Ajit Doval
Ajit Doval : नई दिल्ली में आयोजित ‘विकसित भारत युवा नेता संवाद’ के उद्घाटन समारोह में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने राष्ट्र के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता और भविष्य की चुनौतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने युवाओं को संबोधित करते हुए एक कड़ा संदेश दिया कि आज हम जिस स्वतंत्र भारत में सांस ले रहे हैं, वह हमेशा ऐसा नहीं था। डोभाल ने भावुक होते हुए कहा कि हमारे पूर्वजों ने इस आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। उन्होंने उस दौर का जिक्र किया जब भारत ने असहनीय अपमान और असहायता का सामना किया। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अनगिनत लोगों को फांसी के फंदे पर लटकाया गया और हमारे गांवों को बेरहमी से जला दिया गया, तब जाकर यह गौरवशाली भारत खड़ा हुआ है।
डोभाल ने अपने भाषण में भारतीय सभ्यता पर हुए ऐतिहासिक हमलों का जिक्र करते हुए कहा कि विदेशी आक्रांताओं ने हमारी संस्कृति और पहचान को मिटाने की पुरजोर कोशिश की। उन्होंने कहा, “हमारे पवित्र मंदिरों को लूटा गया और हम एक लंबी अवधि तक केवल मूकदर्शक बने रहे। हम अपनी आंखों के सामने अपनी धरोहरों को नष्ट होते हुए देखते रहे क्योंकि उस समय हम असहाय थे।” उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल संपत्ति की लूट नहीं थी, बल्कि एक महान सभ्यता के आत्मविश्वास को तोड़ने का प्रयास था। आज का भारत अब उस कमजोरी को पीछे छोड़ चुका है और अपनी सुरक्षा के प्रति सतर्क है।
NSA डोभाल ने ‘प्रतिशोध’ शब्द को एक नई और सकारात्मक व्याख्या दी। उन्होंने कहा कि हालांकि प्रतिशोध हमेशा एक आदर्श शब्द नहीं माना जाता, लेकिन यह एक शक्तिशाली ऊर्जा का स्रोत हो सकता है। युवाओं को प्रेरित करते हुए उन्होंने कहा कि हमें अपनी हिस्ट्री का बदला लेना होगा, लेकिन यह बदला किसी विनाश के जरिए नहीं, बल्कि भारत को उस मुकाम पर वापस ले जाकर लेना होगा जहाँ हम अपनी सोच, मान्यताओं और अधिकारों के आधार पर एक ‘महान भारत’ का पुनर्गठन कर सकें। हर युवा के भीतर राष्ट्र को बदलने की वह आग होनी चाहिए जो भारत को विश्व गुरु के पद पर आसीन करे।
डोभाल ने एक आत्मचिंतन वाला सवाल उठाते हुए कहा कि प्राचीन काल में जब दुनिया पिछड़ी हुई थी, तब भी भारत एक विकसित सभ्यता थी। भारत ने कभी किसी देश पर हमला नहीं किया, न ही किसी के धर्मस्थलों को नुकसान पहुँचाया। लेकिन, उन्होंने एक कड़वा सच भी स्वीकार किया कि हम अपनी सुरक्षा और संभावित खतरों को भांपने में विफल रहे। उन्होंने चेतावनी दी कि इतिहास हमें सिखाता है कि जब भी हम सुरक्षा के प्रति उदासीन रहे, हमें भारी कीमत चुकानी पड़ी। यदि आने वाली पीढ़ियां इन ऐतिहासिक गलतियों से सबक नहीं लेती हैं, तो यह आधुनिक भारत के लिए सबसे बड़ी त्रासदी होगी।
युद्ध के पीछे के मनोविज्ञान को समझाते हुए अजीत डोभाल ने कहा कि भारत कोई मनोरोगी राष्ट्र नहीं है जिसे हिंसा या दुश्मनों की लाशें देखकर खुशी मिले। उन्होंने स्पष्ट किया कि जंग केवल हथियारों से नहीं, बल्कि इच्छाशक्ति (Willpower) से जीती जाती है। उन्होंने कहा, “युद्ध किसी राष्ट्र के मनोबल को तोड़ने के लिए लड़ा जाता है ताकि वह आपकी शर्तों को मान ले।” उन्होंने युवाओं को अपनी इच्छाशक्ति मजबूत करने की सलाह दी, क्योंकि करोड़ों नागरिकों की सामूहिक इच्छाशक्ति ही अंततः ‘राष्ट्रीय शक्ति’ का रूप लेती है, जो किसी भी दुश्मन को सरेंडर करने पर मजबूर कर सकती है।
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