Bharat Taxi Launch: भारत में परिवहन और सहकारिता के क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत करते हुए केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने सोमवार को ‘भारत टैक्सी’ सेवा के ड्राइवरों (सारथियों) के साथ सीधा संवाद किया। देश की पहली सहकारी क्षेत्र की टैक्सी सर्विस के रूप में उभरी ‘भारत टैक्सी’ के माध्यम से सरकार का लक्ष्य निजी कंपनियों के वर्चस्व को चुनौती देना और कैब ड्राइवरों की आर्थिक स्थिति में क्रांतिकारी सुधार लाना है। अमित शाह ने इस दौरान ड्राइवरों के कई सवालों के जवाब दिए और उन्हें बताया कि कैसे यह मॉडल उनके जीवन में समृद्धि लाएगा।
मुनाफे का हकदार अब सेठ नहीं, बल्कि मेहनत करने वाला ड्राइवर होगा
अमित शाह ने बातचीत के दौरान एक महत्वपूर्ण बिंदु पर जोर देते हुए कहा कि वर्तमान में प्रचलित कैब कंपनियां केवल अपने मालिकों को धनी बनाने के उद्देश्य से संचालित होती हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत टैक्सी का उद्देश्य इसके ठीक विपरीत है। सरकार चाहती है कि रात-दिन मेहनत करके गाड़ी चलाने वाले ड्राइवरों को उनकी मेहनत का पूरा मुनाफा मिले। उन्होंने कहा, “हमारा उद्देश्य भी मालिक को अमीर बनाना है, लेकिन उस मालिक को नहीं जो एयरकंडीशंड दफ्तर में बैठता है, बल्कि उस मालिक को जो सड़कों पर दिन-रात संघर्ष करता है।” अब तक 2.5 लाख से अधिक ड्राइवर इस सेवा में अपना पंजीकरण करा चुके हैं।
तीन साल का धैर्य और 25 करोड़ का विजन
सहकारी मॉडल की कार्यप्रणाली को समझाते हुए अमित शाह ने ड्राइवरों को निवेश और लाभ का गणित समझाया। उन्होंने बताया कि इस सेवा से जुड़ने के लिए ड्राइवरों को केवल 500 रुपये का प्रारंभिक निवेश करना है। उन्होंने एक अनुमान साझा किया कि 3 साल के भीतर भारत टैक्सी 25 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाएगी। इस मुनाफे का 20 प्रतिशत हिस्सा कंपनी के सुरक्षित कोष (रिजर्व) में जमा होगा, जबकि शेष 80 प्रतिशत राशि सीधे ड्राइवरों के बैंक खातों में उनके द्वारा किए गए काम और योगदान के आधार पर वितरित की जाएगी। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस आर्थिक स्थिरता को प्राप्त करने के लिए ड्राइवरों को पहले 3 साल तक धैर्य रखना होगा।
निर्णय लेने की प्रक्रिया में ड्राइवरों की होगी भागीदारी
सहकारी संस्थाओं के लोकतांत्रिक स्वरूप को बनाए रखने के लिए अमित शाह ने एक बड़ी घोषणा की। उन्होंने बताया कि जब ‘भारत टैक्सी’ के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स (निदेशक मंडल) का चुनाव होगा, तो उसमें कुछ सीटें अनिवार्य रूप से कैब ड्राइवरों के लिए आरक्षित होंगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कंपनी की नीतियों और भविष्य की योजनाओं में ड्राइवरों की आवाज बुलंद रहे और उनके हितों के साथ कोई समझौता न हो सके। यह कदम ड्राइवरों को केवल कर्मचारी के बजाय एक सक्रिय भागीदार के रूप में स्थापित करेगा।
सस्ता बीमा और आसान लोन की अनूठी सुविधा
ड्राइवरों की सामाजिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए, सरकार ने कई वित्तीय प्रावधान किए हैं। मंत्री ने जानकारी दी कि ‘भारत टैक्सी’ के सारथियों को को-ऑपरेटिव बैंकों के माध्यम से बेहद आसान शर्तों पर ऋण (लोन) उपलब्ध कराया जाएगा। खास बात यह है कि इस लोन के लिए ड्राइवर की गाड़ी को ही गिरवी (मॉर्गेज) रखा जाएगा, जिससे उन्हें अन्य जटिल कागजी कार्रवाई से राहत मिलेगी। इसके अतिरिक्त, इफको-टोकियो (IFFCO-TOKIO) के सहयोग से ड्राइवरों का बीमा किया जाएगा, जिसका प्रीमियम बाजार दरों की तुलना में काफी कम होगा।
भविष्य की योजनाएं और सरकारी प्रतिबद्धता
अमित शाह ने अंत में कहा कि सरकार भारत टैक्सी के मॉडल में आने वाले समय में और भी कई कल्याणकारी प्रावधान जोड़ने वाली है। चिकित्सा सुविधा से लेकर बच्चों की शिक्षा तक के पहलुओं पर विचार किया जा रहा है। उन्होंने ड्राइवरों से आग्रह किया कि वे इसे अपनी संस्था समझें और पूरी निष्ठा के साथ काम करें। सहकारी क्षेत्र की यह टैक्सी सेवा न केवल ड्राइवरों की आय बढ़ाएगी, बल्कि यात्रियों को भी प्रतिस्पर्धी दरों पर सुरक्षित सफर मुहैया कराएगी।
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