Ambikapur Raid
Ambikapur Raid: छत्तीसगढ़ में आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने रविवार की सुबह एक बड़े अभियान के तहत रायपुर, बिलासपुर, सरगुजा और कोंडागांव में कुल 20 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। शुरुआती जानकारी के अनुसार, यह कार्रवाई राज्य में हुए आबकारी और जिला खनिज निधि (DMF) घोटाले से जुड़ी है। अधिकारियों की अलग-अलग टीमें तड़के ही निर्धारित स्थानों पर पहुंच गईं और दस्तावेजों की जांच शुरू कर दी।
सरगुजा में EOW-ACB की संयुक्त टीम ने पशु चिकित्सक डॉ. तनवीर अहमद और सत्तीपारा रानी सत्ती कालोनी निवासी सप्लायर अमित अग्रवाल के आवास और कार्यालयों पर छापे मारे। बताया जा रहा है कि दोनों के नाम DMF फंड से जुड़े सप्लाई और खर्च के मामलों में सामने आए हैं। टीम ने सुबह से ही दोनों के ठिकानों को घेरकर महत्वपूर्ण दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड और लेनदेन से जुड़े कागजात खंगालने शुरू कर दिए।
राजधानी रायपुर में भी कार्रवाई जारी है। यहां EOW-ACB ने पूर्व आबकारी आयुक्त निरंजन दास के ठिकानों पर दबिश दी। घोटाले के जिस आबकारी हिस्से की जांच की जा रही है, उसमें निरंजन दास की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है। उनके आवास और अन्य संबद्ध स्थानों से टीमों ने वित्तीय दस्तावेज, नोट्स, फाइलें और लेन-देन का रिकॉर्ड जब्त करना शुरू कर दिया है।
सूत्रों के अनुसार, यह पूरी कार्रवाई पिछली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में हुए आबकारी और DMF घोटालों की जांच के तहत की जा रही है। सरकार बदलने के बाद इन मामलों की फाइलें दोबारा खोली गई थीं। EOW-ACB की टीमें अब इन घोटालों में संभावित वित्तीय अनियमितताओं, फर्जी खरीद, सप्लाई में हेराफेरी और गलत भुगतान जैसे आरोपों की गहन जांच कर रही हैं।
जानकारी के अनुसार, डॉ. तनवीर अहमद पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की सरकार के दौरान पशु चिकित्सा विभाग में उप संचालक थे। वे सरगुजा और बलरामपुर जिले में पदस्थ रहे, जहां DMF फंड का बड़े स्तर पर उपयोग होता रहा। आरोप है कि उनके कार्यकाल में कई ऐसी सप्लाई और खरीद प्रक्रियाएं हुईं जिन्हें नियमों के खिलाफ बताया जा रहा है। छापेमारी के दौरान टीम ने उनके घर व दफ्तर से दस्तावेज, मोबाइल डेटा, कंप्यूटर हार्ड डिस्क और फ़ाइलें जब्त की हैं।
सत्तीपारा निवासी सप्लायर अमित अग्रवाल का नाम भी DMF फंड से हुई सप्लाई और भुगतान की अनियमितताओं में सामने आया है। EOW-ACB की टीम उनके कारोबार से जुड़े ठिकानों पर चल रहे लेन-देन की जांच कर रही है। माना जा रहा है कि DMF के तहत कई सामग्री की आपूर्ति बिना उचित प्रक्रिया या अधिक दरों पर की गई थी, जिनकी पुष्टि के लिए दस्तावेज खंगाले जा रहे हैं।
सूत्रों द्वारा यह भी बताया गया है कि बलरामपुर जिले में छापे की खबर है, हालांकि अधिकृत पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है। जानकारी अनुसार जिले के राजपुर में एसीबी का छापा कारोबारी मनोज अग्रवाल, मुकेश अग्रवाल के घर पड़ा है। इनके भी तार DMF घोटाले से जुड़े हुए हैं।
वहीं, कोंडागांव और बिलासपुर में भी टीमें विभिन्न जगहों पर लगातार दस्तावेजों की जांच में जुटी हुई हैं। 23 नवंबर की सुबह से शुरू हुई इस व्यापक कार्रवाई को राज्य में अब तक की सबसे बड़ी संयुक्त छापेमार कार्रवाईयों में से एक माना जा रहा है। EOW-ACB का कहना है कि दस्तावेजों की प्राथमिक जांच के बाद आवश्यकतानुसार आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। राज्य में इन घोटालों की गूंज राजनीति में भी जारी है और आने वाले दिनों में कई बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
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