा है, जबकि भाजपा अपने चुनावी प्रदर्शन को जनता के समर्थन से जोड़ती है।
दिल्ली में विपक्षी गठबंधन के हालिया प्रदर्शन पर टिप्पणी करते हुए शाह ने कहा कि सीमित क्षेत्र में जुटी भीड़ पूरे देश की आवाज होने का दावा नहीं कर सकती। उन्होंने विपक्ष पर नकारात्मक राजनीति करने का आरोप लगाया और कहा कि जनता उसके दावों से प्रभावित नहीं होगी। शाह ने 2029 के लोकसभा चुनाव का उल्लेख करते हुए NDA की जीत का भरोसा जताया। यह उनका राजनीतिक दावा है; आगामी चुनाव का वास्तविक परिणाम मतदाताओं के फैसले से तय होगा।
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