@Thetasrget365 : उत्तराखंड के कोटद्वार में करीब 3 साल पुराने अंकिता भंडारी हत्याकांड में कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है। अदालत ने तीनों आरोपियों को दोषी पाया। अंकिता भंडारी का शव नहर से बरामद कर लिया गया है। कोटद्वार की अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने आज इस बहुचर्चित हत्याकांड में अपना फैसला सुनाया है। अदालत ने तीनों आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
उत्तराखंड के कोटद्वार में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने अंकिता हत्याकांड में तीन आरोपियों पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को दोषी ठहराया है। अदालत ने तीनों आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। लगभग दो वर्ष और आठ महीने तक चली सुनवाई के दौरान 47 गवाहों ने अदालत में गवाही दी। साथ ही, एसआईटी ने पूरे मामले में 97 गवाह पेश किए, जिनमें से केवल 47 महत्वपूर्ण गवाह ही अदालत में पेश किए गए।
इस हाई प्रोफाइल मामले को देखते हुए कोर्ट के आसपास के इलाके में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। इसके अलावा कोर्ट परिसर और आसपास के इलाकों में भी लोगों की भीड़ देखी जा रही है। इस कारण क्षेत्र में कड़े सुरक्षा उपाय किये गये हैं। अंकिता के परिवार की बात करें तो वे सभी आरोपियों के लिए मौत की सजा की मांग कर रहे थे।
अंकिता भंडारी हत्याकांड क्या है?
उत्तराखंड के ऋषिकेश के पास पौड़ी जिले के गंगाभोगपुर क्षेत्र में भनतंत्र रिजॉर्ट की 19 वर्षीय रिसेप्शनिस्ट अंकिता भंडारी की सितंबर 2022 में हत्या कर दी गई थी। अंकिता का शव घटना के एक सप्ताह बाद चीला नहर से बरामद किया गया था। इस मामले में पुलिस ने रिसॉर्ट मालिक पुलकित आर्य और उसके दो कर्मचारियों सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को गिरफ्तार किया है। जांच में पता चला कि आरोपियों ने अंकिता को चीला नहर में धक्का देकर मार डाला।
अंकित की हत्या का कारण रिसॉर्ट में वीआईपी लोगों को अतिरिक्त सेवाएं देने से इनकार करना बताया जा रहा है। इस घटना के बाद उत्तराखंड में व्यापक अशांति शुरू हो गई। इस हंगामे के बाद उत्तराखंड सरकार ने जांच के लिए उप महानिरीक्षक पी. रेणुका देवी के नेतृत्व में एक विशेष जांच दल का गठन किया।
32 महीनों में क्या हुआ?
अंकिता की हत्या के बाद आरोपियों को 24 घंटे के भीतर जेल भेज दिया गया और वे अभी भी जेल में हैं। अंकिता भंडारी हत्याकांड की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया था। इसके अलावा आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत भी मामला दर्ज किया गया है। धामी सरकार ने अंकिता भंडारी के परिवार को 25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की है।
पूरे मामले में 500 पन्नों का आरोपपत्र दाखिल किया गया है। अंकिता के परिवार के अनुरोध पर सरकारी वकील तीन बार बदला गया। इसके साथ ही अंकिता के भाई और उसके पिता को सरकारी नौकरी दी गई। अदालत में सरकारी वकील की मजबूत पैरवी के कारण आरोपी की जमानत अर्जी हर बार खारिज कर दी गई।
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