Ambikapur Atal Awas
Ambikapur Awas: छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर शहर में आवास योजना के तहत मकानों के आवंटन को लेकर शुरू हुआ विवाद अब एक बड़े जन-आंदोलन का रूप ले चुका है। सोमवार को शहर की सड़कों पर भारी गहमागहमी देखी गई, जब ‘सरगुजा बचाव संघर्ष समिति’ के बैनर तले सैकड़ों स्थानीय निवासियों ने एकजुट होकर नगर निगम के प्रशासनिक भवन का घेराव किया। प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व कर रहे स्थानीय नेताओं और नागरिकों ने निगम प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस घेराव ने नगर निगम के कामकाज को घंटों बाधित रखा और प्रशासन को रक्षात्मक मुद्रा में ला खड़ा किया।
विवाद की मुख्य जड़ सुभाष नगर में स्थित आवास योजना के मकानों का आवंटन है। प्रदर्शनकारियों का सीधा और गंभीर आरोप है कि इस पूरी आवंटन प्रक्रिया में भारी अनियमितताएं बरती गई हैं। समिति के सदस्यों का कहना है कि जो लोग वर्षों से शहर के मूल निवासी हैं और झुग्गी-झोपड़ियों में रहकर पक्के मकान का सपना देख रहे थे, उन्हें सूची से बाहर कर दिया गया है। इसके विपरीत, रसूखदारों और कथित तौर पर बाहरी लोगों को नियमों को ताक पर रखकर मकान आवंटित कर दिए गए हैं। इस पक्षपातपूर्ण रवैये ने स्थानीय गरीब तबके में असुरक्षा और ठगे जाने की भावना पैदा कर दी है।
प्रदर्शन के दौरान संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने नगर निगम की चयन प्रक्रिया पर तीखे सवाल उठाए। उनका आरोप है कि हितग्राहियों की सूची तैयार करते समय न तो किसी पारदर्शी मानक का पालन किया गया और न ही धरातल पर जाकर सर्वे किया गया। प्रदर्शनकारियों के अनुसार, पूरी प्रक्रिया में भ्रष्टाचार की बू आ रही है और बिचौलियों के माध्यम से अपात्र लोगों के नाम सूची में शामिल किए गए हैं। जनता का कहना है कि सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक पहुँचाने के बजाय, इसे राजनीतिक और व्यक्तिगत लाभ का जरिया बना लिया गया है।
घेराव के दौरान समिति ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि वे केवल खोखले आश्वासनों से संतुष्ट नहीं होंगे। उनकी मुख्य मांगों में एक उच्च स्तरीय जांच समिति का तत्काल गठन, वर्तमान आवंटन सूची को रद्द करना और नए सिरे से पात्र हितग्राहियों की पहचान करना शामिल है। पदाधिकारियों ने कहा कि यदि सरकार और प्रशासन ने दोषियों की पहचान कर उन पर कड़ी कार्रवाई नहीं की, तो आने वाले दिनों में यह आंदोलन केवल नगर निगम तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे जिले में चक्का जाम और उग्र प्रदर्शन किया जाएगा।
हंगामे और भीड़ की उग्रता को देखते हुए मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। प्रशासनिक अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों के बीच पहुँचकर उन्हें शांत कराने की कोशिश की। नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारियों ने ज्ञापन स्वीकार करते हुए भरोसा दिलाया कि प्राप्त शिकायतों की बिंदुवार जांच की जाएगी और यदि कहीं भी नियमों का उल्लंघन पाया गया, तो आवंटन निरस्त करने में देरी नहीं की जाएगी। हालांकि, प्रदर्शनकारी अपनी मांग पर अड़े रहे और स्पष्ट किया कि जब तक जमीनी स्तर पर बदलाव नहीं दिखता, उनका विरोध जारी रहेगा।
इस पूरे घटनाक्रम ने अंबिकापुर नगर निगम की कार्यप्रणाली और उसकी निष्पक्षता पर बड़े सवालिया निशान लगा दिए हैं। एक तरफ शहर ‘स्वच्छता’ में कीर्तिमान स्थापित कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ ‘आवास’ जैसी मूलभूत जरूरत में भ्रष्टाचार के आरोप इसकी छवि को धूमिल कर रहे हैं। अब सबकी निगाहें प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं कि क्या वह वाकई पारदर्शिता के साथ पात्र लोगों को उनका हक दिला पाएगा या यह मामला ठंडे बस्ते में चला जाएगा। शहर का सियासी पारा फिलहाल सातवें आसमान पर है।
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