Aniruddhacharya
वृंदावन के सुप्रसिद्ध कथावाचक अनिरुद्धाचार्य महाराज अपनी बेबाक और अक्सर विवादों में रहने वाली शैली के लिए जाने जाते हैं। हाल ही में उन्होंने एक विशेष साक्षात्कार में ‘अस्त्रालय’ से बने ऑस्ट्रेलिया से लेकर ‘लिव-इन रिलेशनशिप’ तक के विभिन्न विषयों पर अपनी राय रखी। उन्होंने अपने ऊपर लगने वाले आरोपों की सफाई देते हुए कहा कि उनके प्रवचनों के छोटे वीडियो (क्लिप्स) काटकर उन्हें गलत तरीके से पेश किया जाता है। अनिरुद्धाचार्य ने दावा किया कि उनकी बातों का वास्तविक अर्थ समझने के लिए पूरी कथा सुनना आवश्यक है।
अनिरुद्धाचार्य ने इस साल लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले युवक-युवतियों पर विवादित टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था कि बिना विवाह के साथ रहना मानवीय संस्कृति नहीं है। उनके शब्दों में, “लिव-इन में तो कुत्ते और बिल्ली रहते हैं; हमारे देश के कुत्ते हजारों साल से इसी तरह रह रहे हैं।” जब उनसे इस कड़े बयान पर दोबारा सवाल पूछा गया, तो उन्होंने पीछे हटने के बजाय तंज कसते हुए प्रतिप्रश्न किया— “तो क्या शेरनी लिव-इन में रहती है?” उनका मानना है कि भारतीय संस्कार केवल विवाह के बंधन को ही मान्यता देते हैं।
कथावाचक का सबसे चर्चित और वायरल बयान ऑस्ट्रेलिया के नामकरण को लेकर रहा है। उन्होंने तर्क दिया कि रामायण काल में जब राम-रावण युद्ध समाप्त हुआ, तो वहां लाखों सैनिकों के अस्त्र-शस्त्रों का ढेर लग गया था। भगवान राम को चिंता हुई कि ये घातक हथियार किसी गलत हाथ में न पड़ जाएं। इसलिए उन्होंने अपनी सेना को आदेश दिया कि इन शस्त्रों को नावों में भरकर 10 हजार किलोमीटर दूर समुद्र के पार छोड़ आएं। अनिरुद्धाचार्य का दावा है कि जहां ये अस्त्र रखे गए, उसे ‘अस्त्रालय’ कहा गया, जो कालांतर में अपभ्रंश होकर ‘ऑस्ट्रेलिया’ बन गया।
सोशल मीडिया पर इस थ्योरी का मजाक उड़ाए जाने के बावजूद अनिरुद्धाचार्य अपने बयान पर अडिग हैं। उन्होंने कहा, “मैं खुद ऑस्ट्रेलिया गया हूं और वहां के मूल निवासियों की कद-काठी और प्राचीन परंपराओं को देखा है। वे आज भी प्राचीन मान्यताओं को मानते हैं।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि संतों से जो सुना था, वह वहां जाकर पुख्ता हो गया है। उनके अनुसार, वर्तमान ऑस्ट्रेलिया का अपना मौलिक अस्तित्व समाप्त हो चुका है और वह सांस्कृतिक रूप से गुलाम हो चुका है।
महिलाओं के अपमान के आरोपों को नकारते हुए कथावाचक ने उन्हें पूजनीय बताया। उन्होंने पुरुषों को सलाह दी कि वे अपनी संपत्ति और जमीन का कुछ हिस्सा अपनी पत्नी के नाम पर जरूर रखें। उन्होंने कहा, “नारी तो नारायणी है। हम तो हर वृद्ध माता के पैर दबाकर आशीर्वाद लेते हैं।” उन्होंने आधुनिक समाज पर कटाक्ष करते हुए कहा कि आज के दौर में कुछ बेटे-बहुएं अपने माता-पिता के पैर छूने में संकोच करते हैं, लेकिन सनातन धर्म में मां का स्थान सर्वोपरि है।
जब उनसे उनके उस बयान के बारे में पूछा गया जिसमें उन्होंने 24 साल की लड़की की उम्र को लेकर टिप्पणी की थी, तो उन्होंने इसे ‘लव जिहाद’ के संदर्भ से जोड़ा। उन्होंने बचाव करते हुए कहा कि यह बात उन्होंने व्यास पीठ (कथा के दौरान) से नहीं, बल्कि अपने ‘प्रश्नोत्तरी कार्यक्रम’ में कही थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रश्नोत्तरी कार्यक्रम व्यास गद्दी की गरिमा से अलग होता है, जहां वे सामाजिक बुराइयों और लव जिहाद जैसी चुनौतियों पर व्यावहारिक चर्चा करते हैं।
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