राष्ट्रीय

Kerala Election 2026 : केरल के चुनावी दंगल में धनबल और बाहुबल का कब्जा, एडीआर की चौंकाने वाली रिपोर्ट

Kerala Election 2026 :  केरलम विधानसभा चुनाव 2026 के रण में उतरे उम्मीदवारों के प्रोफाइल ने लोकतांत्रिक शुचिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) द्वारा शनिवार को जारी रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव लड़ रहे कुल 883 में से 863 उम्मीदवारों के हलफनामों के विश्लेषण में पाया गया कि 38% उम्मीदवारों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं। इसमें सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि 23% प्रत्याशी हत्या और बलात्कार जैसे जघन्य अपराधों के आरोपों का सामना कर रहे हैं। राजनीतिक दलों की बात करें तो कांग्रेस इस सूची में शीर्ष पर है, जिसके 72 उम्मीदवारों पर केस दर्ज हैं, जबकि भाजपा के 59 और सीपीआई(एम) के 51 उम्मीदवार दागी छवि के हैं।

पांच साल में 48% बढ़े करोड़पति प्रत्याशी: अमीरों की चमक बरकरार

रिपोर्ट के मुताबिक, केरल की राजनीति में धनबल का प्रभाव तेजी से बढ़ा है। 2021 के पिछले विधानसभा चुनाव में जहां केवल 27% उम्मीदवार करोड़पति थे, वहीं 2026 में यह आंकड़ा बढ़कर 39% हो गया है। यानी पिछले पांच वर्षों में करोड़पति उम्मीदवारों की संख्या में 48% की भारी वृद्धि दर्ज की गई है। वर्तमान में हर पांच में से दो उम्मीदवार करोड़पति हैं। अगर औसत संपत्ति की बात करें तो भाजपा के एक उम्मीदवार की औसत संपत्ति 5.7 करोड़ रुपये है, जो सभी दलों में सबसे अधिक है। इसके बाद कांग्रेस के उम्मीदवारों की औसत संपत्ति 3.93 करोड़ और सीपीआई(एम) की 2.3 करोड़ रुपये आंकी गई है।

सबसे अमीर बनाम सबसे गरीब: 218 करोड़ और 84 रुपये का फासला

संपत्ति के मामले में उम्मीदवारों के बीच भारी असमानता देखने को मिली है। अलप्पुझा जिले की कुट्टनाड सीट से केरल कांग्रेस के उम्मीदवार रेजी चेरियन 2026 के चुनाव के सबसे अमीर प्रत्याशी हैं, जिनकी कुल संपत्ति 218 करोड़ रुपये है। इसके ठीक उलट, कोट्टायम की एट्टुमानूर सीट से SUCI(C) की उम्मीदवार आश्ना थम्बी ने अपनी कुल संपत्ति मात्र 84 रुपये घोषित की है। वहीं, 8 उम्मीदवार ऐसे भी हैं जिन्होंने अपनी चल-अचल संपत्ति ‘शून्य’ बताई है। चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों की कुल औसत संपत्ति 2.78 करोड़ रुपये प्रति उम्मीदवार है।

शिक्षा और जेंडर गैप: साक्षर राज्य में केवल 11% महिला उम्मीदवार

केरलम अपनी उच्च साक्षरता दर और बेहतर लिंगानुपात (जहाँ पुरुषों से अधिक महिलाएँ हैं) के लिए जाना जाता है, लेकिन चुनावी आंकड़ों में यह विरोधाभास स्पष्ट दिखता है। राजनीतिक दलों ने इस बार केवल 11% (92) टिकट ही महिलाओं को दिए हैं। शिक्षा के मोर्चे पर भी आंकड़े हैरान करने वाले हैं; चुनाव लड़ रहे 54% उम्मीदवार ग्रेजुएट नहीं हैं। वहीं, 48% उम्मीदवारों की शैक्षणिक योग्यता महज 5वीं से 12वीं कक्षा के बीच है। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि साक्षरता के मामले में देश का सिरमौर राज्य होने के बावजूद विधायी संस्थाओं के लिए कम पढ़े-लिखे लोगों को अधिक प्राथमिकता मिल रही है।

उम्र का गणित: युवाओं की तुलना में अनुभवी चेहरों पर अधिक दांव

उम्मीदवारों की आयु सीमा के विश्लेषण से पता चलता है कि राजनीतिक दल युवाओं के बजाय अनुभवी चेहरों पर अधिक भरोसा कर रहे हैं। चुनाव लड़ रहे 58% (497) उम्मीदवार 41 से 60 वर्ष की आयु के हैं। वहीं, 26% (224) उम्मीदवार 61 से 80 वर्ष की आयु वर्ग में आते हैं। युवाओं की भागीदारी (25 से 40 वर्ष) केवल 16% तक सीमित है। दिलचस्प बात यह है कि इस चुनावी मैदान में 2 उम्मीदवार ऐसे भी हैं जिनकी उम्र 80 वर्ष पार कर चुकी है। केरल में 9 अप्रैल को एकल चरण में मतदान होना है और इस ‘दागी और अमीर’ चुनावी दंगल का परिणाम 4 मई को घोषित किया जाएगा।

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