Amit Shah Security Breach
Amit Shah Security Breach : पश्चिम बंगाल की राजनीति में 1 अप्रैल को हुई एक घटना ने अब प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी के काफिले के पास हुए तनावपूर्ण घटनाक्रम पर बेहद सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने शनिवार को त्वरित कार्रवाई करते हुए कोलकाता पुलिस के चार वरिष्ठ अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का आदेश जारी किया है।
यह पूरी घटना उस समय घटित हुई जब अमित शाह और सुवेंदु अधिकारी का काफिला दक्षिण कोलकाता के अलीपुर सर्वे भवन की ओर जा रहा था। सुवेंदु अधिकारी भवानीपुर विधानसभा सीट के लिए अपना नामांकन दाखिल करने जा रहे थे। इस दौरान सुरक्षा घेरे के पास उपजे तनाव और अव्यवस्था को चुनाव आयोग ने बेहद गंभीरता से लिया है। आयोग का मानना है कि अति-विशिष्ट व्यक्तियों (VVIPs) की सुरक्षा में इस तरह की ढिलाई चुनावी माहौल में स्वीकार्य नहीं है।
चुनाव आयोग द्वारा निलंबित किए गए अधिकारियों में एक उपायुक्त (DCP) स्तर के अधिकारी भी शामिल हैं। गाज गिरने वाले अधिकारियों में द्वितीय उपायुक्त (दक्षिण) सिद्धार्थ दत्ता, अलीपुर थाने के प्रभारी (OC) प्रियांकर चक्रवर्ती, अतिरिक्त प्रभारी चांदी चरण बनर्जी और अलीपुर के सार्जेंट सौरभ चटर्जी के नाम प्रमुख हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि चुनाव के दौरान ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों की किसी भी प्रकार की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
ईसीआई के सचिव सुजीत कुमार मिश्रा ने इस संबंध में पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव दुष्यंत नारियाला को एक आधिकारिक पत्र भेजा है। इस पत्र में स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि संबंधित अधिकारियों को न केवल निलंबित किया जाए, बल्कि उनके खिलाफ विभागीय अनुशासनात्मक जांच भी शुरू की जाए। आयोग ने राज्य सरकार को 5 अप्रैल 2026 की सुबह 11 बजे तक अनुपालन रिपोर्ट (Compliance Report) सौंपने का कड़ा अल्टीमेटम दिया है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि आदेश का पालन जमीनी स्तर पर हो चुका है।
इस मामले को लेकर दिल्ली में बैठे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने अपनी गहरी नाराजगी व्यक्त की है। हाल ही में नवनियुक्त कोलकाता पुलिस आयुक्त अजय नंद के साथ हुई एक वर्चुअल बैठक में सीईसी ने कड़े सवाल दागे। उन्होंने पूछा कि जब केंद्रीय गृह मंत्री का दौरा पहले से तय था, तो पुलिस प्रशासन ने संभावित तनाव को रोकने के लिए एहतियाती कदम क्यों नहीं उठाए? आयोग ने इस विफलता को इंटेलिजेंस और ग्राउंड फोर्स की सामूहिक विफलता माना है।
आयोग ने राज्य सरकार से उन खाली पदों को भरने के लिए भी तत्काल प्रस्ताव मांगे हैं जो इन निलंबनों के कारण रिक्त हुए हैं। दूसरी ओर, कोलकाता पुलिस ने इस मामले में सक्रियता दिखाते हुए दक्षिण कोलकाता के दो थानों में तीन अलग-अलग शिकायतों के आधार पर दो प्राथमिकी (FIR) दर्ज की हैं। इससे पहले सिद्धार्थ दत्ता और मानस रॉय को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया था। चुनाव आयोग की इस कार्रवाई ने बंगाल में अन्य पुलिस अधिकारियों को भी कड़ा संदेश दिया है कि निष्पक्ष और सुरक्षित चुनाव उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
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