Ambikapur Crime
Ambikapur Crime: छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर जिले से दिल दहला देने वाली एक वारदात सामने आई है। शहर के कोतवाली थाना क्षेत्र में महज पैसों के विवाद को लेकर कुछ युवकों ने एक 25 वर्षीय युवक की बेरहमी से हत्या कर दी। इस जघन्य अपराध ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। हालांकि, अंबिकापुर पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए घटना के मात्र 24 घंटे के भीतर ही मुख्य आरोपियों को सलाखों के पीछे पहुँचा दिया है।
पूरी घटना ग्राम भकुरा की है, जहाँ मृतक सुटुल (25 वर्ष) और आरोपियों के बीच पैसों के लेन-देन को लेकर लंबे समय से तनातनी चल रही थी। पुलिस जांच के अनुसार, 3 मार्च की रात यह विवाद इतना बढ़ गया कि आरोपियों ने अपना आपा खो दिया। गाली-गलौज से शुरू हुई बात मारपीट तक जा पहुँची। आरोपियों ने सुटुल को घेर लिया और उस पर लात-घूंसों व डंडों से हमला कर दिया। गंभीर चोटें आने के कारण सुटुल ने मौके पर ही दम तोड़ दिया, जिसके बाद आरोपी उसे खून से लथपथ हालत में छोड़कर फरार हो गए।
4 मार्च की सुबह जब पुलिस को सुटुल की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत की सूचना मिली, तो कोतवाली थाना अंबिकापुर में तत्काल मर्ग कायम किया गया। थाना प्रभारी निरीक्षक शशिकांत सिन्हा के नेतृत्व में पुलिस टीम ने घटनास्थल का सूक्ष्म निरीक्षण किया। पंचनामा और गवाहों के बयान दर्ज करने के बाद यह साफ हो गया कि यह कोई सामान्य मौत नहीं बल्कि सुनियोजित हत्या है। साक्ष्यों ने इशारा किया कि आरोपियों ने बांस के डंडों का इस्तेमाल कर युवक को तब तक पीटा जब तक उसकी जान नहीं निकल गई।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर एक विशेष टीम गठित की गई। पुलिस ने मुखबिरों के जाल और तकनीकी इनपुट के आधार पर संदिग्धों की तलाश शुरू की। कड़ी मशक्कत के बाद, वारदात के 24 घंटे बीतने से पहले ही पुलिस ने तीन आरोपियों को दबोच लिया। पकड़े गए आरोपियों में अजय पैकरा उर्फ जर्रा (19 वर्ष) और छत्रपाल (20 वर्ष) शामिल हैं। इसके अलावा, इस हत्याकांड में एक विधि से संघर्षरत बालक (नाबालिग) की संलिप्तता भी पाई गई है।
पुलिस की कड़ी पूछताछ में आरोपियों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है। उनकी निशानदेही पर पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल किया गया बांस का डंडा बरामद कर लिया है। इसके अतिरिक्त, आरोपी अजय पैकरा के वे कपड़े भी जब्त किए गए हैं, जिन्हें उसने वारदात के समय पहन रखा था और जिन पर खून के धब्बे होने की आशंका है। आरोपियों ने बताया कि उन्होंने आवेश में आकर इस घटना को अंजाम दिया, लेकिन कानून की नजर में यह एक सोची-समझी हत्या का मामला बन गया है।
अंबिकापुर पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103 (हत्या) और 3(5) के तहत मामला पंजीकृत किया है। गिरफ्तार किए गए बालिग आरोपियों, अजय और छत्रपाल को न्यायालय में पेश किया गया, जहाँ से उन्हें जेल भेज दिया गया है। वहीं, मामले में शामिल नाबालिग को किशोर न्याय बोर्ड (Juvenile Justice Board) के समक्ष प्रस्तुत किया गया है। पुलिस अब मामले की चार्जशीट तैयार करने में जुटी है ताकि दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिल सके।
इस सफल कार्रवाई में थाना प्रभारी शशिकांत सिन्हा, सहायक उप निरीक्षक उमाशंकर पाण्डेय और उनकी टीम के आरक्षक मंटू गुप्ता, शिव राजवाड़े, प्रमोद टेटे और अमर सिंह की महत्वपूर्ण भूमिका रही। समय पर आरोपियों की गिरफ्तारी होने से इलाके में व्याप्त जनाक्रोश शांत हुआ है। पुलिस ने एक बार फिर साबित किया है कि अपराधियों के लिए समाज में कोई जगह नहीं है और कानून के हाथ उन तक पहुँचने में देर नहीं लगाते।
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