Chhattisgarh Uniform Civil Code : छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की संभावनाओं पर राज्य सरकार ने प्रक्रिया आगे बढ़ाई है। शासन की ओर से गठित उच्चस्तरीय समिति प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में जनसंवाद और फील्ड स्टडी के माध्यम से लोगों की राय जुटा रही है। इसके साथ ही ऑनलाइन सुझाव देने की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। समिति का उद्देश्य राज्य में सभी नागरिकों के लिए समान कानूनी प्रावधान लागू करने के व्यावहारिक, सामाजिक और संवैधानिक पहलुओं का अध्ययन करना है।
विवाह से उत्तराधिकार तक समान नियमों पर विचार
वर्तमान में देश में विभिन्न धार्मिक समुदायों के पारिवारिक मामलों में अलग-अलग व्यक्तिगत कानून लागू होते हैं। प्रस्तावित समान नागरिक संहिता के तहत विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार और लिव-इन संबंधों जैसे विषयों पर समान कानूनी व्यवस्था की संभावनाओं का परीक्षण किया जाएगा। हालांकि, संहिता का अंतिम स्वरूप समिति की सिफारिशों और सरकार के निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगा। समिति विभिन्न समुदायों और सामाजिक वर्गों की चिंताओं को समझते हुए कानूनी पहलुओं का अध्ययन कर रही है।
30 अक्टूबर को बिलासपुर संभाग में जनसंवाद
समिति के अनुसार, बिलासपुर संभाग की बैठक 30 अक्टूबर को पंडित देवकी नंदन दीक्षित सभा भवन, लाल बहादुर शास्त्री स्कूल परिसर में आयोजित की जाएगी। इसमें विभिन्न क्षेत्रों के प्रबुद्ध नागरिकों और संबंधित पक्षों को यूसीसी पर अपनी राय रखने का अवसर मिलेगा। जनसंवाद के माध्यम से यह समझने का प्रयास किया जाएगा कि प्रस्तावित कानून का सामाजिक जीवन और पारिवारिक व्यवस्थाओं पर क्या प्रभाव पड़ सकता है। बैठक में प्राप्त सुझाव समिति की आगे की समीक्षा का हिस्सा बन सकते हैं।
जनजातीय परंपराओं और अधिकारों पर विशेष ध्यान
छत्तीसगढ़ में आदिवासी आबादी का हिस्सा लगभग 32 प्रतिशत बताया जाता है। बस्तर से सरगुजा तक अनेक जनजातीय समुदाय अपनी पारंपरिक और रूढ़िगत सामाजिक व्यवस्थाओं का पालन करते हैं। ऐसे में समिति के सामने महत्वपूर्ण सवाल यह है कि समान नागरिक संहिता का इन परंपराओं पर क्या असर होगा और क्या जनजातीय समुदायों के लिए विशेष संरक्षण या छूट की व्यवस्था जरूरी होगी। इस विषय पर स्थानीय समुदायों की राय और संवैधानिक प्रावधानों का अध्ययन अहम माना जा रहा है।
लैंगिक समानता और महिलाओं के अधिकारों पर चर्चा
प्रस्तावित संहिता से जुड़े विचार-विमर्श में लैंगिक न्याय भी एक प्रमुख विषय है। इसमें बेटियों के पैतृक संपत्ति में समान अधिकार, बहुविवाह से संबंधित कानूनी प्रावधान और महिलाओं के लिए उचित भरण-पोषण जैसे मुद्दों पर विचार किया जाएगा। समिति के सामने चुनौती यह होगी कि समानता के सिद्धांत, धार्मिक स्वतंत्रता और विविध सामाजिक परंपराओं के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। इन विषयों पर विभिन्न पक्षों के सुझाव मसौदा तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
अन्य राज्यों के अनुभवों का अध्ययन
छत्तीसगढ़ सरकार ने उत्तराखंड, गुजरात और मध्य प्रदेश में यूसीसी से संबंधित कदमों का अध्ययन करने के बाद सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय समिति गठित की है। समिति अन्य राज्यों के अनुभवों और प्रदेश से मिले सुझावों के आधार पर संभावित कानूनी मसौदे पर काम करेगी।
कैबिनेट की मंजूरी के बाद विधानसभा में आएगा विधेयक
सभी संभागों से प्रतिक्रियाएं प्राप्त होने के बाद समिति कानूनी पहलुओं की समीक्षा कर अपनी सिफारिशें राज्य कैबिनेट को सौंपेगी। इसके बाद कैबिनेट की मंजूरी मिलने पर प्रस्तावित विधेयक विधानसभा में पेश किया जा सकता है। फिलहाल प्रक्रिया सुझावों, अध्ययन और विचार-विमर्श के चरण में है। अंतिम निर्णय समिति की सिफारिशों और सरकार की आगे की कार्रवाई पर निर्भर करेगा।
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