Ankita Bhandari Case
Ankita Bhandari Case: उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर देवभूमि में न्याय की गूंज एक बार फिर तेज हो गई है। न्याय की आस में अंकिता के माता-पिता ने बुधवार 7 जनवरी की देर शाम मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात की। इस मुलाकात का मुख्य उद्देश्य उस रहस्यमयी ‘वीवीआईपी’ (VVIP) का नाम उजागर करना और पूरे मामले की जांच सीबीआई (CBI) से कराने की मांग को दोहराना था। पिछले दो सप्ताह से अधिक समय से उत्तराखंड की सड़कों पर जनसैलाब उमड़ रहा है, जो अंकिता के दोषियों को कड़ी सजा दिलाने की मांग कर रहा है।
अंकिता हत्याकांड में उस वक्त नया मोड़ आया जब उर्मिला सनावर (जो पूर्व भाजपा विधायक सुरेश राठौड़ की पत्नी होने का दावा करती हैं) ने सोशल मीडिया पर कुछ ऑडियो और वीडियो साझा किए। इन पोस्ट्स में यह संकेत दिया गया कि अंकिता भंडारी हत्याकांड के पीछे भाजपा का एक बहुत बड़ा नेता यानी ‘वीवीआईपी’ शामिल था। इस खुलासे के बाद से ही राज्य की सियासत गरमा गई है और विपक्षी दलों के साथ-साथ आम जनता भी सरकार से उस प्रभावशाली व्यक्ति का नाम सार्वजनिक करने की मांग कर रही है।
अंकिता की मां सोनी भंडारी और पिता वीरेंद्र सिंह भंडारी ने सीएम आवास पहुंचकर अपनी बेटी के लिए न्याय की गुहार लगाई। मुलाकात के बाद राज्य आंदोलनकारी कमला पंत द्वारा साझा किए गए एक वीडियो में अंकिता के पिता ने बताया कि मुख्यमंत्री से उनकी बातचीत करीब साढ़े सात बजे हुई। उन्होंने स्पष्ट तौर पर मांग रखी है कि इस केस की जांच सुप्रीम कोर्ट के वर्तमान जज की निगरानी में सीबीआई द्वारा की जानी चाहिए। वीरेंद्र सिंह ने बताया कि प्रशासन ने उन्हें देहरादून लाने के लिए विशेष वाहन की व्यवस्था की थी।
समाज के कुछ हिस्सों में चल रही अफवाहों का जवाब देते हुए वीरेंद्र सिंह भंडारी बेहद भावुक हो गए। उन्होंने स्पष्ट लहजे में कहा, “मैंने अपनी बेटी की मौत का कोई सौदा नहीं किया है।” उन्होंने आगे कहा कि जिस तरह उनकी बेटी अंकिता ने दबाव में भी अपनी अस्मत का सौदा नहीं किया और जान दे दी, उसी तरह वे भी अपनी बेटी के संघर्ष को पैसों के लिए नहीं बेचेंगे। अंकिता के पिता ने साफ किया कि उनकी लड़ाई उस वीवीआईपी को सजा दिलाने के लिए है जिसके कारण उनकी हंसती-खेलती दुनिया उजड़ गई।
अंकिता की मां सोनी भंडारी ने रोते हुए अपना दुख साझा किया। उन्होंने पूछा कि आखिर उनकी बेटी का क्या कसूर था? उन्होंने अंकिता को पढ़ा-लिखाकर इस उम्मीद में नौकरी पर भेजा था कि वह परिवार का सहारा बनेगी, लेकिन उसे वीवीआईपी की सनक की बलि चढ़ा दिया गया। सोनी भंडारी ने उन लोगों को भी आड़े हाथों लिया जो उन पर ‘सौदा’ करने के झूठे आरोप लगा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर वे बिके होते, तो आज सड़कों पर रात-दिन न्याय के लिए संघर्ष नहीं कर रहे होते।
अंकिता के माता-पिता का कहना है कि यह लड़ाई अब केवल उनकी बेटी के लिए नहीं है, बल्कि उत्तराखंड की उन तमाम बेटियों के लिए है जो अपने घरों से दूर नौकरी करने या पढ़ने जाती हैं। उन्होंने कसम खाई कि वे मरते दम तक इस लड़ाई को लड़ेंगे ताकि भविष्य में किसी दूसरी ‘अंकिता’ के साथ ऐसी क्रूरता न हो। वहीं, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आश्वासन दिया है कि सरकार मामले की निष्पक्ष और उचित जांच के लिए प्रतिबद्ध है, हालांकि सीबीआई जांच की मांग पर अभी कोई आधिकारिक निर्णय सार्वजनिक नहीं हुआ है।
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