Bilaspur Municipal Corporation : छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में नगर निगम के विकास कार्यों में देरी और ऑनलाइन पोर्टल पर प्रगति की जानकारी अपडेट नहीं करने का मामला सामने आया है। राज्य शहरी विकास अभिकरण (सूडा) ने इस लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए नगर निगम के कार्यपालन अभियंता सह राज्य प्रवर्तित योजना प्रभारी अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। विभाग ने संबंधित अधिकारी को नोटिस मिलने के तीन दिन के भीतर जवाब देने और सभी लंबित जानकारियां पोर्टल पर अद्यतन करने के निर्देश दिए हैं।
सात वित्तीय वर्षों के कार्यों की समीक्षा में मिली खामियां
सूडा कार्यालय ने वित्तीय वर्ष 2018-19 से 2024-25 तक स्वीकृत विकास कार्यों की समीक्षा की। इस दौरान सामने आया कि बिलासपुर नगर निगम क्षेत्र में कई परियोजनाएं निर्धारित समयसीमा समाप्त होने के बावजूद पूरी नहीं हुई हैं। विभागीय जानकारी के अनुसार, ऑनलाइन पोर्टल पर 16 कार्य अब भी निर्माणाधीन दर्ज हैं, लेकिन उनकी वास्तविक और नवीनतम प्रगति से संबंधित जानकारी अपडेट नहीं की गई है। सूडा ने इसे सरकारी निर्देशों के उल्लंघन और विकास कार्यों की निगरानी में लापरवाही से जुड़ा मामला माना है।
4.03 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों पर सवाल
लंबित परियोजनाओं में वर्ष 2021-22 में स्वीकृत डॉ. बीआर आंबेडकर सर्वसमाज मांगलिक भवन का निर्माण भी शामिल है। इस परियोजना के लिए 300 लाख रुपये यानी तीन करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई थी। इसके अलावा वर्ष 2018-19 में स्वीकृत उद्यानों और पुष्पवाटिकाओं के विकास से जुड़े 15 अन्य कार्य भी सूची में शामिल हैं। इन परियोजनाओं में देरी से शहर के विभिन्न इलाकों में स्वीकृत विकास योजनाओं की प्रगति पर सवाल उठ रहे हैं।
चौबे कॉलोनी से अयोध्या नगरी तक परियोजनाएं लंबित
सूडा की सूची में चौबे कॉलोनी, सरकंडा और अन्य बस्तियों तथा कॉलोनियों में उद्यान विकास के काम शामिल हैं। प्रभावित क्षेत्रों में महामाया विहार, गायत्री नगर, विद्या नगर, कपिल नगर, देवकीनंदन दीक्षित नगर, साईधाम कॉलोनी तर्वा, गंगानगर, वसुंधरा नगर और अयोध्या नगरी के नाम दर्ज हैं। इन स्थानों पर उद्यानों और पुष्पवाटिकाओं के विकास के लिए स्वीकृत परियोजनाओं की स्थिति की जानकारी पोर्टल पर अद्यतन नहीं होने से विभाग ने जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया शुरू की है।
तीन दिन में जवाब और पोर्टल अपडेट करने के निर्देश
कारण बताओ नोटिस में संबंधित अधिकारी को तीन दिन के भीतर अपना स्पष्टीकरण देने के साथ सभी लंबित परियोजनाओं की जानकारी ऑनलाइन पोर्टल पर अपडेट करने को कहा गया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित समय में संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
विकास कार्यों की निगरानी पर बढ़ा ध्यान
सूडा की इस कार्रवाई के बाद नगर निगम की लंबित परियोजनाओं और उनकी निगरानी व्यवस्था पर ध्यान केंद्रित हुआ है। अब संबंधित अधिकारी के जवाब और पोर्टल पर अपडेट की गई जानकारी के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। समयसीमा में विकास कार्य पूरे करना और उनकी प्रगति का सही रिकॉर्ड उपलब्ध रखना संबंधित विभागों की जिम्मेदारी है।
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