Andhra Pradesh : आंध्र प्रदेश के काकीनाडा जिले में दो साल की नन्ही बच्ची सुनकारा ज्ञानेश्वरी का गायब होना राज्य के इतिहास का सबसे पेचीदा और हृदयविदारक सर्च ऑपरेशन बन गया है। काकीनाडा जिले के सीएच अग्रहारम गांव में 6 जून को हुई इस घटना के बाद से प्रशासन और पुलिस ने उसे ढूंढने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। 400 से अधिक लोग, ड्रोन, थर्मल-इमेजिंग तकनीक, जंगल के विशेषज्ञ और एनडीआरएफ की टीमें चौबीसों घंटे काम कर रही हैं, लेकिन दो हफ्ते बीत जाने के बाद भी बच्ची का कहीं कोई सुराग नहीं मिला है। 50 एकड़ के विशाल पाम ऑयल प्लांटेशन में खेलते-खेलते गायब हुई इस बच्ची की तलाश अब एक अनसुलझी पहेली बन गई है।

कैसे शुरू हुआ यह सिलसिला और क्या है घटना का पूरा विवरण
घटना के दिन बच्ची के माता-पिता, जो खेतों में श्रमिक के रूप में काम करते हैं, अपने काम में व्यस्त थे। उन्हें लगा कि बच्ची सुरक्षित है, लेकिन कुछ घंटों बाद ही उनकी दुनिया उजड़ गई। उसी दोपहर एक ग्रामीण ने बच्ची को परिवार के पालतू कुत्ते के साथ पहाड़ी के पास देखा था। ग्रामीण ने उसे घर लाने की कोशिश की, लेकिन उस कुत्ते ने उसे बच्ची के करीब नहीं आने दिया। ग्रामीण को लगा कि कुत्ता बच्ची की सुरक्षा कर रहा है, इसलिए वह चला गया। बाद में वही कुत्ता अकेला वापस घर लौटा, जो इस मामले में सबसे बड़े रहस्य के रूप में उभरा है। इस घटना के बाद से ही पूरा प्रशासनिक अमला हरकत में आ गया।

तकनीक और खोजी प्रवृत्तियों का इस्तेमाल, फिर भी हाथ खाली
तलाश में पुलिस ने 38 सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले और 170 से अधिक फोन कॉल्स का डेटा विश्लेषण किया। घने जंगलों और दुर्गम पहाड़ियों में थर्मल ड्रोन तैनात किए गए। वन विभाग के वन्यजीव विशेषज्ञों को भी बुलाया गया ताकि जंगली जानवरों के पदचिह्नों की पहचान की जा सके। जांचकर्ताओं ने शिकार करने वाले जानवरों को लुभाने के लिए मांस से भरी गुड़िया भी झाड़ियों में रखीं, ताकि यदि बच्ची किसी वन्यजीव का शिकार बनी हो, तो उसे कैमरे में कैद किया जा सके। दुर्भाग्य से, वहां जंगली जानवरों या अजगरों का भी कोई निशान नहीं मिला, जिससे यह संदेह गहरा गया है कि शायद इंसानी दखल के कारण जानवर उस इलाके से दूर चले गए हैं।
पालतू कुत्ते की संदिग्ध भूमिका और दर्दनाक अंत
इस पूरे मामले में परिवार का पालतू कुत्ता रहस्य का केंद्र बन गया है। वह बच्ची के साथ था, फिर अकेला लौटा, आक्रामक हो गया और बाद में फिर से गायब हो गया। जब वह मिला, तो उसे जीपीएस ट्रैकर पहनाकर जंगल में छोड़ा गया, ताकि वह बच्ची तक पहुंच सके। कुत्ता कई किलोमीटर घूमा, लेकिन वापस लौटने के कुछ समय बाद ही उसकी मौत हो गई। इस कुत्ते की मौत के साथ ही जांच एजेंसियों की एक बड़ी उम्मीद टूट गई, क्योंकि वे उसे बच्ची के ठिकाने का आखिरी जीवित गवाह मान रहे थे। अब बच्ची के माता-पिता पूरी तरह से पुलिस पर निर्भर हैं, लेकिन तंत्र-मंत्र और पूजा-पाठ के दावे करने वाले लोगों ने उनकी मानसिक परेशानी और बढ़ा दी है।
पुलिस की तीन दिशाओं में जांच: क्या कोई साजिश है?
काकीनाडा के एसपी जी. बिंदु माधव के अनुसार, पुलिस अब एक साथ तीन प्रमुख संभावनाओं पर काम कर रही है। पहली—किसी हिंसक जानवर का हमला, दूसरी—अपहरण, और तीसरी—किसी दुर्घटना में बच्ची का पास के कुएं या जलाशय में गिर जाना। पुलिस उन खानाबदोश समूहों और काजू इकट्ठा करने वाले मौसमी समुदायों से पूछताछ कर रही है जो अक्सर उस इलाके में आते-जाते हैं। राज्य भर में बच्चों के लापता होने के पिछले मामलों और संदिग्ध फोन नंबरों का मिलान किया जा रहा है। सरकार ने इस मामले को अत्यंत गंभीरता से लिया है और गृह मंत्री वंगलापुडी अनीता ने स्पष्ट किया है कि हर सुराग की बारीकी से जांच हो रही है।
अफवाहों का बाजार गर्म और अनिश्चितता का माहौल
इलाके में तमाम तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। कुछ लोग जंगली सूअरों द्वारा हमले की बात कह रहे हैं, तो कुछ को बिजली की बाड़ के कारण हुए किसी हादसे और फिर सबूत मिटाने की साजिश की आशंका है। हालांकि, पुलिस ने इन अटकलों की पुष्टि नहीं की है। ज्ञानेश्वरी के माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल है और पूरा गांव एक गहरी अनिश्चितता में है। ज्ञानेश्वरी का यह लापता होना आंध्र प्रदेश के सुरक्षा तंत्र और वन विभाग के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुका है, और उम्मीद अब भी बरकरार है कि इस महा-अभियान का कोई न कोई ठोस नतीजा जरूर निकलेगा।
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