अंबिकापुर@thetarget365 नगर निगम अंबिकापुर का वर्तमान परिषद का कार्यकाल मंगलवार, 7 जनवरी को समाप्त हो गया। अब बुधवार, 8 जनवरी से कलेक्टर विलास भोसकर प्रशासक के रूप में निगम का कामकाज संभालेंगे। राज्य सरकार ने अंबिकापुर सहित प्रदेश के 10 नगर निगमों के लिए प्रशासक नियुक्त किए हैं।
कार्यकाल के अंतिम दिन महापौर डा अजय तिर्की, लोक निर्माण विभाग के प्रभारी शफी अहमद व जल प्रदाय शाखा के प्रभारी द्वितेंद्र मिश्रा ने पिछले पांच वर्षों में नगर निगम क्षेत्र में हुए कार्यों के अलावा आगामी चुनाव को लेकर कांग्रेस की तैयारियों के संबंध में संयुक्त रुप से पत्रकारों से चर्चा की।
महापौर डा अजय तिर्की ने स्वीकार किया कि पिछले पांच वर्षों के कार्यकाल में नगर निगम अंबिकापुर को उतना फंड नहीं मिला जो पूर्व मुख्यमंत्री डा रमन सिंह के कार्यकाल में मिला था। महापौर डा तिर्की पिछले पांच वर्षों के कार्यकाल से संतुष्ट तो हैं लेकिन अफसोस इस बात का है कि ट्रांसपोर्ट नगर का काम नहीं हो सका जबकि इसकी शुरुआती प्रक्रिया भाजपा शासनकाल में कई वर्ष पहले हुई थी।
महापौर डा अजय तिर्की ने बताया कि शहर की सड़कों को लेकर कुछ दिक्कतें थी जो अब दूर हो जाएगी। 38 करोड़ रुपये की लागत से निगम की सड़कों का डामरीकरण और अधोसंरचना विकास का काम एक माह में पूरा हो जाएगा। शहर से बाहर सब्जी मंडी बनकर तैयार है। सड़क निर्माण के लिए कार्यादेश जारी हो चुका है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सेंट्रल लाइब्रेरी की घोषणा की थी। इसके लिए 100 करोड़ स्वीकृत हो चुका है। सेंट्रल लाइब्रेरी का निर्माण होने से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को सीधा लाभ होगा। डाइट के नजदीक भवन में इसकी शुरुआत होगी। निगम का प्रशासनिक भवन बनकर तैयार है। गौरव पथ, नवागढ़ में वृहद सामुदायिक भवनों के अलावा छोटे शादी घरों का निर्माण करा निम्न व मध्यम आय वाले परिवारों की सुविधाओं का भी ध्यान रखा गया है। निगम में लंबीत पड़े अनुकंपा नियुक्ति तथा समयमान वेतनमान का लाभ देने की प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है।
महापौर डा अजय तिर्की ने कहा कि इसी कार्यकाल में काम करने की तो और इच्छा थी लेकिन फंड की कमी से सोच के अनुरूप कुछ काम नहीं हो सके। सभी पार्षदों, अधिकारियों-कर्मचारियों तथा शहरवासियों के साथ मिलकर बेहतर कार्य करने का प्रयास किया गया। महापौर ने कहा कि फंड की व्यवस्था के लिए हमारे ओर से किसी प्रकार की कोई कमी नहीं रखी गई थी। तेजी से विकसित हो रहे शहर के भीतरी क्षेत्र में जाम और यातायात की समस्या को लेकर उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि शहर को अब बाहर की ओर बढ़ना चाहिए।
शफी अहमद ने कहा कि जब निगम में भाजपा की सरकार थी तब 2200 रुपये की सड़क बत्ती 7200 रुपये में खरीदी जाती थी। लार्वाहिट और मैलाथियान की खरीदी चार गुना अधिक दर पर की जाती थी। हमें संतुष्टि है कि आज तक निगम में सत्तासीन कांग्रेस पर ऐसे एक भी आरोप नहीं लगे और न ही कोई प्रमाण ही प्रस्तुत किया जा सका।
शफी अहमद ने उम्मीद जताई कि शहर की जनता का आशीर्वाद एक बार फिर से कांग्रेस को निश्चित रूप से मिलेगा। उन्होंने कहा कि शहर की सड़कों के लिए लगातार प्रयास हुआ। 74 सड़कों का निर्माण भी किया गया है। शहर में सड़कें सिर्फ नगर निगम की नहीं है, इसके बाद भी सभी सड़कों के लिए नगर निगम को जिम्मेदार ठहराना भी अनुचित है।
नगर निगम अंबिकापुर के जल प्रदाय शाखा के प्रभारी द्वितेंद्र मिश्रा ने कहा कि पिछले पांच वर्षों में अंबिकापुर शहर में पेयजल आपूर्ति को लेकर कहीं भी ज्यादा दिक्कत नहीं आई। पेयजल की व्यवस्था संतोषजनक रही। भौगोलिक कारणों से एक दो छोटे हिस्से को छोड़ दे तो समूचे शहर में पेयजल की आपूर्ति ठीक-ठाक रही। उन्होंने कहा कि पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंह देव ने शहरी पेयजल व्यवस्था में और सुधार के लिए 25 लाख रुपये दिए थे। इसके माध्यम से मोहल्ले में जाकर पेयजल की आपूर्ति कराई गई।
द्वितेंद्र मिश्र ने बताया कि नगर निगम पानी बिल जमा करने के लिए अब मोर पानी एप लांच करने जा रहा है। आठ वार्डो के लिए यह बनकर तैयार हो गया है, इसके माध्यम से घर बैठे लोग बिजली बिल के समान पानी बिल का भी भुगतान कर सकेंगे। उन्होंने बताया कि बिजली बाधा के कारण कभी-कभी पेयजल आपूर्ति की व्यवस्था में दिक्कत आती है। बिजली बाधा से निपटने के लिए नगर निगम के पास सारे संसाधन उपलब्ध हैं लेकिन इनका उपयोग भी एक सीमित अवधि के लिए ही किया जा सकता है।
नगर निगम अंबिकापुर के लिए एक संयोग हैं कि प्रशासक के रूप में कामकाज देखने वाले कलेक्टर विलास भोसकर, यहां के आयुक्त भी रह चुके हैं। वर्ष 2011 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी विलास भोसकर वर्ष 2014 में प्रशिक्षु आइएएस के रूप में सरगुजा में अपनी सेवाएं दे चुके थे। उस दौरान विभिन्न पदों पर कार्य करने के साथ ही उन्होंने नगर निगम आयुक्त की जबाबदारी भी संभाली थी। अल्प अवधि के लिए ही निगम आयुक्त का कामकाज संभालने के दौरान उन्होंने शहरी व्यवस्थाओं में सुधार के साथ जनसुविधा विस्तार के कार्यों को गति दी थी।
नगर निगम की लचर कार्यशैली में गुणात्मक सुधार लाकर उन्होंने राजस्व संग्रहण में गति लाकर निगम कर्मचारियों में भी नए उत्साह का संचार किया था। लगभग 10 वर्ष बाद विलास भोसकर फिर प्रशासक के रूप में नगर निगम का कार्य देखेंगे।
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