MVA EC Complaint: महाराष्ट्र में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले महाविकास अघाड़ी (MVA) ने वोटर लिस्ट में गड़बड़ी और ‘वोट चोरी’ का गंभीर आरोप लगाया है। मनसे प्रमुख राज ठाकरे सहित MVA के वरिष्ठ नेताओं ने बुधवार को मुंबई में राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी से मुलाकात कर आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई। MVA नेताओं का दावा है कि राज्य के कई जिलों में एक वोटर का नाम कई बूथों और तहसीलों में दर्ज है, जो चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
‘बोगस वोट ही महायुति को जिताते हैं’
एनसीपी (शरद पवार) गुट के नेता जितेंद्र अहवाड़ ने इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि उन्हें कई जिलों से शिकायतें मिली हैं, जहां एक ही घर में चार वोटर रहते हैं, लेकिन लिस्ट में चार से ज्यादा लोगों के नाम दर्ज हैं। उन्होंने लातूर और नांदेड़ सहित विभिन्न जिलों के प्रमाण दिखाते हुए कहा, “ये बोगस वोट ही महायुति (NDA) को जिताते हैं।”
अहवाड़ ने बीजेपी पर तंज कसते हुए आगे कहा कि जब महाराष्ट्र में हर सिस्टम को ‘सेट’ किया जा रहा है, तो एसआईटी का भी क्या फायदा।
MVA के सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग से मांग की है कि:
- वोटर लिस्ट में गड़बड़ियों और ‘वोट चोरी’ के आरोपों की गहन जांच की जाए।
- चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।
- स्थानीय निकाय चुनावों को पूरी तरह से निष्पक्ष तरीके से कराया जाए।
31 जुलाई की कट-ऑफ डेट पर आपत्ति
MVA नेताओं ने चुनाव आयोग को बताया कि उन्होंने 2024 के विधानसभा चुनावों से पहले भी आयोग को पत्र लिखकर शिकायत की थी कि बीजेपी वोटर लिस्ट में लोगों के नाम जोड़ रही है। उस समय भी MVA ने मांग की थी कि जब तक ये खामियां दूर नहीं हो जातीं, चुनाव नहीं कराए जाने चाहिए।
प्रतिनिधिमंडल ने 31 जुलाई की कट-ऑफ डेट पर भी आपत्ति जताई। वर्तमान नियम के अनुसार, 31 जुलाई तक 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले लोगों को ही वोट देने की अनुमति होगी। MVA ने कहा कि उन्हें यह अंतिम तारीख मंजूर नहीं है, और इसमें बदलाव की आवश्यकता है।
जितेंद्र अहवाड़ ने बताया कि जब सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल चुनाव आयोग से मिलने गया, तो उन्होंने बीजेपी नेताओं को भी बैठक में शामिल होने के लिए बुलाया था, लेकिन वे इस महत्वपूर्ण बैठक में शामिल नहीं हुए।
MVA के इन आरोपों ने महाराष्ट्र की राजनीति में भूचाल ला दिया है और आगामी चुनावों से पहले चुनाव आयोग पर वोटर लिस्ट की खामियों को दूर करने और चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनाए रखने का बड़ा दबाव आ गया है।
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