Ambikapur school notice
Ambikapur school notice : छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर जिले में शिक्षा विभाग ने निजी स्कूलों की मनमानी और अभिभावकों के आर्थिक शोषण के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) ने सीबीएसई (CBSE) से संबद्ध दो बड़े निजी स्कूलों को नियमों के उल्लंघन और अवैध वसूली के मामले में ‘कारण बताओ’ नोटिस जारी किया है। प्रशासन की इस अचानक हुई कार्रवाई से निजी स्कूल संचालकों में हड़कंप मच गया है, जबकि भारी-भरकम फीस और महंगी किताबों के बोझ तले दबे अभिभावकों ने राहत की सांस ली है।
जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा किए गए आकस्मिक निरीक्षण के दौरान शहर के दो प्रतिष्ठित संस्थानों—मोन्ट फोर्ड विद्यालय और बिरला ओपन माइंड अंतर्राष्ट्रीय विद्यालय—में गंभीर अनियमितताएं पाई गईं। जांच में यह सामने आया कि ये स्कूल एनसीईआरटी (NCERT) के बजाय निजी प्रकाशकों की अत्यधिक महंगी पुस्तकों का उपयोग कर रहे थे। यह कृत्य सीधे तौर पर ‘सीबीएसई एफिलिएशन बाय-लॉज 2018’ के क्लॉज 2.4.7 का उल्लंघन है। स्कूलों द्वारा निजी प्रकाशकों को बढ़ावा देना स्पष्ट रूप से कमीशनखोरी के गठजोड़ की ओर इशारा करता है, जिससे शिक्षा की लागत अनावश्यक रूप से बढ़ रही थी।
मोन्ट फोर्ड विद्यालय, सरगंवा के निरीक्षण में पाया गया कि स्कूल प्रबंधन द्वारा अभिभावकों को विशिष्ट दुकानों, जैसे “आशा बुक डिपो” और “राणा ब्रदर्स” से ही पूरी स्टेशनरी और किताबों का बंडल खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा था। स्कूल ने इसके लिए अभिभावकों को मोबाइल पर बाकायदा मैसेज भी भेजे थे। इसके अलावा, स्कूल हर साल अवैध रूप से एडमिशन फीस वसूल रहा था और सत्र 2026-27 के लिए 5% से 14% तक की भारी फीस वृद्धि भी की गई थी। स्कूल के सूचना पटल पर यूनिफॉर्म या पुस्तक सूची का कोई विवरण न होना भी जांच में सही पाया गया।
बिरला ओपन माइंड अंतर्राष्ट्रीय विद्यालय में भी स्थिति कुछ अलग नहीं थी। यहाँ “मेसर्स किताब घर” से बंडल खरीदने की बाध्यता पाई गई। स्कूल प्रबंधन फील्ड ट्रिप, वर्कशॉप और सेमिनार जैसे आयोजनों के नाम पर अभिभावकों से अवैध शुल्क वसूल रहा था। शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) 2009 के प्रावधानों के विरुद्ध जाते हुए, स्कूल द्वारा रजिस्ट्रेशन शुल्क और सुरक्षा निधि (Security Deposit) की वसूली की जा रही थी। साथ ही, यूनिफॉर्म को एक निश्चित दुकान से खरीदने के लिए दबाव बनाना भी स्कूल की कार्यप्रणाली का हिस्सा पाया गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला शिक्षा अधिकारी ने एक कड़ा और मिसाल कायम करने वाला प्रस्ताव तैयार किया है। प्रस्ताव के अनुसार, मोन्ट फोर्ड विद्यालय के 2,070 और बिरला ओपन माइंड विद्यालय के 864 छात्र-छात्राओं से वसूली गई कुल वार्षिक फीस का 50 प्रतिशत हिस्सा जुर्माने के रूप में वसूला जा सकता है। यह कदम अन्य स्कूलों के लिए एक चेतावनी है कि वे नियमों से ऊपर नहीं हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि शिक्षा को व्यापार बनाने की अनुमति किसी भी संस्थान को नहीं दी जाएगी।
शिक्षा विभाग ने दोनों स्कूलों के प्राचार्य और प्रबंधकों को अपना लिखित स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के लिए केवल दो दिनों का समय दिया है। यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर स्कूल संतोषजनक जवाब देने में विफल रहते हैं, तो उनकी मान्यता रद्द करने या भारी जुर्माना वसूलने की वैधानिक प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। प्रशासन ने अभिभावकों से भी अपील की है कि यदि कोई भी स्कूल उन पर किसी विशेष दुकान से सामान खरीदने या अवैध शुल्क देने का दबाव बनाता है, तो वे तुरंत विभाग में शिकायत दर्ज कराएं।
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