Iran vs USA 2026: पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष के बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची का एक महत्वपूर्ण बयान सामने आया है, जिसने कूटनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। अल जजीरा के साथ एक विशेष बातचीत में अराघची ने पुष्टि की है कि तेहरान को अमेरिका की ओर से सीधे संदेश प्राप्त हो रहे हैं। उन्होंने विशेष रूप से स्टीव विटकॉफ के माध्यम से मिल रहे संदेशों का जिक्र किया। हालांकि, विदेश मंत्री ने कड़े शब्दों में यह स्पष्ट कर दिया कि संदेशों के आदान-प्रदान का अर्थ यह कतई नहीं है कि ईरान और अमेरिका के बीच किसी भी प्रकार की औपचारिक ‘बातचीत’ या ‘वार्ता’ शुरू हो गई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि तेहरान वर्तमान में वॉशिंगटन के साथ किसी भी टेबल पर नहीं बैठा है।

15 सूत्रीय प्रस्ताव पर सस्पेंस: ईरान ने कहा—शर्तें मानना अभी बाकी
अराघची ने अमेरिकी दावों का खंडन करते हुए कहा कि ईरान ने अमेरिका द्वारा दिए गए 15 सूत्रीय प्रस्तावों का न तो कोई जवाब दिया है और न ही अपनी ओर से कोई नई शर्त रखी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान पूरे क्षेत्र में जारी इस रक्तपात को समाप्त करने के लिए तैयार है, लेकिन वह किसी भी ‘अस्थायी युद्धविराम’ के पक्ष में नहीं है। अराघची के अनुसार, ईरान एक स्थायी समाधान चाहता है। उन्होंने अमेरिका के साथ पिछले कड़वे अनुभवों को याद करते हुए कहा कि कई साल पहले हुए समझौतों से अमेरिका एकतरफा पीछे हट गया था, जिसके कारण अब तेहरान को वॉशिंगटन की नीयत पर गहरी आपत्ति और अविश्वास है। उन्होंने दोहराया कि सभी संचार आधिकारिक तौर पर विदेश मंत्रालय और सुरक्षा एजेंसियों के माध्यम से ही हो रहे हैं।
राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान का रुख: सुरक्षा की गारंटी के बिना समझौता नामुमकिन
ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने भी मंगलवार, 31 मार्च 2026 को इस संघर्ष पर अपना रुख स्पष्ट किया। यूरोपीय संघ के अध्यक्ष के साथ चर्चा के दौरान पेजेश्कियान ने कहा कि अमेरिका कूटनीति में भरोसा नहीं रखता। उन्होंने आरोप लगाया कि अतीत में बातचीत के दौरान भी ईरान पर दो बार हमले किए गए थे। राष्ट्रपति ने साफ किया कि ईरान इस युद्ध को लंबा खींचने का इच्छुक नहीं है और शांति के लिए तैयार है, लेकिन इसके लिए दो प्रमुख शर्तें हैं: पहली, ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और दूसरी, भविष्य में होने वाले किसी भी हमले को रोकने की अंतरराष्ट्रीय गारंटी दी जाए। उन्होंने दो टूक कहा कि ईरानी जनता के हितों और सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
डोनाल्ड ट्रंप की भविष्यवाणी: दो से तीन सप्ताह में समाप्त हो जाएगी जंग
दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस युद्ध के अंत को लेकर काफी आश्वस्त नजर आ रहे हैं। ट्रंप ने हाल ही में एक बयान जारी कर दावा किया कि ईरान के साथ चल रहा यह युद्ध अगले दो से तीन सप्ताह के भीतर समाप्त हो जाएगा। ट्रंप ने कहा कि इस लक्ष्य को पाने के लिए किसी औपचारिक समझौते की आवश्यकता नहीं है। उनके अनुसार, अमेरिका का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि ईरान के पास परमाणु हथियार न हों, और वह लक्ष्य अब पूरा हो चुका है। ट्रंप ने संकेत दिया कि अमेरिकी सेना अपना काम लगभग पूरा कर चुकी है और अगले कुछ दिनों में इस सैन्य अभियान का पटाक्षेप हो सकता है।
क्षेत्रीय स्थिरता की चुनौती: क्या कूटनीति लेगी सैन्य कार्रवाई की जगह?
वर्तमान स्थिति को देखते हुए यह स्पष्ट है कि जहाँ एक ओर सैन्य हमले जारी हैं, वहीं दूसरी ओर परदे के पीछे कूटनीतिक संदेशों की आवाजाही भी तेज हो गई है। ईरान जहाँ अपनी संप्रभुता और सुरक्षा की ठोस गारंटी मांग रहा है, वहीं अमेरिका इसे अपने सैन्य उद्देश्यों की पूर्ति बताकर जल्द खत्म करने की बात कर रहा है। आने वाले दो सप्ताह इस क्षेत्र के भविष्य के लिए अत्यंत निर्णायक साबित होंगे। क्या दोनों पक्ष किसी मध्यमार्ग पर सहमत हो पाएंगे या यह गतिरोध और गहराएगा, यह देखना दिलचस्प होगा।
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