Shiva Sharma Murder Case : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में शिवा शर्मा हत्याकांड की मुख्य आरोपी श्रद्धा दुबे को पकड़ने में पुलिस की कोशिशों पर सवाल खड़े हो गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस उसे रायबरेली से लखनऊ और गोरखपुर से नेपाल तक तलाश रही थी, जबकि वह कथित तौर पर तीन दिनों से लखनऊ में ही मौजूद थी। रविवार को श्रद्धा एक मॉल के बेसमेंट में पहुंची और मीडिया के सामने अपना पक्ष रखा। पुलिस को इसकी सूचना मिली, लेकिन टीम के पहुंचने से पहले ही वह वहां से निकल गई। इस घटनाक्रम से पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे।
सरेंडर की तैयारी के बीच कैसे बदला पूरा घटनाक्रम?
पुलिस सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के मुताबिक, श्रद्धा दुबे के आत्मसमर्पण को लेकर रविवार को एक योजना तैयार की गई थी। बताया जा रहा है कि मीडिया के सामने बयान देने के बाद उसे थाने में सरेंडर करना था। हालांकि, घटनाक्रम तय योजना के मुताबिक आगे नहीं बढ़ा और पुलिस के पहुंचने से पहले ही श्रद्धा वहां से फरार हो गई। नौ दिनों से उसकी तलाश में जुटी पुलिस के लिए यह स्थिति असहज करने वाली साबित हुई। फिलहाल, सामने आए इन दावों और कथित योजना की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।
कोर्ट में सरेंडर की अर्जी के बाद बढ़ा दबाव
रिपोर्ट के अनुसार, फरार चल रही श्रद्धा ने अदालत में आत्मसमर्पण के लिए आवेदन दिया था। इसके बाद पुलिस पर उसे जल्द पकड़ने का दबाव बढ़ गया। पुलिस सूत्रों का दावा है कि मीडिया के सामने बयान देने के दौरान उसकी गिरफ्तारी की योजना बनाई गई थी। कुछ दावों में यह भी कहा गया कि मामले की कानूनी दिशा बदलने और श्रद्धा को सरकारी गवाह बनाने को लेकर चर्चा हुई थी। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। इसलिए कथित समझौते या पुलिस की भूमिका से जुड़ी बातों को फिलहाल दावों के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
हत्या या गैर इरादतन हत्या, कथित डील पर उठे सवाल
श्रद्धा के आत्मसमर्पण को लेकर कथित समझौते की शर्तों पर भी सवाल उठ रहे हैं। रिपोर्ट में पुलिस सूत्रों के हवाले से दावा किया गया कि मामले को हत्या के बजाय गैर इरादतन हत्या में बदलने की बात थी। वहीं, एक अन्य दावे के मुताबिक, श्रद्धा चाहती थी कि घटना को आत्महत्या का मामला माना जाए और उसे गवाह बनाया जाए। उसकी बहन रश्मि की भूमिका को लेकर भी कथित तौर पर मतभेद थे। हालांकि, इन बातों की पुष्टि किसी आधिकारिक बयान या न्यायिक निष्कर्ष से नहीं हुई है। मामले में वास्तविक आरोप और जिम्मेदारी जांच तथा अदालत की प्रक्रिया से ही तय होगी।
इंस्पेक्टर विक्रम सिंह और डीसीपी विक्रम वीर पर कार्रवाई
श्रद्धा को गिरफ्तार करने में कथित नाकामी और मीडिया के सामने उसके पहुंचने की घटना के बाद लखनऊ पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों पर कार्रवाई की खबर सामने आई। रिपोर्ट के अनुसार, हजरतगंज थाने के इंस्पेक्टर विक्रम सिंह को लाइन हाजिर कर दिया गया, जबकि मामले की निगरानी कर रहे डीसीपी सेंट्रल विक्रम वीर को वेटिंग में डाल दिया गया। हजरतगंज थाने को शहर के महत्वपूर्ण थानों में गिना जाता है, इसलिए वहां तैनात अधिकारी से इस मामले में प्रभावी कार्रवाई की अपेक्षा थी। लगातार नौ दिनों तक आरोपी का पता नहीं चलना और फिर उसका कथित तौर पर पुलिस के पहुंचने से पहले निकल जाना विभाग के लिए बड़ी चुनौती बना।
अब जांच और गिरफ्तारी पर टिकी निगाहें
शिवा शर्मा हत्याकांड में अब सबसे अहम सवाल श्रद्धा दुबे की गिरफ्तारी और घटना की वास्तविक परिस्थितियों का है। कथित सरेंडर योजना, पुलिस की कार्रवाई और दोनों अधिकारियों पर हुए प्रशासनिक फैसलों को लेकर कई सवाल सामने आए हैं। हालांकि, किसी कथित समझौते या आरोपी की भूमिका पर अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही निकाला जा सकता है। पुलिस के सामने अब आरोपी को तलाशने के साथ-साथ मामले के तथ्यों और सामने आए दावों की स्पष्टता सुनिश्चित करने की चुनौती है। आगे की कार्रवाई से ही इस प्रकरण में कई अनसुलझे सवालों के जवाब मिल सकेंगे।
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