West Bengal polls 2026
West Bengal polls 2026 : पश्चिम बंगाल की सियासत में चुनावी पारा अपने चरम पर है, लेकिन इसी बीच हिंसा की खबरों ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कांग्रेस के दिग्गज नेता और लोकसभा में पूर्व नेता प्रतिपक्ष अधीर रंजन चौधरी ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। अधीर रंजन चौधरी का दावा है कि मुर्शिदाबाद जिले की बहरामपुर विधानसभा सीट पर जब वे चुनाव प्रचार कर रहे थे, तब ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी के कार्यकर्ताओं ने उन पर जानलेवा हमला किया। इस घटना के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में उबाल आ गया है और कांग्रेस कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश देखा जा रहा है।
अधीर रंजन चौधरी ने इस हमले को लोकतंत्र के लिए एक काला धब्बा बताया है। उन्होंने तत्काल भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) से संपर्क किया और घटना की लिखित शिकायत दर्ज कराई। अधीर ने अपनी शिकायत में मांग की है कि हमले के पीछे जिम्मेदार दोषियों की पहचान कर उन पर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने पहले ही स्थानीय प्रशासन को अपनी सुरक्षा और क्षेत्र में बिगड़ते माहौल को लेकर सचेत किया था, लेकिन प्रशासन की लापरवाही के कारण ही उन पर यह हमला हुआ। उनका मानना है कि निष्पक्ष चुनाव के लिए उम्मीदवारों की सुरक्षा सबसे पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।
हमले की घटना के बावजूद अधीर रंजन चौधरी के हौसले पस्त नहीं हुए हैं। चुनावी माहौल पर चर्चा करते हुए उन्होंने विश्वास जताया कि बहरामपुर की जनता का मूड पूरी तरह से कांग्रेस के पक्ष में है। उन्होंने भावुक होते हुए कहा, “बहरामपुर के लोगों के साथ मेरा रिश्ता दशकों पुराना और बेहद मजबूत है, जिसे कोई भी हिंसा या डर कम नहीं कर सकता।” उन्होंने दावा किया कि जनता इस बार बदलाव चाहती है और टीएमसी की ‘बाहुबली राजनीति’ का जवाब अपने वोट के माध्यम से देगी। क्षेत्र में मिल रहे जनसमर्थन को उन्होंने अपनी सबसे बड़ी ताकत बताया।
अधीर रंजन चौधरी ने केवल हिंसा ही नहीं, बल्कि विकास के मुद्दों पर भी राज्य की टीएमसी सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि बहरामपुर और उसके आसपास के क्षेत्रों में रेलवे की कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं केवल इसलिए लंबित पड़ी हैं क्योंकि सत्तारूढ़ पार्टी उन्हें इसका श्रेय (Credit) नहीं लेने देना चाहती। उन्होंने सीधे तौर पर कहा कि ममता सरकार अपने सियासी फायदे के लिए जनहित के कार्यों को रोक रही है, जिससे राज्य के बुनियादी ढांचे और आम जनता को भारी नुकसान हो रहा है। उन्होंने विकास की इस राजनीति को ‘नकारात्मक और जनविरोधी’ करार दिया।
राजनीतिक दृष्टि से यह चुनाव अधीर रंजन चौधरी के लिए बेहद खास है। 5 बार सांसद रह चुके अधीर लगभग 30 साल बाद विधानसभा चुनाव के मैदान में उतरे हैं। कांग्रेस ने उन्हें उनकी पारंपरिक सीट बहरामपुर से उम्मीदवार बनाया है। यहाँ उनका मुकाबला भाजपा और टीएमसी के कद्दावर उम्मीदवारों से है, जिससे मुकाबला त्रिकोणीय और दिलचस्प हो गया है। बता दें कि पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव दो चरणों में 23 और 29 अप्रैल को होने हैं, जबकि 4 मई को चुनावी परिणामों के साथ यह स्पष्ट हो जाएगा कि बहरामपुर की जनता ने अपना ताज किसके सिर पर सजाया है।
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