Ambikapur Bulldozer Action
Ambikapur Bulldozer Action : छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले से अतिक्रमण के खिलाफ एक बड़ी खबर सामने आई है। शुक्रवार की अलसुबह अंबिकापुर विकासखंड के खैरबार स्थित महामाया पहाड़ डबरीपानी क्षेत्र में प्रशासन ने शासकीय वन भूमि पर किए गए अवैध कब्जों को हटाने के लिए व्यापक अभियान चलाया। सुबह करीब 6 बजे जब लोग सोकर उठे ही थे, तब वन विभाग, पुलिस और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम भारी लाव-लश्कर के साथ मौके पर पहुंची। इस अचानक हुई कार्रवाई से पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया। सुरक्षा के मद्देनजर प्रशासन ने पूरे इलाके को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया था, ताकि किसी भी संभावित विरोध को समय रहते नियंत्रित किया जा सके।
जानकारी के मुताबिक, वन विभाग ने इस कार्रवाई से पहले कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए 39 कब्जाधारियों को बेदखली का अंतिम नोटिस जारी किया था। गुरुवार की रात को भी विभाग की टीम ने घर-घर जाकर नोटिस चस्पा किए थे और कब्जा खाली करने की आखिरी चेतावनी दी थी। हालांकि, कुछ लोगों ने न्यायालय की शरण लेकर स्थगन आदेश (स्टे) प्राप्त कर लिया था, जिसके कारण उन विशेष निर्माणों को फिलहाल छोड़ दिया गया है। लेकिन जिन लोगों के पास कोई कानूनी दस्तावेज या स्टे नहीं था, उनके लगभग 20 पक्के और कच्चे मकानों को चार बुलडोजरों की मदद से ढहाने की कार्रवाई शुरू की गई।
प्रशासनिक अमले ने कार्रवाई के दौरान संवेदनशीलता बरतने की भी कोशिश की। बुलडोजर चलाने से पहले लाउडस्पीकर के माध्यम से लगातार घोषणाएं की गईं, जिसमें निवासियों से अपना कीमती सामान, दस्तावेज और मवेशी घर से बाहर निकालने की अपील की गई। प्रशासनिक अधिकारियों की निगरानी में लोगों को सामान सुरक्षित हटाने का पर्याप्त समय दिया गया, जिसके बाद अवैध ढांचों को ध्वस्त करने की प्रक्रिया शुरू हुई। मौके पर मौजूद अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक संपत्तियों की सुरक्षा सर्वोपरि है और इसके लिए कड़े कदम उठाना अनिवार्य हो गया था।
डबरीपानी का यह क्षेत्र शहर के काफी करीब है और सामरिक व पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण महामाया पहाड़ का हिस्सा है। बताया जा रहा है कि पिछले कई वर्षों से यहां बाहरी जिलों और क्षेत्रों से आए लोगों ने वन विभाग की कीमती जमीन पर अवैध रूप से कब्जा कर बस्तियां बसा ली थीं। इस गंभीर मुद्दे को लेकर वरिष्ठ भाजपा नेता और पार्षद आलोक दुबे ने कड़ा रुख अपनाया था। उनके द्वारा की गई निरंतर शिकायतों और साक्ष्यों के आधार पर ही जिला प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से लिया और अतिक्रमणकारियों के खिलाफ ठोस कार्ययोजना तैयार की।
वन विभाग की एसडीओ स्वेता कामभोज ने मीडिया से चर्चा के दौरान बताया कि सरकारी जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराना विभाग की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि कब्जाधारियों को पर्याप्त समय और वैधानिक नोटिस दिए गए थे, लेकिन निर्देशों की अवहेलना के चलते बुलडोजर कार्रवाई ही एकमात्र विकल्प बचा था। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि वन संपदा और शासकीय भूमि पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आने वाले दिनों में जिले के अन्य क्षेत्रों में भी ऐसे चिन्हित अतिक्रमणों के खिलाफ बेदखली की कार्रवाई निरंतर जारी रहेगी।
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