Alwaleed death news : सऊदी अरब के ‘सोते हुए राजकुमार’ के नाम से जाने जाने वाले अलवलीद बिन खालिद बिन तलाल अल सऊद का शनिवार को निधन हो गया। वे पिछले 20 वर्षों से कोमा में थे। इस दौरान शाही परिवार और विशेष रूप से उनके पिता खालिद बिन तलाल ने उन्हें बचाने के लिए किसी भी तरह की कोशिश में कोई कसर नहीं छोड़ी, लेकिन अंततः किस्मत के आगे सब बेबस रह गए।
अलवलीद मात्र 18 वर्ष के थे जब 2005 में रियाद में एक सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उनके मस्तिष्क को गहरी चोट पहुंची और तब से वे कोमा में चले गए।डॉक्टरों ने शुरू में उपचार की कोशिश की, लेकिन धीरे-धीरे यह स्पष्ट हो गया कि दिमाग को हुए नुकसान की भरपाई संभव नहीं है। इसके बाद से वे जीवन रक्षक प्रणाली पर निर्भर हो गए।
20 वर्षों तक उनके इलाज और देखभाल में अकल्पनीय धन खर्च किया गया। लेकिन सभी प्रयास नाकाम रहे। उन्हें सऊदी अरब का “सोता हुआ राजकुमार” कहा जाने लगा, और उनका नाम कोमा में सबसे लंबे समय तक रहने वाले व्यक्तियों में शुमार हो गया।
राजकुमार अलवलीद के पिता, खालिद बिन तलाल, अंत तक अपने बेटे के ठीक होने की उम्मीद करते रहे। उन्होंने डॉक्टरों के बार-बार कहने के बावजूद उन्हें जीवन रक्षक प्रणाली से हटाने की अनुमति नहीं दी। “एक चमत्कार होगा,” यह विश्वास उन्होंने कभी नहीं छोड़ा।पिछले महीने, ईद-उल-अजहा के अवसर पर खालिद अपने अन्य बेटों के साथ अस्पताल पहुंचे थे। उन्होंने वहां अपने कोमा में पड़े बेटे से मिलने और उसके लिए प्रार्थना की थी।
हालाँकि 2022 में डॉक्टरों ने साफ कर दिया था कि अलवलीद के ठीक होने की कोई संभावना नहीं है, लेकिन शाही परिवार ने उन्हें उसी देखभाल और सम्मान के साथ रखा, मानो वे कभी भी जाग सकते हैं। अंत में, 20 जुलाई को, 38 वर्ष की उम्र में, ‘सोता हुआ राजकुमार’ इस दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह गया।
अलवलीद बिन खालिद का अंतिम संस्कार रविवार को किया जाएगा। उनके महल अल-फकीह जिले में आम नागरिकों और शुभचिंतकों को 23 जुलाई के बाद अंतिम दर्शन की अनुमति दी जाएगी। पुरुष और महिलाएं अलग-अलग समय पर राजकुमार को श्रद्धांजलि दे सकेंगे।
राजकुमार की मृत्यु की जानकारी उनके पिता खालिद बिन तलाल ने दी। उन्होंने एक भावुक शोक संदेश में कहा:
“हमने उसे 20 साल तक ज़िंदा रखने की पूरी कोशिश की। वह मेरी उम्मीदों का केंद्र था। लेकिन अल्लाह की मर्ज़ी के आगे कोई कुछ नहीं कर सकता।”
राजकुमार अलवलीद की मौत के बाद सऊदी अरब और अन्य अरब देशों के शाही परिवारों व नागरिकों ने सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि व्यक्त की।
“सोता हुआ राजकुमार” न केवल चिकित्सा जगत में एक रहस्य और चमत्कार का प्रतीक बन गया था, बल्कि आम जनता के लिए एक भावना और उम्मीद भी था।
20 साल तक कोमा में रहने वाले अलवलीद के जीवन ने यह सवाल छोड़ दिया कि कभी-कभी विज्ञान और चिकित्सा की सीमाएं क्या होती हैं?
कभी कभी आशा की लौ कितनी दूर तक जल सकती है? राजकुमार के पिता की अविचल आस्था और अथक प्रयासों ने यह दिखाया कि परिवार का प्यार किसी भी हालात में हार नहीं मानता, चाहे नतीजा कुछ भी हो।
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