Ambikapur News:
Ambikapur News: अंबिकापुर में वरिष्ठ अधिवक्ता राजेश तिवारी और उनके परिवार के साथ पुलिस कर्मियों द्वारा की गई मारपीट और अभद्र व्यवहार ने पूरे अधिवक्ता समुदाय में गहरा आक्रोश उत्पन्न कर दिया है। अधिवक्ताओं का कहना है कि इस घटना ने न केवल एक परिवार को अपमानित किया है, बल्कि न्याय व्यवस्था की गरिमा को भी ठेस पहुंचाई है।
अधिवक्ता संघ, सरगुजा ने इस घटना को “निंदनीय, अमर्यादित और अधिवक्ताओं की प्रतिष्ठा पर सीधा प्रहार” बताते हुए कठोर शब्दों में निंदा की है। संघ का कहना है कि पुलिस का यह रवैया न्यायिक ढांचे को कमजोर करता है और कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाता है।सोमवार दोपहर 2 बजे बार रूम में संघ की एक आपात बैठक आयोजित की गई, जिसमें बड़ी संख्या में वरिष्ठ और कनिष्ठ दोनों ही स्तर के अधिवक्ता शामिल हुए। सभी सदस्यों ने सर्वसम्मति से घटना को बेहद चिंताजनक बताते हुए दोषी पुलिस कर्मियों पर तुरंत कार्रवाई की मांग की।
बैठक के बाद अधिवक्ताओं ने एक विशाल रैली निकाली और पुलिस अधीक्षक (SP) कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में आरोपित पुलिस कर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, निष्पक्ष जांच की व्यवस्था, पीड़ित परिवार को सुरक्षा और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने हेतु ठोस निर्देश जारी करने की मांग की गई। अधिवक्ताओं ने स्पष्ट कहा कि जब तक उचित कार्रवाई नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा।संघ ने बैठक में एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित करते हुए ऐलान किया कि दोषी पुलिसकर्मियों की किसी भी मुकदमे में सरगुजा बार का कोई भी अधिवक्ता पैरवी नहीं करेगा। संघ का कहना है कि यह निर्णय अधिवक्ताओं की एकजुटता और न्याय की गरिमा को बनाए रखने के लिए अत्यंत आवश्यक है।
पिछले कुछ वर्षों में अधिवक्ताओं पर बढ़ते हमलों को देखते हुए संघ ने राज्य और केंद्र सरकार को पत्र लिखकर “अधिवक्ता संरक्षण कानून” लागू करने की मांग करने का निर्णय भी लिया है। संघ का कहना है कि जब तक अधिवक्ताओं की सुरक्षा के लिए सशक्त कानून नहीं बनेगा, तब तक ऐसे हमलों की पुनरावृत्ति को रोक पाना कठिन होगा।
अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष अनिल सोनी ने घटना की निंदा करते हुए कहा, “यह हमला केवल राजेश तिवारी जी पर नहीं, बल्कि पूरे अधिवक्ता समाज पर हमला है। संघ उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है और अधिवक्ता सम्मान तथा न्याय को लेकर कोई समझौता नहीं किया जाएगा।”अधिवक्ता संघ ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन जल्द कार्रवाई नहीं करता तो संघ और अधिक उग्र आंदोलनात्मक कदम उठाने के लिए बाध्य होगा। संघ ने कहा कि किसी भी संभावित स्थिति की जिम्मेदारी प्रशासन की होगी, क्योंकि अधिवक्ता समाज अपने सम्मान और अधिकारों के लिए संघर्ष करने को तैयार है।
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