Adani Power Coal Scam
Adani Power Coal Scam: छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के दीपका थाना क्षेत्र में अदाणी पावर को भेजे जा रहे कोयले की खेप में बड़े पैमाने पर हेराफेरी का मामला सामने आया है। इस संगठित अपराध ने पुलिस प्रशासन और औद्योगिक हलकों में खलबली मचा दी है। ताजा कार्रवाई के बाद इस मामले में गिरफ्तार किए गए आरोपियों की कुल संख्या अब 14 तक पहुँच गई है। इससे पहले पुलिस ने 11 संदिग्धों को हिरासत में लिया था, जिनसे पूछताछ के आधार पर इस सिंडिकेट के अन्य सदस्यों तक पहुँचा गया। जांच की बढ़ती रफ्तार को देखते हुए यह अंदेशा जताया जा रहा है कि यह केवल कुछ ट्रक ड्राइवरों का काम नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक बहुत बड़ा और प्रभावशाली नेटवर्क सक्रिय है।
पुलिसिया तफ्तीश में इस गिरोह की कार्यप्रणाली (Modus Operandi) का चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। जानकारी के अनुसार, साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECCL) की स्थानीय खदानों से अदाणी पावर की साइडिंग जयरामनगर के लिए कोयला लोड किया जाता था। निर्धारित रूट के अनुसार इस कोयले को सीधे साइडिंग पर पहुँचना था, लेकिन बीच रास्ते में ही इसे बेहद शातिराना तरीके से दूसरे निजी डिपो में खाली कर दिया जाता था। इस सुव्यवस्थित सिस्टम के जरिए उच्च गुणवत्ता वाले कोयले की जगह कथित तौर पर मिट्टी या खराब पत्थर मिलाकर खानापूर्ति की जाती थी। इस हेराफेरी के कारण अदाणी पावर को करोड़ों रुपये का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है।
इस पूरे खेल का पर्दाफाश तब हुआ जब अदाणी पावर के प्रबंधन को कोयले की मात्रा और गुणवत्ता में विसंगति महसूस हुई। कंपनी ने जब अपनी आंतरिक ऑडिट और जांच शुरू की, तो कोयले के स्टॉक में भारी अंतर पाया गया। इसके बाद प्रबंधन ने तुरंत दीपका पुलिस को मामले की लिखित शिकायत दी। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए छापेमारी की और शुरुआती दौर में तीन ट्रेलरों को जब्त किया। जांच आगे बढ़ने पर तीन और ट्रेलर पुलिस के कब्जे में आए। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, अब तक लगभग 355 टन कोयले की चोरी की पुष्टि हो चुकी है, जिसकी बाजार में कीमत लाखों में आंकी गई है।
यह मामला केवल साधारण चोरी का नहीं है, बल्कि इसमें आधुनिक तकनीक का भी दुरुपयोग किया गया है। पूछताछ में पता चला है कि आरोपियों ने कोयले की ट्रैकिंग से बचने के लिए एक विशेष टीम बना रखी थी। ट्रेलरों में लगे जीपीएस (GPS) सिस्टम को या तो पूरी तरह हटा दिया जाता था या फिर उसे किसी एक स्थान पर स्थिर कर दिया जाता था, ताकि कंपनी के मॉनिटरिंग सेल को लगे कि वाहन सही रास्ते पर है। हालिया कार्रवाई में पुलिस ने एक ऐसे तकनीकी विशेषज्ञ को भी गिरफ्तार किया है जो जीपीएस सिस्टम से छेड़छाड़ करने में माहिर था। इसके अलावा पेट्रोलिंग टीम का एक सदस्य और एक सुपरवाइजर भी इस अपराध में शामिल पाया गया है।
दीपका पुलिस के अनुसार, आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, कोयला चोरी और तकनीकी उपकरणों से छेड़छाड़ जैसी गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस का मानना है कि 355 टन तो केवल वह आंकड़ा है जो पकड़ा गया है, संभवतः यह खेल महीनों या सालों से चल रहा था। इस संगठित गिरोह की जड़ें काफी गहरी हैं और इसमें कुछ डिपो संचालकों की मिलीभगत की भी आशंका है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जांच के अगले चरण में कुछ बड़े नामों का खुलासा हो सकता है और आने वाले दिनों में और भी गिरफ्तारियां निश्चित हैं।
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