Ambikapur: छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर शहर के चोपड़ापारा स्थित स्वरंग किड्स एकेडमी के खिलाफ स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा की गई हालिया कार्रवाई ने तूल पकड़ लिया है। इस मामले में सामाजिक कार्यकर्ता कैलाश मिश्रा ने मोर्चा खोलते हुए विभाग की कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा किया है। उन्होंने इस कार्रवाई को पूरी तरह से एकतरफा और किसी बाहरी दबाव में लिया गया निर्णय करार दिया है। मिश्रा का तर्क है कि विभाग ने बिना किसी ठोस आधार के एक ऐसे संस्थान पर कठोर प्रहार किया है, जो क्षेत्र में शिक्षा और देखभाल की दिशा में सकारात्मक कार्य कर रहा था।

आवेदन पर 10 महीनों की चुप्पी: विभाग की सुस्ती पर गंभीर आरोप
कैलाश मिश्रा द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, स्कूल प्रबंधन ने नियमों का पालन करते हुए 5 जून 2025 को जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कार्यालय में मान्यता और मार्गदर्शन के लिए विधिवत आवेदन जमा किया था। आश्चर्यजनक रूप से, शिक्षा विभाग ने इस आवेदन पर लगभग 10 महीनों तक कोई संज्ञान नहीं लिया और न ही प्रबंधन को किसी प्रकार का निर्देश दिया। मिश्रा ने सवाल उठाया है कि जब विभाग ने स्वयं 10 महीनों तक आवेदन को लंबित रखा, तो अब अचानक स्कूल संचालन स्थगित करने और एक लाख रुपये का भारी-भरकम अर्थदंड लगाने का औचित्य क्या है?
जांच रिपोर्ट और सरकारी आदेश में विरोधाभास: पारदर्शिता पर संशय
इस विवाद का एक और महत्वपूर्ण पहलू जांच प्रतिवेदन और जारी किए गए आधिकारिक आदेश के बीच का अंतर है। कैलाश मिश्रा ने आरोप लगाया कि विभाग द्वारा जारी आदेश में यह दावा किया गया है कि स्कूल प्रबंधन ने अपनी कमियाँ स्वीकार कर ली हैं, जबकि वास्तविकता इसके विपरीत है। उनके अनुसार, विभाग की अपनी जांच रिपोर्ट में स्कूल की अधोसंरचना (Infrastructure), शिक्षकों की उपलब्धता और बच्चों की देखभाल से जुड़ी व्यवस्थाओं को “बेहतर और संतोषजनक” बताया गया है। ऐसे में यह सवाल गहराता जा रहा है कि यदि व्यवस्थाएं उचित थीं, तो फिर सजा किस बात की दी जा रही है?
प्रक्रियागत खामियाँ: कलेक्टर के अनुमोदन के बिना हुई कार्रवाई का दावा
सामाजिक कार्यकर्ता ने पूरे प्रकरण में प्रशासनिक प्रक्रिया के उल्लंघन का भी दावा किया है। उनका कहना है कि इतनी बड़ी कार्रवाई के लिए जिला कलेक्टर का अनुमोदन अनिवार्य होता है, लेकिन स्वरंग किड्स एकेडमी के मामले में ऐसा नहीं किया गया। कैलाश मिश्रा ने मांग की है कि पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि विभाग ने किस आधार पर नियमों को दरकिनार कर यह आदेश जारी किया। उन्होंने विभाग से यह भी पूछा है कि 10 महीनों तक आवेदन पर निर्णय न लेने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या कार्रवाई की जाएगी?
अभिभावकों की बढ़ी मुश्किलें: डे-केयर सेंटर बंद होने से गहराया संकट
स्वरंग किड्स एकेडमी केवल एक शैक्षणिक संस्थान ही नहीं, बल्कि एक डे-केयर सेंटर के रूप में भी अपनी सेवाएं दे रहा था। यहाँ शहर के कामकाजी अभिभावक अपने बच्चों को सुरक्षित वातावरण में छोड़कर अपने कार्यालय जाते थे। अचानक स्कूल बंद होने और संचालन स्थगित होने से उन दर्जनों परिवारों के सामने संकट खड़ा हो गया है जिनके पास बच्चों की देखभाल का कोई दूसरा विकल्प नहीं है। कैलाश मिश्रा ने कहा कि इस निर्णय ने न केवल एक संस्थान को प्रभावित किया है, बल्कि उन अभिभावकों की दिनचर्या और बच्चों के भविष्य को भी अधर में लटका दिया है।
निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग
कैलाश मिश्रा ने प्रशासन से इस मामले पर पुनर्विचार करने और निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि शिक्षा विभाग को दंडात्मक रवैया अपनाने के बजाय मार्गदर्शन की भूमिका निभानी चाहिए थी, विशेषकर तब जब प्रबंधन स्वयं मार्गदर्शन के लिए आवेदन कर चुका था। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि इस प्रकार की एकतरफा कार्रवाइयों पर रोक नहीं लगाई गई, तो इससे शिक्षा के क्षेत्र में काम करने वाले संस्थानों का मनोबल टूटेगा और अंततः बच्चों का ही नुकसान होगा। अब देखना यह है कि प्रशासन इस विरोध के बाद क्या कदम उठाता है।


















