Abir Gulaal first review: फवाद खान और वाणी कपूर की फिल्म ‘अबीर गुलाल’ का ग्लोबल स्तर पर रिलीज़ हो गया है, लेकिन भारत में यह अभी भी प्रतिबंधित है। इस फिल्म पर कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया आउटलेट्स ने नकारात्मक समीक्षा की है। भारत में प्रतिबंध लगाए जाने का कारण इस साल के शुरुआत में पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले से जुड़ा है, जिसमें लश्कर से जुड़े आतंकवादियों ने पर्यटकों को निशाना बनाया था और 27 लोगों की जान गई थी।
बीबीसी एशियन नेटवर्क ने फिल्म को “फ्रस्ट्रेटिंग रोमांटिक फिल्म” करार दिया है। मशहूर आलोचक हरोन राशिद ने लिखा, “यह फिल्म अब तक देखे गए सबसे निराशाजनक रोमांटिक ड्रामाओं में से एक है। न केवल इसकी प्रोडक्शन क्वालिटी सस्ती लगती है, बल्कि कहानी भी incoherent और inconsistent है, जो फिल्म के प्रतिभाशाली कलाकारों के साथ अन्याय है।”
गुल्फ न्यूज की समीक्षा में फिल्म की धीमी गति को लेकर नाराजगी जताई गई है। इसके साथ ही, लिसा हैडन की कैमियो भूमिका को पूरी कहानी के लिए निरर्थक बताया गया है। समीक्षा में लिखा गया, “‘अबीर गुलाल’ में अनावश्यक दृश्य और सेगमेंट्स हैं, जो फिल्म के रनटाइम को बेतरतीब तरीके से बढ़ाते हैं। लिसा हैडन का कैमियो इस बात का उदाहरण है कि बॉलीवुड कैसे अपने दर्शकों को परिचित चेहरे दिखाने के लिए फिल्म में अवांछित किरदार जोड़ देता है। अगर फिल्म का एडिटिंग कसा होता तो कहानी ज्यादा प्रभावी हो सकती थी और दर्शकों की रुचि बनी रहती।”
खलीज टाइम्स की समीक्षा में फिल्म को “घसीटा हुआ” बताया गया है। आलोचक ने कहा, “असंगठित संपादन और अधूरे किरदारों ने फिल्म को अधूरा छोड़ दिया है, जिससे कहानी के कई हिस्से अधूरे रह गए।”
फवाद खान की यह पहली बॉलीवुड फिल्म है, जिसमें उन्होंने नौ साल बाद वापसी की है। उनकी पिछली फिल्में – ‘खूबसूरत’ (2014), ‘कपूर एंड संस’ (2016) और ‘ऐ दिल है मुश्किल’ (2016) सफल रहीं थीं। लेकिन ‘अबीर गुलाल’ को भारत में प्रदर्शित नहीं किया जा रहा है क्योंकि हाल ही में पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद पाकिस्तान से जुड़े कलाकारों पर प्रतिबंध लगाया गया है। साथ ही, उनके सोशल मीडिया अकाउंट्स को भी सीमित कर दिया गया है और पाकिस्तान से जुड़े टीवी शोज़ यूट्यूब से हटा दिए गए हैं।
‘अबीर गुलाल’ का निर्माण विवेक अग्रवाल ने किया है और इस फिल्म का निर्देशन आरती एस बागड़ी ने किया है। फिल्म को लेकर दर्शकों और आलोचकों दोनों की उम्मीदें काफी थीं, लेकिन वह उम्मीदें पूरी नहीं हो सकीं।
कुल मिलाकर, ‘अबीर गुलाल’ ने दर्शकों और आलोचकों को निराश किया है। कमजोर कहानी, धीमी गति और बेतरतीब संपादन ने फिल्म की गुणवत्ता को प्रभावित किया है। फवाद खान और वाणी कपूर जैसे कलाकारों की प्रतिभा इस फिल्म में पूरी तरह से उभर कर नहीं आ पाई। हालांकि फिल्म की ग्लोबल रिलीज के बावजूद भारत में प्रतिबंधित रहना इसके लिए एक बड़ा झटका है।
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