Jaggi Murder Case
Jaggi Murder Case : छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित राम अवतार जग्गी हत्याकांड में एक नया कानूनी मोड़ आ गया है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट द्वारा दोषी ठहराए जाने के बाद, पूर्व विधायक अमित जोगी ने न्याय के लिए देश की सर्वोच्च अदालत का दरवाजा खटखटाया है। अमित जोगी ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दाखिल की है, जिस पर सोमवार को सुनवाई होने की प्रबल संभावना है। जोगी का यह कदम हाईकोर्ट के उस कड़े फैसले के बाद आया है, जिसने दो दशक पुराने इस मामले में उनकी मुश्किलों को एक बार फिर बढ़ा दिया है।
बीते गुरुवार को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने इस मामले में एक युगांतकारी निर्णय सुनाया। माननीय न्यायालय ने निचली अदालत (ट्रायल कोर्ट) के उस पुराने फैसले को पलट दिया, जिसमें अमित जोगी को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया गया था। हाईकोर्ट ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) द्वारा प्रस्तुत की गई 11,000 पन्नों की विस्तृत चार्जशीट और पुख्ता सबूतों को आधार मानते हुए अमित जोगी को हत्या की साजिश का दोषी करार दिया। अदालत ने उन्हें कड़ी फटकार लगाते हुए तीन सप्ताह के भीतर संबंधित अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण (सरेंडर) करने का सख्त आदेश दिया है।
यह पूरा मामला 4 जून 2003 का है, जिसने तत्कालीन छत्तीसगढ़ की राजनीति में भूचाल ला दिया था। रायपुर में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के तत्कालीन कोषाध्यक्ष राम अवतार जग्गी की सरेराह गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। सीबीआई की जांच में यह सनसनीखेज खुलासा हुआ कि यह केवल एक आपराधिक कृत्य नहीं, बल्कि एक गहरी राजनीतिक साजिश थी। जांच रिपोर्ट के अनुसार, राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के चलते सुपारी देकर शूटरों को जग्गी की हत्या के काम पर लगाया गया था। इस हत्याकांड ने राज्य की कानून-व्यवस्था और राजनीतिक शुचिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे।
जग्गी हत्याकांड की जांच के दौरान खाकी भी दागदार हुई थी। कुछ पुलिस अधिकारियों पर साक्ष्य मिटाने, जांच को गुमराह करने और फर्जी गवाह खड़े करने के गंभीर आरोप लगे थे। वर्ष 2007 में एक विशेष अदालत ने इस मामले में कुल 28 आरोपियों को दोषी पाते हुए सजा सुनाई थी, लेकिन तब अमित जोगी को ‘संदेह का लाभ’ देते हुए बरी कर दिया गया था। इसके बाद जग्गी परिवार ने हार नहीं मानी और न्याय के लिए लंबी लड़ाई लड़ी। नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद हाईकोर्ट में पुनः सुनवाई हुई, जिसका परिणाम जोगी की दोषसिद्धि के रूप में सामने आया।
हाईकोर्ट के फैसले के बाद अमित जोगी ने अपनी पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया में गहरा खेद व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि उनके साथ पूर्ण न्याय नहीं हुआ है और वे हाईकोर्ट के निष्कर्षों से असहमत हैं। जोगी ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “मैं न्यायपालिका का सम्मान करता हूं, लेकिन मुझे यकीन है कि सर्वोच्च अदालत में मेरी बेगुनाही साबित होगी।” उन्होंने धैर्य बनाए रखने की अपील करते हुए स्पष्ट किया कि वे पूरी आस्था के साथ सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार करेंगे और उन्हें पूरा विश्वास है कि अंततः सत्य की ही विजय होगी। फिलहाल, सबकी नजरें सोमवार को होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं।
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