Ajit Pawar Plane Incident
Ajit Pawar Plane Incident: महाराष्ट्र के राजनीतिक गलियारे को स्तब्ध कर देने वाले उपमुख्यमंत्री अजित पवार के विमान हादसे में अब एक नया मोड़ आया है। 28 जनवरी 2026 को मुंबई से बारामती जाते समय हुए इस दर्दनाक हादसे पर एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) ने अपनी पहली प्रारंभिक रिपोर्ट जारी कर दी है। इस रिपोर्ट में बारामती एयरपोर्ट की बुनियादी सुविधाओं और सुरक्षा मानकों में कई गंभीर खामियों को उजागर किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, जिस समय यह हादसा हुआ, उस वक्त न केवल मौसम खराब था, बल्कि एयरपोर्ट पर मौजूद परिचालन व्यवस्था (Operational setup) भी मानकों के अनुरूप नहीं थी।
AAIB की रिपोर्ट में सबसे प्रमुख कारण कम दृश्यता (Low Visibility) को बताया गया है। नियमों के अनुसार, विजुअल फ्लाइट रूल्स (VFR) के तहत लैंडिंग के लिए कम से कम 5000 मीटर (5 किमी) की विजिबिलिटी अनिवार्य है। हालांकि, हादसे के समय बारामती टावर ने विमान के क्रू को केवल 3000 मीटर की दृश्यता की जानकारी दी थी। इसके बावजूद विमान ने लैंडिंग की प्रक्रिया जारी रखी। इसके अलावा, रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ है कि बारामती एक ‘अनकंट्रोल्ड एयरफील्ड’ है, जहाँ नेविगेशनल एड्स (दिशानिर्देश उपकरण) का नितांत अभाव है।
जांच टीम ने ऑनसाइट इंस्पेक्शन के दौरान पाया कि बारामती एयरपोर्ट के रनवे की अंतिम बार री-कारपेटिंग मार्च 2016 में की गई थी। दस साल से मरम्मत न होने के कारण रनवे के सभी निशान (Markings) फीके पड़ चुके थे और सतह पर ढीली बजरी दिखाई दे रही थी। रनवे 11 का एक सिरा ‘टेबल टॉप’ है, जो लैंडिंग को और अधिक चुनौतीपूर्ण बना देता है। इसके अतिरिक्त, एयरपोर्ट के चारों ओर कोई पुख्ता बाउंड्री वॉल नहीं है, और मौजूदा फेंसिंग पूरे परिसर को कवर नहीं करती, जो सुरक्षा के लिहाज से एक बड़ा जोखिम है।
रिपोर्ट में एक और चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि बारामती एयरपोर्ट के पास अपनी खुद की ARFF (एयरक्राफ्ट रेस्क्यू एंड फायर फाइटिंग) यूनिट नहीं है। चार्टर फ्लाइट्स के लिए नगर पालिका से एम्बुलेंस और दमकल गाड़ियां मंगवाई जाती हैं। साथ ही, वहां कोई स्थायी मौसम विभाग (MET) सुविधा भी मौजूद नहीं है। हवा की गति और तापमान जैसी महत्वपूर्ण जानकारी एक निजी एविएशन कंपनी के अस्थायी टावर में लगे उपकरणों के माध्यम से दी जाती है। रनवे 11 की ओर कोई ‘विंड सॉक्स’ (हवा की दिशा बताने वाला यंत्र) भी उपलब्ध नहीं था।
सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी डेटा के आधार पर रिपोर्ट में बताया गया है कि विमान रनवे 11 पर लैंड करने की कोशिश कर रहा था, लेकिन वह थ्रेशहोल्ड के बाईं ओर क्रैश-लैंड हुआ। जमीन से टकराने से पहले विमान दाईं ओर झुका हुआ था। वह पहले पेड़ों से टकराया और फिर जमीन पर गिर गया। क्रैश होते ही विमान में भीषण आग लग गई, जिससे कॉकपिट और केबिन सेक्शन पूरी तरह जलकर राख हो गए। अंतिम क्षणों में पायलट के मुख से “ओह शिट, ओह शिट” जैसे शब्द निकले, जो स्थिति की भयावहता को दर्शाते हैं।
अजित पवार की इस आकस्मिक मृत्यु ने महाराष्ट्र की राजनीति में कई संदेह पैदा किए हैं। शरद पवार गुट के विधायक रोहित पवार और राज ठाकरे जैसे नेताओं ने इस दुर्घटना की निष्पक्ष जांच की मांग की थी। AAIB की यह प्रारंभिक रिपोर्ट उन संदेहों को तकनीकी आधार प्रदान करती है कि क्या खराब बुनियादी ढांचा इस मौत का असली जिम्मेदार है। फिलहाल विस्तृत जांच जारी है, जिसमें इंजन फेलियर और मानवीय भूल के अन्य पहलुओं को भी खंगाला जाएगा।
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