Abujhmad Marathon 2026: छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले में स्थित ‘अबूझमाड़’ की पावन धरा पर आज एक नया इतिहास रचा गया। ‘शांति, सद्भाव और विकास’ के संकल्प के साथ ‘अबूझमाड़ पीस हाफ मैराथन 2026’ का भव्य आयोजन किया गया। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अलसुबह नारायणपुर के हाईस्कूल परिसर पहुँचकर इस ऐतिहासिक दौड़ को हरी झंडी दिखाई। इस दौरान मुख्यमंत्री का उत्साह देखते ही बनता था; उन्होंने न केवल धावकों का मनोबल बढ़ाया, बल्कि स्वयं भी सांकेतिक रूप से दौड़ लगाकर एकजुटता का संदेश दिया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने विजयी प्रतिभागियों को दिए जाने वाले विशेष मेडल का अनावरण भी किया, जो बस्तर की बदलती तस्वीर का प्रतीक है।
मुख्यमंत्री का संबोधन: अमन और शांति का गढ़ बन रहा है अब बस्तर
मैराथन के शुभारंभ पर जनसमूह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि आज अबूझमाड़ की धरती से पूरे देश और दुनिया को अमन-चैन का एक मजबूत संदेश दिया जा रहा है। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि यह वही क्षेत्र है, जहाँ कुछ समय पहले तक आम नागरिकों और सुरक्षा जवानों का पहुँचना एक बड़ी चुनौती माना जाता था। लेकिन आज यहाँ का सकारात्मक वातावरण और हज़ारों लोगों की उपस्थिति यह सिद्ध करती है कि बस्तर अब डर के साये से बाहर आ चुका है। मुख्यमंत्री ने युवाओं के जोश की सराहना करते हुए कहा कि यह उत्साह संकेत है कि बस्तर जल्द ही माओवाद के कलंक से मुक्त होकर खुशहाली से आबाद होगा।
डबल इंजन सरकार का संकल्प: 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद का समूल अंत
मुख्यमंत्री साय ने इस परिवर्तन का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के नेतृत्व वाली ‘डबल इंजन’ सरकार की नीतियों को दिया। उन्होंने केंद्र सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति का उल्लेख करते हुए दोहराया कि 31 मार्च 2026 तक देश से नक्सलवाद के पूर्ण उन्मूलन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने सुरक्षा बलों के जवानों के अदम्य साहस को नमन करते हुए कहा कि उनके बलिदान के कारण ही आज बस्तर में शांति और विकास की नींव मजबूत हुई है। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि बहुत जल्द ‘लाल आतंक’ का नामोनिशान मिट जाएगा और पूरा बस्तर विकास की मुख्यधारा से जुड़ जाएगा।
विकास की नई बयार: 351 करोड़ के कार्यों से संवरेगा बस्तर का भविष्य
नक्सलवाद के कारण पिछड़ चुके बस्तर को लेकर मुख्यमंत्री ने महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि हाल ही में क्षेत्र में 351 करोड़ रुपये के विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पिछले चार दशकों से जो क्षेत्र विकास से वंचित रहा, वहाँ अब बुनियादी सुविधाओं की कमी नहीं होगी। सरकार का संकल्प है कि बस्तर के सुदूर वनांचलों तक शिक्षा, स्वास्थ्य और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाएं पहुँचें। उन्होंने कहा कि बस्तर में अब विकास की गंगा अविरल बहेगी और हर हाथ को काम मिलेगा।
हथियार छोड़ मुख्यधारा में लौटे युवा: पूर्व नक्सलियों की भागीदारी ने जीता दिल
इस मैराथन की सबसे प्रेरणादायी और ऐतिहासिक झलक तब देखने को मिली जब आत्मसमर्पित माओवादी युवाओं ने भी दौड़ में हिस्सा लिया। कभी हाथों में हथियार उठाने वाले इन युवाओं ने आज पैरों में दौड़ने के जूते पहनकर शांति का संदेश दिया। नारायणपुर की ‘अबूझमाड़िया’ जनजाति और स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी ने इस आयोजन को एक उत्सव में बदल दिया। यह दृश्य इस बात का प्रमाण था कि बस्तर के लोग अब हिंसा नहीं, बल्कि प्रगति का रास्ता चुन चुके हैं।
गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति: एकजुट हुआ प्रशासनिक और राजनीतिक नेतृत्व
इस गरिमामय कार्यक्रम में शासन-प्रशासन के दिग्गज चेहरे शामिल हुए। वन एवं पर्यावरण मंत्री केदार कश्यप, प्रभारी मंत्री टंकराम वर्मा, बस्तर सांसद महेश कश्यप और पद्मश्री वैद्यराज हेमचंद मांझी जैसे गणमान्य व्यक्तियों ने धावकों का उत्साहवर्धन किया। प्रशासनिक स्तर पर मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत, बस्तर कमिश्नर, आईजी पी. सुंदरराज और कलेक्टर नम्रता जैन सहित भारी संख्या में नागरिक इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बने। यह मैराथन केवल एक खेल आयोजन नहीं, बल्कि बस्तर के पुनरुत्थान की गौरवगाथा बन गई।
















