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AI Medical Diagnosis: अमेरिका के यूटा में ऐतिहासिक पहल, अब एआई लिखेगा दवाइयों के पर्चे

AI Medical Diagnosis:  आधुनिक युग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का दायरा केवल तकनीकी गैजेट्स तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अब यह हमारी जीवनशैली और स्वास्थ्य सेवाओं का अभिन्न अंग बनता जा रहा है। अमेरिका के यूटा राज्य ने इस दिशा में एक क्रांतिकारी और साहसिक कदम उठाया है। यूटा अब अमेरिका का पहला ऐसा राज्य बन गया है, जहाँ एआई को कुछ विशेष प्रकार की दवाओं के पर्चे (Prescriptions) को रिन्यू करने की आधिकारिक अनुमति दी गई है। यह पहल एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू की गई है, जिसका उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ और आधुनिक बनाना है।

पायलट प्रोजेक्ट ‘डॉक्ट्रॉनिक’: कैसे काम करेगा यह सिस्टम?

इस नवाचारी परियोजना को ‘डॉक्ट्रॉनिक’ (Doctronic) नामक हेल्थ-टेक कंपनी के सहयोग से धरातल पर उतारा गया है। इस एआई सिस्टम का प्राथमिक कार्य उन मरीजों की मदद करना है जो लंबे समय से किसी पुरानी या स्थायी बीमारी (Chronic Illness) से जूझ रहे हैं। अक्सर ऐसे मरीजों को हर कुछ महीनों में अपनी नियमित दवाओं को रिन्यू कराने के लिए डॉक्टर के चक्कर लगाने पड़ते हैं। अब एआई सिस्टम बिना किसी डॉक्टर के सीधे हस्तक्षेप के, मरीज के पिछले डेटा का विश्लेषण कर रूटीन पर्चे को आगे बढ़ा सकेगा। इससे मरीजों के समय और भागदौड़ में भारी कमी आएगी।

भरोसे की कसौटी: क्या मशीन पर यकीन करेंगे मरीज?

इस परियोजना के शुरू होते ही विशेषज्ञों और आम जनता के बीच एक बड़ी बहस छिड़ गई है। सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या मरीज एक मशीन द्वारा तैयार किए गए पर्चे पर वैसा ही भरोसा कर पाएंगे जैसा वे अपने डॉक्टर पर करते हैं? सुरक्षा, जवाबदेही और कानूनी रेगुलेशन को लेकर भी कई गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं। यदि एआई द्वारा सुझाई गई दवा से कोई साइड इफेक्ट होता है, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? फिलहाल, अमेरिकी नियामक संस्था ‘फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन’ (FDA) ने इस पर कोई स्पष्ट राय साझा नहीं की है। जानकारों का मानना है कि यदि FDA इसे कड़े नियमों के दायरे में लाता है, तो शायद इस प्रोजेक्ट का भविष्य सीमित हो जाए।

सरकारी पक्ष: डॉक्टरों की कमी और बढ़ती लागत का समाधान

यूटा राज्य के अधिकारियों ने इस योजना का पुरजोर समर्थन किया है। यूटा डिपार्टमेंट ऑफ कॉमर्स की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर मार्गरेट बुसे का तर्क है कि स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती लागत और डॉक्टरों की भारी कमी को देखते हुए यह कदम अनिवार्य था। विशेष रूप से ग्रामीण इलाकों में जहाँ डॉक्टरों की उपलब्धता बहुत कम है, वहां एआई एक जीवनरक्षक तकनीक साबित हो सकती है। सरकार का मानना है कि यदि रूटीन और सामान्य पर्चों को ‘ऑटोमेट’ कर दिया जाए, तो विशेषज्ञ डॉक्टर अपना कीमती समय गंभीर और आपातकालीन मामलों पर केंद्रित कर सकेंगे। इससे मरीजों का आर्थिक बोझ भी कम होगा।

मेडिकल एसोसिएशन की चिंता: “बिना डॉक्टर की सलाह, खतरा बड़ा”

दूसरी ओर, चिकित्सा जगत से जुड़े विभिन्न संगठनों ने इस फैसले पर अपनी गहरी चिंता व्यक्त की है। ‘अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन’ (AMA) ने एक बयान जारी कर कहा है कि यद्यपि एआई स्वास्थ्य क्षेत्र को बेहतर बनाने में सहायक हो सकता है, लेकिन डॉक्टर के मानवीय परामर्श और अनुभव के बिना दवाइयां लिखना खतरनाक हो सकता है। चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति डॉक्टर और मरीज के बीच के भरोसेमंद रिश्ते को कमजोर कर सकती है और छोटी सी तकनीकी चूक किसी की जान पर भी भारी पड़ सकती है।

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