Andaman Nicobar search : प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गुरुवार को अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में पहली बार छापेमारी की। यह कार्रवाई अंडमान निकोबार स्टेट कोऑपरेटिव बैंक से जुड़े लोन फ्रॉड मामले की जांच के तहत की गई। इस मामले में पूर्व कांग्रेस सांसद कुलदीप राय शर्मा सहित अन्य आरोपी हैं, जिनके खिलाफ जांच जारी है। यह छापेमारी ED द्वारा अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है, जो सीधे तौर पर बैंक के भ्रष्टाचार और फर्जी लोन को लेकर की गई है।

9 स्थानों पर तलाशी, कोलकाता में भी हुआ बड़ा ऑपरेशन
ED ने इस मामले की जांच के दौरान अंडमान के पोर्ट ब्लेयर और उसके आसपास 9 स्थानों पर तलाशी ली। इसके अलावा, कोलकाता में भी दो जगहों पर ED अधिकारियों ने छापेमारी की। एजेंसी का कहना है कि इन छापों में उसे कई अहम दस्तावेज मिले हैं, जो 200 करोड़ रुपए के फर्जी लोन देने के प्रयासों को उजागर करते हैं। इन लोन का उद्देश्य बैंक के पैसे का गबन करना और आरोपी सांसद के निजी फायदे के लिए फर्जी कंपनियों के नाम पर इन लोन को जारी करना था।

कुलदीप शर्मा और फर्जी कंपनियों का मामला
आरोपों के अनुसार, कुलदीप राय शर्मा ने अपने फायदे के लिए 15 फर्जी कंपनियों का निर्माण कराया और इन कंपनियों के नाम पर ओवरड्राफ्ट सुविधाएं प्राप्त कीं। इन कंपनियों को बैंक से बड़ी मात्रा में फर्जी लोन मुहैया कराया गया। ED के अधिकारियों का कहना है कि इस धोखाधड़ी के जरिए बैंक को करोड़ों रुपए का नुकसान हुआ और यह मामला बैंकिंग धोखाधड़ी के बड़े मामलों में शुमार किया जा सकता है।
ED का दावा: साक्ष्य जुटाए गए, और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं
ED का कहना है कि उसने जो साक्ष्य जुटाए हैं, वे लोन फ्रॉड के बड़े नेटवर्क का हिस्सा प्रतीत होते हैं। जांच के दौरान कई दस्तावेजों का खुलासा हुआ है, जो फर्जी लोन के निर्माण और वितरण में शामिल अन्य लोगों के बारे में जानकारी देते हैं। अधिकारियों का मानना है कि इस मामले में और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं, और जांच को जल्द ही आगे बढ़ाया जाएगा।
कांग्रेस और कुलदीप शर्मा का बयान अभी तक सामने नहीं आया
इस मामले में कांग्रेस पार्टी और पूर्व सांसद कुलदीप राय शर्मा का अभी तक कोई बयान नहीं आया है। हालांकि, आरोपों को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। कुलदीप शर्मा की भूमिका इस मामले में क्या है और उनकी गिरफ्तारी का क्या प्रभाव पड़ेगा, इसे लेकर राजनीतिक पंडितों के बीच अनुमान लगाए जा रहे हैं।

पुलिस और ED की संयुक्त कार्रवाई
यह छापेमारी इस बात का संकेत है कि ED भ्रष्टाचार और बैंकिंग धोखाधड़ी के मामलों में सख्त कार्रवाई करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। साथ ही, इस छापेमारी ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि भारत में सार्वजनिक बैंकों को नुकसान पहुंचाने वाले दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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