Ambikapur News
Ambikapur News: छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग मुख्यालय अंबिकापुर में आयोजित हो रहे नेशनल ट्राइबल गेम्स (National Tribal Games) से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने खेल प्रेमियों और स्थानीय प्रशासन के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। शहर के प्रतिष्ठित गांधी स्टेडियम में जारी इन खेलों के दौरान आवारा कुत्तों के झुंड ने जिस तरह से उत्पात मचाया, उसने न केवल खिलाड़ियों की सुरक्षा को खतरे में डाला है, बल्कि आयोजन की भव्यता और दावों पर भी गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं। “खेलो इंडिया” जैसे बड़े अभियानों के बीच इस तरह की लापरवाही सिस्टम की खामियों को उजागर कर रही है।
अंबिकापुर का गांधी स्टेडियम इन दिनों राष्ट्रीय स्तर की खेल गतिविधियों का केंद्र बना हुआ है। यहाँ नेशनल ट्राइबल गेम्स के तहत देश के कोने-कोने से आए एथलीट अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं। हालांकि, प्रतियोगिता के दौरान मैदान के भीतर अचानक आवारा कुत्तों के घुस आने से अफरा-तफरी मच गई। स्थिति यह थी कि मैदान पर दौड़ रहे खिलाड़ी और उन्हें निर्देश दे रहे कोच खुद को असुरक्षित महसूस करने लगे। न केवल खिलाड़ी, बल्कि सुबह की सैर (Morning Walk) के लिए आने वाले स्थानीय नागरिक भी इन कुत्तों के आक्रामक व्यवहार से दहशत में दिखे।
इस राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के लिए देश के लगभग 30 अलग-अलग राज्यों से 150 से अधिक खिलाड़ी और उनके प्रशिक्षक अंबिकापुर पहुंचे हैं। किसी भी राज्य के लिए ऐसे आयोजन अपनी मेहमाननवाजी और सुव्यवस्थित बुनियादी ढांचे को प्रदर्शित करने का अवसर होते हैं। लेकिन स्टेडियम के भीतर सुरक्षा घेरे को तोड़कर कुत्तों का प्रवेश कर जाना यह बताता है कि जमीनी स्तर पर इंतजाम कितने खोखले हैं। बाहर से आए खिलाड़ियों के बीच शहर की छवि धूमिल हो रही है, क्योंकि उन्हें एक सुरक्षित और शांतिपूर्ण वातावरण देने के प्रशासनिक वादे पूरी तरह विफल साबित हुए हैं।
प्रशासन की इस उदासीनता पर स्थानीय लोगों का गुस्सा इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि शहर अभी एक बड़ी त्रासदी के सदमे से उबरा नहीं है। महज एक सप्ताह पहले ही अंबिकापुर के प्रसिद्ध संजय पार्क में आवारा कुत्तों ने बाड़े में घुसकर हमला किया था, जिसमें 15 मासूम हिरनों की मौत हो गई थी। वन्यजीवों की इतनी बड़ी संख्या में मौत के बाद उम्मीद की जा रही थी कि नगर निगम और जिला प्रशासन आवारा कुत्तों की समस्या को लेकर कोई ठोस कार्ययोजना बनाएगा। लेकिन खेल स्टेडियम की ताजा घटना ने स्पष्ट कर दिया है कि पुरानी घटनाओं से कोई सबक नहीं लिया गया है।
एक खेल स्टेडियम, जहाँ राष्ट्रीय स्तर के एथलीट मौजूद हों, वह एक संवेदनशील स्थान माना जाता है। वहां प्रवेश द्वारों पर सुरक्षाकर्मियों की तैनाती और चारदीवारी की मजबूती सुनिश्चित करना अनिवार्य है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि आवारा कुत्ते इतनी आसानी से मैदान तक पहुँच सकते हैं, तो अन्य सुरक्षा संबंधी चूक की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। खिलाड़ियों की शारीरिक सुरक्षा के साथ खिलवाड़ आयोजन की साख को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रभावित कर सकता है।
अब बड़ा सवाल यह उठता है कि आखिर प्रशासन जागने के लिए किस बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहा है? जब वीआईपी और खिलाड़ियों के लिए आरक्षित क्षेत्र ही सुरक्षित नहीं हैं, तो गलियों और मोहल्लों में रहने वाले आम शहरवासियों की सुरक्षा का क्या होगा? कुत्तों के काटने और रेबीज के बढ़ते मामलों के बीच शहर में डर का माहौल बना हुआ है। बुद्धिजीवियों और खेल प्रेमियों ने मांग की है कि आयोजन स्थल पर तत्काल सुरक्षा बढ़ाई जाए और आवारा कुत्तों की धरपकड़ के लिए एक विशेष अभियान चलाकर शहर को इस आतंक से मुक्त कराया जाए।
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