अंतरराष्ट्रीय

Afghan-Pak Crisis: भारत के इशारों पर नाच रहा अफगानिस्तान! ख्वाजा आसिफ के बयान से पाक-अफगान संबंध और बिगड़े

Afghan-Pak Crisis: पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमापार तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने 28 अक्टूबर को एक टीवी कार्यक्रम में कहा कि अफगान सरकार भारत के हाथों में चल रही है और यदि काबुल ने इस्लामाबाद पर हमला करने की कोशिश की तो पाकिस्तान “50 गुना ज्यादा” ताकत से पलटवार करेगा।

आसिफ का आरोप: अफगानिस्तान “दिल्ली के मोहरे” की तरह

Geo News के कार्यक्रम में बोलते हुए ख्वाजा आसिफ ने अफगान सरकार पर गंभीर आरोप लगाए और कहा कि “काबुल में जो लोग सत्ता चला रहे हैं वे दिल्ली के इशारों पर कठपुतली की तरह नाच रहे हैं। भारत अफगानिस्तान को मोहरा बनाकर पाकिस्तान के खिलाफ साजिश रच रहा है।” उन्होंने यह भी दावा किया कि तुर्की (इस्तांबुल) में पाकिस्तान-अफगानिस्तान के बीच हुई वार्ता बार-बार अफगान पक्ष की पीछे हटने से प्रभावित रही और समझौते को अंतिम रूप नहीं मिल पाया।

पाकिस्तान की मांग: TTP पर ठोस कार्रवाई

पाकिस्तान ने बार-बार आग्रह किया है कि अफगानिस्तान अपने क्षेत्र में सक्रिय आतंकवादी समूहों — विशेषकर तेहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) — के खिलाफ प्रमाणिक और प्रभावी कार्रवाई करे। सूत्रों के अनुसार तुर्की और कतर की मध्यस्थता में हुई बैठकों के बावजूद मामला सुलझा नहीं, जबकि पाकिस्तान की प्रमुख मांग यही रही है कि काबुल अपने इलाके से पाकिस्तान में आतंकवाद को रोके।

सूचना मंत्री का बयान और सीमा झड़पों का संदर्भ

पाकिस्तान के सूचना मंत्री अत्ता उल्लाह तारड़ ने भी इस्तांबुल वार्ताओं पर टिप्पणी करते हुए कहा कि अफगान प्रतिनिधि बार-बार मूल मुद्दों से भटकते रहे और जिम्मेदारी लेने से बचते रहे। पिछले कुछ हफ्तों में दोनों देशों की सीमाओं पर हुई झड़पों में सैनिक व नागरिकों की हताहतियों की खबरें आईं, जिससे द्विपक्षीय तनाव युद्ध जैसी स्थिति के कगार पर पहुंच गया था। हालांकि 19 अक्टूबर को कतर की मध्यस्थता में दोहा में अस्थायी युद्धविराम हुआ, पर वह स्थायी शांति कायम नहीं कर पाया।

कड़ा रुख -शब्दों में तेज़ी, नीतिगत परिणाम अनिश्चित

ख्वाजा आसिफ के कड़े शब्द—“अगर अफगानिस्तान ने इस्लामाबाद की ओर आंख उठाई भी तो हम उसकी आंखें निकाल देंगे”—ने प्रवचन को और तीखा कर दिया है। किसी भी तरह की कूटनीतिक या सैन्य कार्रवाई के संभावित परिणामों पर अभी अनिश्चितता बनी हुई है और दोनों पक्षों के बीच किसी भी बड़े संघर्ष को रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता की आवश्यकता पर जोर दिया जा रहा है।

क्या है आगे?

सीमापार तनाव, तुर्की और कतर जैसी मध्यस्थ शक्तियों की भूमिका, तथा दोनों देशों की आंतरिक और बाह्य नीतियाँ—ये कारक आगे के घटनाक्रम निर्धारित करेंगे। फिलहाल दोनों ओर आधिकारिक बयानबाजी तेज है और क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति पर पैनी नज़र रखी जा रही है।

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