Moolagummi Waterfall : आंध्र प्रदेश के आल्लूरी सीतारामाराजू (ASR) जिले से एक बेहद हृदयविदारक खबर सामने आई है। यहाँ के लोकप्रिय मुल्लुंगुम्मी वाटरफॉल (Mullungummi Waterfall) पर सेल्फी लेने के चक्कर में तीन किशोरियों को अपनी जान गंवानी पड़ी। यह दुखद घटना हुकुमपेटा मंडल के बुरजा पंचायत क्षेत्र की है। जानकारी के अनुसार, जांबावलासा गांव की पांच सहेलियां त्योहार की छुट्टियों का आनंद लेने के लिए एक साथ वाटरफॉल घूमने गई थीं। किसी ने सोचा भी नहीं था कि हंसी-खुशी शुरू हुआ यह सफर एक ऐसे खौफनाक मंजर पर खत्म होगा, जो पूरे जिले को झकझोर कर रख देगा।

सेल्फी का जानलेवा शौक: चट्टान से पैर फिसलने के कारण डूबीं तीन सहेलियां
पुलिस द्वारा दी गई प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, पांचों लड़कियां झरने के पास फोटो खींचने और सेल्फी वीडियो बनाने में मशगूल थीं। बेहतर बैकग्राउंड और व्यू पाने की कोशिश में उनमें से तीन लड़कियां—ट्रिशा, रत्ना कुमारी और पवित्रा—एक ऊंचे और चिकने पत्थर (चट्टान) पर चढ़ गईं। इसी दौरान अचानक संतुलन बिगड़ने से एक लड़की का पैर फिसल गया और उसे बचाने की कोशिश में तीनों लड़कियां गहरे पानी की तेज धारा में जा गिरीं। मौके पर मौजूद अन्य दो सहेलियों की चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग उन्हें बचाने के लिए दौड़े, लेकिन पानी का बहाव इतना तेज था कि वे पल भर में आंखों से ओझल हो गईं।
मृतकों की पहचान: पुलिस और राजस्व विभाग ने बरामद किए शव
इस भीषण हादसे में जान गंवाने वाली लड़कियों की उम्र महज 16 से 17 वर्ष के बीच थी। मृतकों की पहचान 17 वर्षीय ट्रिशा, 16 वर्षीय रत्ना कुमारी और 16 वर्षीय पवित्रा के रूप में हुई है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस बल और राजस्व विभाग के अधिकारी आनन-फानन में मौके पर पहुंचे। स्थानीय गोताखोरों की मदद से काफी मशक्कत के बाद तीनों किशोरियों के शवों को पानी से बाहर निकाला गया। पुलिस ने शवों को पंचनामा कर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है और मामले की आधिकारिक जांच शुरू कर दी गई है। सुरक्षित बची दो लड़कियां गहरे सदमे में हैं।
सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल: पहले भी हो चुकी हैं ऐसी दुर्घटनाएं
आल्लूरी सीतारामाराजू जिले के जलप्रपात अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध हैं, लेकिन यहाँ सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम न होना अब एक बड़ा मुद्दा बन गया है। मुल्लुंगुम्मी वाटरफॉल में हुई इस घटना ने पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा मानकों की पोल खोल दी है। जिले के कई वॉटरफॉल्स में पहले भी ऐसे हादसे हो चुके हैं, जिनमें पर्यटकों ने अपनी जान गंवाई है। प्रशासन का कहना है कि वे बार-बार पर्यटकों को खतरनाक किनारों से दूर रहने की चेतावनी देते हैं, लेकिन सोशल मीडिया के लिए वीडियो और रील बनाने का बढ़ता जुनून लोगों को मौत के मुँह में धकेल रहा है।
पर्यटकों की लापरवाही और प्रशासन की चुनौती
अधिकारियों ने बताया कि कई पर्यटक रोमांच के चक्कर में सुरक्षा चेतावनियों को नजरअंदाज कर देते हैं। झरने के आसपास की चट्टानें काई जमने के कारण काफी फिसलन भरी होती हैं, जहाँ जाना जानलेवा साबित हो सकता है। सेल्फी लेने की होड़ में लोग यह भूल जाते हैं कि एक छोटी सी चूक उनकी आखिरी गलती हो सकती है। प्रशासन ने अब पर्यटकों से अपील की है कि वे निर्धारित सुरक्षित क्षेत्रों से ही प्रकृति का आनंद लें और पानी की गहराई या तेज बहाव वाले इलाकों में जाने का जोखिम न उठाएं।
स्थानीय लोगों की मांग: बैरिकेड्स और पुलिस बल की तैनाती हो
इस दर्दनाक हादसे के बाद स्थानीय निवासियों और पर्यटन प्रेमियों में रोष है। ग्रामीणों का कहना है कि सिर्फ चेतावनी बोर्ड लगाने से काम नहीं चलेगा। उन्होंने मांग की है कि लोकप्रिय पर्यटन स्थलों पर खतरनाक जगहों की घेराबंदी (बैरिकेडिंग) की जाए और वहां सुरक्षा गार्ड या पुलिस कर्मियों की स्थायी तैनाती की जाए ताकि कोई भी पर्यटक नियमों का उल्लंघन न कर सके। यदि समय रहते सुरक्षा के कड़े कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में ऐसे और भी मासूम जीवन सेल्फी की भेंट चढ़ सकते हैं।
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