RSS Controversy: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को लेकर बहस छिड़ गई है। खरगे ने हाल ही में RSS पर देश को बांटने का आरोप लगाते हुए प्रतिबंध लगाने की मांग की थी, जबकि अमित शाह ने इसे खारिज कर संगठन के योगदान को सराहा। यह बहस RSS के स्थापना के 100 वर्ष पूरे होने के मौके पर सामने आई।
बिहार पावर प्ले कॉन्क्लेव में NDTV से बातचीत करते हुए अमित शाह ने कहा कि RSS एक ऐसा संगठन है, जिसने लाखों युवाओं को देश के प्रति समर्पित होने की प्रेरणा दी है। उन्होंने संगठन के अनुशासन और देशभक्ति के मूल्यों की सराहना करते हुए जोर देकर कहा,“इस संगठन ने दो प्रधानमंत्री दिए हैं, अटल बिहारी वाजपेयी और नरेंद्र मोदी। मेरा मानना है कि दोनों को देश के सर्वश्रेष्ठ प्रधानमंत्रियों में गिना जाएगा।”अमित शाह ने यह भी कहा कि खरगे की मांग कभी पूरी नहीं होने वाली है और RSS के योगदान को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सार्वजनिक रूप से RSS पर देश को बांटने का आरोप लगाते हुए संगठन पर प्रतिबंध लगाने की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरदार वल्लभभाई पटेल के विचारों का सम्मान करते हैं, तो उन्हें इस दिशा में कदम उठाना चाहिए।खरगे ने आरोप लगाया:“देश में हो रही सारी गलत घटनाएं और कानून-व्यवस्था की समस्याएं, BJP और RSS की वजह से हैं।”उनके बयान ऐसे समय में आए, जब उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी पर कांग्रेस पर सरदार पटेल की विरासत को न निभाने का आरोप लगाया था।
RSS पर प्रतिबंध लगाने की मांग को लेकर कांग्रेस के ही सांसद कार्ति पी. चिदंबरम ने अलग राय जाहिर की। उन्होंने कहा कि भले ही वे RSS और BJP की विचारधारा से सहमत नहीं हैं, लेकिन मौजूदा कानूनी और राजनीतिक परिस्थितियों में प्रतिबंध लागू करना व्यावहारिक या टिकाऊ नहीं होगा।चिदंबरम ने याद दिलाया कि पहले भी RSS पर प्रतिबंध लग चुका है, जिसे बाद में हटा दिया गया था। उन्होंने कहा कि आज भी सरकार में शीर्ष पदों पर RSS के सदस्य हैं।
RSS की स्थापना 1925 में विजयादशमी के दिन डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने नागपुर में की थी। आजादी के बाद से अब तक इस संगठन पर तीन बार प्रतिबंध लग चुका है।संघ बीजेपी की विचारधारात्मक प्रेरणा है और चुनावी दौर में इसके कार्यकर्ता पार्टी के लिए जमीनी सहयोग प्रदान करते हैं। हालांकि, देश में हुए कई दंगों में भी संगठन का नाम सामने आया है, जिसे लेकर आलोचना होती रही है।
RSS ने 2025 में स्थापना के 100 साल पूरे किए। इस दौरान संगठन ने भारत के विभिन्न हिस्सों में सामाजिक और राष्ट्रीय गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाई है।अमित शाह ने कहा कि RSS ने देशभक्ति और अनुशासन का संदेश फैलाया है और लाखों युवाओं को राष्ट्रीय सेवा में प्रेरित किया है।विशेषज्ञों के अनुसार, RSS का राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव आज भी व्यापक है।
यह संगठन न केवल विचारधारा के माध्यम से बल्कि जनसंपर्क और सामाजिक गतिविधियों के जरिये भारत में अपने प्रभाव को कायम रखता है।RSS को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच बहस लगातार जारी है। जहां अमित शाह और BJP नेता संगठन के योगदान को राष्ट्र निर्माण में अहम बताते हैं, वहीं मल्लिकार्जुन खरगे इसे देश को बांटने वाला संगठन मानते हैं।संघ की 100 साल की यात्रा और इसके राजनीतिक प्रभाव को देखते हुए यह बहस आने वाले समय में भी जारी रहने की संभावना है।
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